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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने दिल्ली में डेंगू की स्थिति की समीक्षा की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज डेंगू के नियंत्रण और प्रबंधन के लिए किए गए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की समीक्षा हेतु केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने हस्तक्षेप करने की तात्कालिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत से गरीब लोग डेंगू से प्रभावित होते हैं, जो कम प्लेटलेट काउंट के कारण कमजोरी का शिकार हो जाते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र मूल कारणों को समझे बिना लक्षणों को दबाने के लिए एंटी-पायरेटिक दवाएं लिख सकते हैं, जिससे रोगी की मृत्यु भी संभव है। चूंकि डेंगू की पहचान करने के लिए जांच करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है, इसलिए इन मौतों की रिपोर्ट नहीं होगी और घटनाओं को कम रिपोर्ट किया जाना जारी रहेगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को जांच क्षमता में तेजी लाने का निर्देश दिया ताकि सभी मामलों की रिपोर्ट की जा सके और मरीजों का ठीक से इलाज किया जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। समीक्षा के दौरान उन्होंने पाया कि कुछ अस्पताल डेंगू के मरीजों से अधिक भरे हुए हैं जबकि अन्य अस्पतालों में बिस्तर खाली हैं। इस प्रकार सभी हितधारकों के बीच प्रभावी संचार का आगे का रास्ता सुझाया गया। उन्होंने दिल्ली के अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे डेंगू के इलाज के लिए कोविड बिस्तरों को फिर से इस्तेमाल करने की संभावना पर गौर करें। यह निर्णय लिया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य अधिकारी डेंगू से निपटने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अपने समकक्षों का सहयोग करेंगे।

डॉ. मंडाविया ने वेक्टर नियंत्रण को तेज करने के प्रयास में सभी एमसीडी, एनडीएमसी, छावनी बोर्ड और अन्य हितधारकों को भी शामिल करने की सलाह दी। यह नोट किया गया कि हालांकि स्वास्थ्य प्रशासन वेक्टर नियंत्रण पर उनके संचार में बहुत प्रभावी था, लेकिन आम लोगों द्वारा की गई कार्रवाई पर इन संदेशों की प्रभावकारिता छिपी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मच्छरदानी, पूरी बाजू के कपड़े और इनडोर फॉगिंग को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है, जबकि एमसीडी को डेंगू रोगियों तथा उसके आसपास के 60 घरों में स्प्रे करना है।

स्वास्थ्य मंत्री ने घरों, रेस्तरां, उद्योगों, ओवरहेड टैंकों में जमा पानी को हटाने के अलावा पानी की नियमित आपूर्ति रहित उन मलिन बस्तियों की पहचान करने पर जोर दिया जहां पानी खपत के लिए इकट्ठा किया जाता है। हालांकि कुछ सतहों में व्यापक सफाई की आवश्यकता होती है, जहां कूलर और रेफ्रिजरेटर ट्रे की तरह पानी को बार-बार बदला जाता है तथा टेमेफोस ग्रेन्यूल्स जैसे रसायनों का उपयोग लार्वा नियंत्रण में प्रभावी माना जाता है।

डॉ. मनसुख मंडाविया को अवगत कराया गया कि स्कूली बच्चों को लार्वा नियंत्रण के बारे में जागरूक करने और उन्हें फूलों के गमलों में, पक्षियों के लिए भोजन के कटोरे, कूलर आदि में पानी के भंडारण को रोकना सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण देने हेतु दिल्ली सरकार का अभियान चलाया जाएगा क्योंकि स्कूलों को फिर से खोला जा रहा है। गंबुसिया जैसी जैविक लार्विसाइड मछलियों को 163 स्थलों पर छोड़ा गया है। दिल्ली सरकार ने डेंगू को एक अधिसूचित बीमारी घोषित किया है, जिससे बीमारी की रिपोर्टिंग और निगरानी को बढ़ाया जायेगा। दिल्ली में बुखार के सभी मामलों, डेंगू के संदिग्ध मामलों और पुष्ट मामलों की निगरानी की जा रही है। सभी अस्पतालों को मच्छरों के प्रति जीरो टॉलरेंस वाली साइटों में बदल दिया गया है; क्योंकि रोगवाहक संक्रमित व्यक्तियों से रोगाणु प्राप्त करते हैं और इसे अपनी संतानों में भी संचारित करने में सक्षम होते हैं।

हालांकि केवल 10% मामले जटिल हैं और मृत्यु दर शायद ही कभी 1% को पार करती है, दिल्ली सरकार के सभी स्वास्थ्य अधिकारियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को आश्वासन दिया कि सभी हितधारकों की मदद से इस समस्या को नियंत्रित किया जाएगा। बैठक में डेंगू को लक्षित करने के लिए विकसित किए गए नए टीकों पर भी चर्चा हुई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को डेंगू के अधिक संख्या में सक्रिय मामले वाले राज्यों की पहचान करने और विशेषज्ञों की टीम भेजने का निर्देश दिया। इन राज्यों की सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को बाद की समीक्षा बैठकों में भी शामिल किया जाना है।

बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, एनएचएम में अपर सचिव और मिशन निदेशक विकास शील, अपर सचिव (स्वास्थ्य) आरती आहूजा, एनसीडीसी में निदेशक डॉ एस के सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। दिल्ली में अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) भूपिंदर भल्ला ने बैठक में केंद्र शासित स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

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