केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने आज महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में एमएसएमई-प्रौद्योगिकी केंद्र की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने सिंधुदुर्ग औद्योगिक महोत्सव और स्वरोजगार कॉन्क्लेव का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर अपर सचिव और विकास आयुक्त, एएस एंड डीसी (एमएसएमई), डॉ. रजनीश और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रतिष्ठित अतिथि भी उपस्थित थे।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा प्रौद्योगिकी तक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत सरकार द्वारा पूरे देश में 20 नए प्रौद्योगिकी केंद्र और 100 विस्तार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। एमएसएमई-प्रौद्योगिकी केंद्र, सिंधुदुर्ग, 182 करोड़ रुपये की अनुमानित परियोजना लागत के साथ, जनरल इंजीनियरिंग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा और आसपास के क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए विकास के नए अवसर जुटाएगा।
इस अवसर पर नारायण राणे ने कहा कि वर्ष 2030 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिंधुदुर्ग का यह प्रौद्योगिकी केंद्र युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इससे राज्य की प्रगति और औद्योगिक विकास को और बढ़ावा मिलेगा तथा खाद्य प्रसंस्करण इस क्षेत्र की एक प्रमुख औद्योगिक गतिविधि बन जाएगी।
एएस एंड डीसी (एमएसएमई) डॉ. रजनीश ने कहा कि एमएसएमई को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और विश्व स्तरीय बनना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत 2047 तक एक विकसित देश बन जाए। उन्होंने यह भी कहा कि देश भर में फैले प्रौद्योगिकी केंद्र इस परिवर्तन में एक बड़ी भूमिका निभाएंगे।
नारायण राणे ने पीएम विश्वकर्मा पर एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और उपस्थित लोगों के साथ बातचीत की।
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