केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज इंडोनेशिया के बाली में दक्षिण अफ्रीका गणराज्य के उच्च शिक्षा, विज्ञान और नवाचार मंत्री माननीय डॉ. बोंगिंकोसी इमैनुएल ‘ब्लेड’ नजीमांडे के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों के बीच अकादमिक एवं कौशल विकास साझेदारी और द्विपक्षीय शिक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सार्थक चर्चा हुई।
दोनों ही मंत्रियों ने एचईआई एवं कौशल प्रशिक्षण संस्थानों के बीच गठजोड़, कौशल संबंधी योग्यता की पारस्परिक मान्यता और कौशल विकास में क्षमता निर्माण के लिए संस्थागत व्यवस्थाएं विकसित करने पर सहमति व्यक्त की।
दोनों मंत्रियों ने पहले से ही जारी आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने और शिक्षा में द्विपक्षीय सहयोग की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए दोनों देशों के बीच शिक्षा पर एक संयुक्त कार्यदल का गठन करने का भी निर्णय लिया।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एनईपी की शुरुआत से भारतीय शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के आपसी संबंध घनिष्ठ एवं मैत्रीपूर्ण हैं और यह साझा मूल्यों एवं हितों में निहित है।
धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा एवं कौशल विकास में आपसी जुड़ाव को मजबूत करने में उत्सुकता दिखाने और जी20 के ईडीडब्ल्यूजी एजेंडे को आगे बढ़ाने में भारत की अध्यक्षता का समर्थन करने के लिए माननीय डॉ. नजीमांडे का धन्यवाद किया।
धर्मेंद्र प्रधान ने इंडोनेशिया के बाली में गुस्ती बागस सुग्रीव विश्वविद्यालय का भी दौरा किया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह विश्वविद्यालय इंडोनेशिया के बहुलवादी लोकाचार का प्रतिबिंब है और इंडोनेशिया एवं भारत के बीच सामान्य जड़ों, पहचान और सुदृढ़ सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
उन्होंने भारत में उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) के साथ संस्थागत जुड़ाव और संस्कृत भाषा, दर्शन, आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में अकादमिक सहयोग की संभावनाएं तलाशीं।
उन्होंने यह भी कहा कि सुग्रीव विश्वविद्यालय और भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत अकादमिक सहयोग और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान से हिंदू धर्म की समझ को व्यापक बनाने और साझा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने बाली में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन और व्यवसाय संस्थान (इंस्टीट्यूट पर्विसाता और बिजनेस इंटरनेशनल) का भी दौरा किया।
उन्होंने प्रशिक्षण की सुविधाओं, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों, क्रेडिट की रूपरेखा, पाठ्यक्रमों में प्रवेश करने या उनसे बाहर निकलने के लिए विद्यार्थियों को मिली सुविधा और भविष्य की योजनाओं, इत्यादि के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण में आपसी सहयोग से पर्यटन उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा; यात्रा, पर्यटन, आतिथ्य एवं व्यवसाय के उभरते क्षेत्रों में क्षमता निर्माण में मदद मिलेगी; और दोनों देशों के लोगों के बीच पारस्परिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा।
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