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कैबिनेट ने आज भारत सरकारऔर आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) के बीच हस्ताक्षर किये गए मुख्यालय समझौते (HQA) के अनुसमर्थन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भारत सरकार और आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन (CDRI) के बीच 22 अगस्त, 2022 को हस्ताक्षर किये गए मुख्यालय समझौते (HQA) के अनुसमर्थन को मंजूरी दे दी है।

भारत के प्रधानमंत्री ने 23 सितंबर, 2019 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन के दौरान सीडीआरआई को लॉन्च किया था। यह भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक प्रमुख वैश्विक पहल है और इसे जलवायु परिवर्तन तथा आपदा सहनीयता से जुड़े मामलों में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका प्राप्त करने के भारत के प्रयासों के रूप में देखा जाता है।

कैबिनेट ने 28 अगस्त, 2019 को नई दिल्ली में सहायक सचिवालय के साथ सीडीआरआई की स्थापना की मंजूरी दी थी और इसके साथ ही, सीडीआरआई को भारत सरकार की वित्तीय सहायता के रूप में 2019-20 से 2023-24 तक 5 वर्षों की अवधि के लिए 480 करोड़ रुपये दिए जाने की भी मंजूरी दी थी।

इसके बाद, 29 जून, 2022 को कैबिनेट ने सीडीआरआई को एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन के रूप में मान्यता देने और संयुक्त राष्ट्र (पी एंड आई) अधिनियम, 1947 की धारा – 3 के तहत सीडीआरआई को छूट, प्रतिरक्षा और विशेषाधिकार दिए जाने के लिए मुख्यालय समझौते (एचक्यूए) पर हस्ताक्षर किये जाने की मंजूरी दी थी।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसरण में, 22 अगस्त, 2022 को भारत सरकार और सीडीआरआई के बीच मुख्यालय समझौते (एचक्यूए) पर हस्ताक्षर किए गए।

सीडीआरआई राष्ट्रीय सरकारों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और कार्यक्रमों, बहुपक्षीय विकास बैंकों तथा वित्तीय व्यवस्था, निजी क्षेत्र, शैक्षणिक और ज्ञान संस्थानों की एक वैश्विक साझेदारी है, जिसका उद्देश्य जलवायु और आपदा जोखिमों के लिए अवसंरचना प्रणालियों की सहनीयता को बढ़ावा देना है, ताकि सतत विकास सुनिश्चित किया जा सके।

अपने शुभारम्भ के बाद, इकतीस (31) देश, छह (06) अंतर्राष्ट्रीय संगठन और दो (02) निजी क्षेत्र के संगठन सीडीआरआई के सदस्य बन गए हैं। सीडीआरआई आर्थिक रूप से विकसित देशों, विकासशील देशों और जलवायु परिवर्तन और आपदाओं के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील देशों को आकर्षित करके लगातार अपनी सदस्यता का विस्तार कर रहा है।

भारत सरकार और सीडीआरआई के बीच हस्ताक्षरित मुख्यालय समझौते के अनुसमर्थन से संयुक्त राष्ट्र (विशेषाधिकार और प्रतिरक्षा) अधिनियम, 1947 की धारा-3 के तहत अपेक्षित छूट, प्रतिरक्षा और विशेषाधिकार दिए जाने में सुविधा होगी, जिनके आधार पर सीडीआरआई को एक स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यक्तित्व प्रदान किया जा सकेगा, ताकि यह अपने कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व अधिक कुशलता के साथ निष्पादित कर सके।

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