केंद्र ने पिछले कुछ हफ्तों के दौरान कोविड मामलों में बढ़ोतरी दर्ज करने वाले राज्यों को सावधानी व निरंतर सतर्कता रखने और कोविड के खिलाफ निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने ऐसे 14 राज्यों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से कोविड की स्थिति की स्थिति की समीक्षा की, जो सप्ताह-दर-सप्ताह के आधार पर कोविड परीक्षणों की संख्या और औसत कोविड टीकाकरण के कम होने सहित बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले दर्ज कर रहे हैं। इस समीक्षा बैठक में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल भी उपस्थित थे।
डॉ. वीके पॉल ने कोविड मामलों में बढ़ोतरी दर्ज करने वाले राज्यों को महामारी की उभरती हुई स्थिति से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने जोर देकर कहा, “9 जून, 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी संशोधित निगरानी रणनीति के अनुरूप कार्रवाई के लिए प्रमुख कदम सक्रिय निगरानी को मजबूत करने पर अपना ध्यान केंद्रित करना है।” डॉ. पॉल ने आगे कहा, “नियमित निगरानी हमारी कोविड प्रतिक्रिया और प्रबंधन रणनीति के स्टील फ्रेम (मजबूत ढांचे) का गठन करती है और इस पर निरंतर ध्यान देने की जरूरत है।” वहीं, उन्होंने चार प्रमुख बिंदुओं वाली रणनीति को रेखांकित किया। इनमें भारत आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी, समुदाय आधारित निगरानी, प्रहरी स्थल की निगरानी (स्वास्थ्य सुविधा-आधारित निगरानी व प्रयोगशाला-आधारित निगरानी) और संपूर्ण जीनोम सिक्वेंसिंग (अनुक्रमण) शामिल हैं। इसके अलावा राज्यों को सभी जिला अस्पतालों, प्रमुख निजी अस्पतालों और जिलों के मेडिकल कॉलेजों से सभी एसएआरआई व आईएलआई मामलों की जांच करने और रिपोर्ट करने की सलाह दी गई है। साथ ही उन भौगोलिक क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा गया है, जहां ये क्लस्टर (संक्रमण के मामलों की अधिक संख्या) सामने आ रहे है।
वहीं, राज्यों को सख्ती से सलाह दी गई कि वे भर्ती किए गए कोविड रोगियों की महामारी विज्ञान प्रोफाइल की सख्ती से निगरानी करें। साथ ही, स्वास्थ्य मंत्रालय को बेतरतीब या ऐनिक्डोटल (उपाख्यानात्मक) रिपोर्टिंग की जगह नैदानिक (रोग संबंधी) रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह शुरुआती चरण में रोगियों की किसी भी असामान्य या विभिन्न नैदानिक प्रस्तुति की पहचान करने में सहायता करेगा।
इसका उल्लेख करते हुए कि कई राज्यों में संक्रमण की मौजूदा बढ़ोतरी का कारण टीके की दूसरी और एहतियाती खुराक लगाने की संख्या में कमी थी, उन राज्यों को विशेष रूप से 60 साल से अधिक उम्र के वृद्धजनों के टीकाकरण कवरेज और 12-17 जनसंख्या समूह में दूसरी खुराक लगाने में तेजी लाने की सलाह दी गई। इसके अलावा यह रेखांकित किया गया कि कोविड टीकाकरण के लिए संचालित हर घर दस्तक 2.0 अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। यह रेखांकित करते हुए कि कोविड टीके की खुराक की कोई कमी नहीं है, राज्यों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई थी कि पहले एक्स्पायर होने वाले टीके को पहले लगाया जाए, जिससे कीमती राष्ट्रीय संसाधन की बर्बादी को रोका जा सके।
डॉ. पॉल और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों में कोविड परीक्षण के निम्न स्तर और इसमें आरटीपीसीआर की हिस्सेदारी में गिरावट को रेखांकित किया। एक संकीर्ण और व्यापक परीक्षण स्पेक्ट्रम की जगह राज्यों को सलाह दी गई कि वे सभी जिलों में अधिक संक्रमण की रिपोर्ट करने वाले नए क्लस्टर और भौगोलिक क्षेत्रों के साथ बुखार के उपचार के लिए क्लीनिक आने वाले, एसएआरआई और आईएलआई रोगियों के रणनीतिक परीक्षण पर ध्यान केंद्रित करें। इसके अलावा राज्यों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की संशोधित निगरानी रणनीति के अनुरूप निर्मित इंसाकोग नेटवर्क की प्रयोगशालाओं के माध्यम से संपूर्ण जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू करने को कहा गया। इसे पहले ही राज्यों के साथ साझा किया जा चुका है।
स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज: कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए बीमा योजना’ के तहत दावों को तेजी से निपटाया जाए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीमा बकाया का भुगतान किया जाए, जिनकी कोविड के कारण मृत्यु हो गई।
आगामी त्योहारों को देखते हुए राज्यों को विशेष रूप से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई।
इस बैठक में असम, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) व एनएचएम निदेशकों के साथ आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव, एम्स-नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, अपर सचिव (मंत्रालय) डॉ. मनोहर अगनानी, अपर सचिव (मंत्रालय) गोपालकृष्णन, डीजीएचएस डॉ. अतुल गोयल, संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, एनसीडीसी के निदेशक डॉ. सुजीत सिंह और स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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