ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने इंडिया हैबिटेट सेंटर में आज ‘भूमि संवाद’- डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डी आई एल आर एम पी) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री ने नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एन जी डी आर एस) पोर्टल और डैशबोर्ड का भी शुभारंभ किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भूमि प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करने वाले राज्यों से अन्य राज्यों को सीखने और उन्हें अपनाने का आह्वान किया। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकारों द्वारा किए गए अच्छे कार्यों की सराहना करने और प्रोत्साहित करने के लिए भूमि संसाधन विभाग ने राष्ट्रीय भूमि प्रबंधन पुरस्कार-2021 और बुनियादी ढांचे के लिए भूमि अधिग्रहण की सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर राज्यों की राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग भी शुरू की है।
विशिष्ट भू खंड पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) के महत्व के बारे में बात करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि यह एक प्रकार से भूखंड के आधार नंबर की तरह है। उन्होंने कहा कि इस अनूठी प्रणाली में भूखंड के लिए भू-निर्देशांक के आधार पर एक विशिष्ट पहचान संख्या तैयार की जाती है और उक्त भूखंड की पहचान के लिए इसे अंकित किया जाता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत कम्प्यूटरीकृत डिजिटल भूमि रिकॉर्ड देश के विभिन्न राज्यों/ केंद्र शासित क्षेत्रों के बीच साझा करने और देश भर में भूखंडों को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करने की एक समान प्रणाली के लिए की गई है। अब तक इसे 13 राज्यों में लागू किया जा चुका है और 6 राज्यों में प्रायोगिक परीक्षण किया जा चुका है। विभाग ने चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2021-22) के अंत तक पूरे देश के भूखंडों को विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित करने की प्रक्रिया को पूरा करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जब यह व्यवस्था पूरे देश में लागू हो जाएगी तो अधिकांश भूमि विवाद अपने आप सुलझ जाएंगे।
दिन भर चलने वाली कार्यशाला के दौरान मुख्य रूप से डिजिटल भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के विभिन्न घटकों की प्रगति और विभिन्न राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अन्य राज्यों के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर चर्चा की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम के विभिन्न घटकों में अब तक व्यापक प्रगति हुई है, जिसमें देश के कुल 656190 गांवों में से 600811 गांवों के भूमि अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण का कार्य पूरा हो गया है, कुल 1.63 करोड़ राजस्व मानचित्रों / एफएमबी में से 1.11 करोड़ मानचित्रों के डिजिटलीकरण का कार्य पूरा हो गया है, कुल 5220 उप पंजीयक कार्यालय की तुलना में 4883 कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो गया है, उप पंजीयक कार्यालयों और राजस्व कार्यालयों के एकीकरण अभियान में 3975 कार्यालयों का एकीकरण किया जा चुका है जबकि कुल कार्यालयों की संख्या 5220 है, कुल 6712 तहसील/राजस्व कार्यालयों की तुलना में 2508 तहसील/राजस्व कार्यालयों में आधुनिक अभिलेख कक्ष की स्थापना पूरी हो चुकी है और देश के कुल 656190 गांवों की तुलना में 74789 गांवों में सर्वेक्षण/ पुनः सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया जा चुका है।
एन जी डी आर एस पंजीकरण प्रणाली के लिए एक आधुनिक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है जिसे एन आई सी द्वारा विकसित किया गया है। यह सॉफ्टवेयर देश के राज्य आधारित आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करने में दक्ष है। यह पारदर्शिता और दस्तावेजों को क्रियान्वित करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करता है और दस्तावेजों के पंजीकरण की प्रक्रिया में लागत, समय और बार बार जाने की प्रक्रिया में कमी लाता है। अब तक इसे 12 राज्यों में क्रियान्वित किया जा चुका है और 3 राज्यों में प्रायोगिक चरण में है। इस प्रकार यह 10 करोड़ जनसंख्या को कवर कर चुका है। जानकारी के अनुसार इस सिस्टम का उपयोग करते हुए 25 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीकरण किया जा चुका है। यह भी अनुभव किया गया है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से पंजीकरण कराने के लिए किसी व्यक्ति को मात्र एक या दो बार कार्यालय जाना पड़ता है जबकि पहले 8-9 बार अलग-अलग कार्यालयों में चक्कर लगाना पड़ता था। ज्यादा जोर रजिस्ट्री ऑफिस को उन अन्य दफ्तरों के साथ एकीकरण पर है जिनसे पंजीकरण की प्रक्रिया में कुछ सूचनाओं की आवश्यकता होती थी। दस्तावेजों के पंजीकरण के बाद दाखिल-खारिज से जुड़ी सूचना संबंधित कार्यालय को स्वतः ही चली जाती है। वर्ष 2020 के लिए पंजीकरण प्रक्रिया के डिजिटलीकरण हेतु की गई पहल के चलते विभाग को डिजिटल इंडिया अवार्ड 2020 से सम्मानित किया जा चुका है।
सभी प्रक्रियाओं और भूमि अभिलेख संबंधी डेटाबेस के एकीकरण के लिए विभाग ने एकीकृत भूमि प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईएलएमआईएस) परियोजना के माध्यम से भूमि प्रबंधन प्रणाली को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए एक समेकित प्रयास भी शुरू किया है, जिसमें भूमि संबंधी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होती है। बैंकों, वित्तीय संस्थानों, सर्कल दरों, पंजीकरण कार्यालयों और अन्य क्षेत्रों के साथ भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस को एकीकृत करने का यह प्रयास संबंधित कार्यालयों द्वारा प्रभावी और कुशल सेवा प्रदान करना है। इसे अब तक देश के 283 जिलों में लागू किया जा चुका है।
कार्यशाला के दौरान 8 राज्यों ने भूमि प्रबंधन के संबंध में आपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रथाओं पर प्रस्तुतियाँ दीं। भूमि संसाधन विभाग ने राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज़ पंजीकरण प्रणाली (एनजीडीआरएस), विशिष्ट भूखंड पहचान संख्या (यूएलपीआईएन) और डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम की देश भर में प्रगति की स्थिति पर प्रस्तुतिकरण दिया।
भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के महत्व के बारे में बात करते हुए केन्द्रीय इस्पात और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण भूमि के स्वामित्व का पुख्ता दस्तावेज होगा जिससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकेगी। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने राज्य सरकारों से जनता की भलाई के लिए कार्यक्रम को जल्द से जल्द लागू करने के लिए आगे आने का अनुरोध किया।
भूमि संसाधन विभाग के सचिव अजय तिर्की ने विभागीय गतिविधियों के लिए भूमि अभिलेखों के एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि भूमि रिकॉर्ड के आंकड़े अन्य विभागों के साथ कैसे साझा किए जा सकते हैं और लोक कल्याणकारी योजनाओं के लिए किस प्रकार से उनका उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने राज्यों से मार्च 2023 तक भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को पूरा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कार्यशाला में नागेंद्र नाथ सिन्हा, सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय, सुनील कुमार, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय, राजस्व विभाग के मंत्रियों, पंजीकरण विभाग के मंत्रियों, प्रमुख सचिव / अपर मुख्य सचिव, राजस्व / पंजीकरण विभाग, महानिरीक्षक, सर्वेक्षण के बंदोबस्त आयुक्त और राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के बंदोबस्त विभाग ने भी भाग लिया।
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