केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज जमीनी स्तर पर कौशल विकास बढ़ाने में योगदान करने के उद्देश्य से युवाओं, गतिशील लोगों के लिए अवसर पैदा करने को शुरू की गई दो वर्ष की फेलोशिप महात्मा गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप के दूसरे चरण का आज शुभारम्भ किया है।
दो वर्षीय फेलोशिप में शैक्षणिक भागीदार आईआईएम द्वारा कक्षा सत्रों को जिला स्तर पर व्यापक फील्ड इमर्सन के साथ संयोजित करने का प्रयास किया गया है, जिससे रोजगार, आर्थिक उत्पादन बढ़ाने और आजीविका को प्रोत्साहन देने के लिए विश्वसनीय योजनाएं बनाने और इनसे जुड़ी बाधाओं की पहचान की जा सके।
इस अवसर पर अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने फेलोज से कौशल विकास के प्रयासों के द्वारा जमीनी स्तर पर सामाजिक बदलाव के प्रेरक के रूप में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने जिलाधिकारियों और शैक्षणिक भागीदार आईआईएम से इस फेलोशिप के माध्यम से फेलोज को सहूलियत देने और बदलाव की एक सफल कहानी लिखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, हम आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, विविध क्षेत्रों में व्यापक बदलाव से नए कौशलों व ज्यादा कुशल पेशेवरों के लिए मांग बढ़ेगी और इस प्रकार जिला स्तर पर कौशल की पहचान और कौशल विकास प्रयासों को निर्देशित करने की आवश्यकता है।
21वीं सदी और स्थानीय वास्तविकताओं की आवश्यकताओं के क्रम में, धर्मेंद्र प्रधान ने फेलोज से स्थानीय भाषा में कौशल विकास के प्रयासों को एकीकृत करते हुए वैश्विक सोच और स्थानीय दृष्टिकोण के साथ काम करने का आह्वान किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर बोलते हुए, धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा और कौशलों के बीच मजबूत तालमेल बिठाने के विजन और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट सहित इस दिशा में की गईं हालिया पहलों को रेखांकित किया। उन्होंने सभी आईआईएम से फेलोज को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में जागरूक बनाने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर एमएसडीई सचिव राजेश अग्रवाल, एमएसडीई संयुक्त सचिव अनुराधा विमूरी, कर्नाटक कौशल विकास निगम (केएसडीसी) के मिशन निदेशक अश्विन गौड़ा, मेघालय में ईस्ट गारो हिल्स के जिलाधिकारी स्वप्निल टेम्बे, कर्नाटक में विजयापुरा के जिलाधिकारी पी. सुनील कुमार और आईआईएम बंगलुरू में प्रो. अर्नब मुखर्जी उपस्थित रहे।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय फेलोशिप का विवरण:
देश में मिशन के संचालन और कौशल प्रशिक्षण तंत्र को मजबूत बनाने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय ने जनवरी, 2018 में विश्व बैंक के कर्ज से सहायता प्राप्त कार्यक्रम आजीविका प्रोत्साहन हेतु कौशल संकलन एवं ज्ञान जागरूकता (संकल्प) लॉन्च किया था।
संकल्प देश में कुशल कार्यबल की आपूर्ति और मांग के बीच के अंतर को प्रभावी रूप से कम करने के लिए जिला कौशल समितियों (डीएससी) के साथ काम करता है, जिससे युवाओं को काम करने और कमाने के अच्छे अवसर मिलते हैं।
संकल्प के अंतर्गत एमजीएनएफ कार्यक्रम जिला स्तर पर पेशेवरों का एक कैडर उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है, जो न सिर्फ शासन और सार्वजनिक नीति के बारे में बल्कि व्यावसायिक शिक्षा के बारे में भी जानते हों। एमजीएनएफ क्रमशः आईआईएम परिसर और जिलों में संचालित शैक्षणिक और काम आधारित प्रशिक्षण का एक विशेष मिश्रण है। एकेडमिक मॉड्यूल फेलोज को प्रबंधन, विकास अर्थशास्त्र, सार्वजनिक नीति और जिला कौशल इकोसिस्टम से रूबरू कराता है। क्षेत्रीय कार्य के दौरान, फेलोज जिले में सामने आ रही कौशल संबंधी चुनौतियों पर जिले में डीएससी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेंगे। डीएससी अधिकारियों के साथ, वे जिला कौशल विकास योजनाओं (डीएसडीपी) और कार्यान्वयन के रोडमैप को एक साथ सामने रखेंगे। एमजीएनएफ जिलों में प्रमाण आधारित योजना और कुशल बनाने के प्रबंधन पर सहयोग करेंगे। स्थानीय जरूरतों के लिए कौशल विकास में “वोकल फॉर लोकल” को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जाता है और उद्योग के लिए प्रासंगिक कौशल बेस के विकास से “आत्मनिर्भर भारत” के उद्देश्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
एमजीएनएफ 21-30 आयु वर्ष की महिलाओं और पुरुषों के लिए एक अवसर है, जो कौशल विकास कार्यक्रम की डिलिवरी में सुधार के लिए जिला प्रशासन का प्रेरक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पहले ही कुछ हद तक शैक्षणिक या व्यावसायिक विशेषज्ञता हासिल कर चुके हैं।
एमजीएनएफ चरण-1 (पायलट): इसे शैक्षणिक भागीदार के रूप में आईआईएम बंगलुरू के साथ लॉन्च किया गया और वर्तमान में 6 राज्यों के 69 जिलों में 69 फेलोज कार्यरत हैं।
एमजीएनएफ चरण-2 (राष्ट्रीय स्तर पर कार्यान्वयन): 661 एमजीएनएफ के साथ 25 अक्टूबर को लॉन्च हो रहा है, जिन्हें देश के सभी जिलों में तैनात किया जाएगा। 8 अतिरिक्त आईआईएम के जुड़ने के लिए इससे कुल 9 आईआईएम (आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम बंगलुरू, आईआईएम जम्मू, आईआईएम कोझिकोड, आईआईएम लखनऊ, आईआईएम नागपुर, आईआईएम रांची, आईआईएम उदयपुर और आईआईएम विशाखापट्टनम) जुड़ गए हैं।
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