विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने 2024-25 के दौरान रिकॉर्ड समय में लगभग 7.5 गीगावाट की निम्नलिखित 6 हाइड्रो पंप स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर सहमति जताई है। यह उन्नत दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित करने की देश की जारी प्रतिबद्धता में एक बड़ी उपलब्धि है:
ओडिशा में ऊपरी इंद्रावती (600 मेगावाट)
कर्नाटक में शरावथी (2,000 मेगावाट)
महाराष्ट्र में भिवपुरी (1,000 मेगावाट)
महाराष्ट्र में भवाली (1,500 मेगावाट)
मध्य प्रदेश में एमपी-30 (1,920 मेगावाट)
आंध्र प्रदेश में चित्रावती (500 मेगावाट)
यह पीएसपी डेवलपर्स और मूल्यांकन संगठनों (सीडब्ल्यूसी, जीएसआई और सीएसएमआरएस) के सहयोगात्मक प्रयासों का परिणाम है।
समस्याओं का समाधान करने और मूल्यांकन प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए कई कदम उठाए गए। ऑफ-स्ट्रीम, क्लोज लूप पीएसपी की नई अवधारणा की शुरुआत के बाद से यह एक बड़ी उपलब्धि है। सीईए ने पोर्टल “जलवी स्टोर” के माध्यम से मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया है। मूल्यांकन के लिए डीपीआर को छोटा कर दिया गया है। मूल्यांकन एजेंसी को अध्याय प्रस्तुत करने में आसानी के लिए चेक लिस्ट प्रदान की गई है और ऐसी कई और पहल की गई हैं।
इसके अलावा, सीईए ने 2025-26 के दौरान लगभग 22 गीगावॉट की कम से कम 13 पीएसपी को मंजूरी देने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इनमें से अधिकांश पीएसपी को 4 साल में और 2030 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं के विकास से देश में ऊर्जा भंडारण क्षमता में भारी वृद्धि होगी, जिससे ग्रिड विश्वसनीयता में बड़ा योगदान मिलेगा। इससे भारत के महत्वाकांक्षी अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा। यह एक अधिक टिकाऊ और मजबूत बिजली प्रणाली की ओर संक्रमण को सुविधाजनक बनाने के लिए सीईए की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी काफी उत्साहजनक है और स्व-चिह्नित पीएसपी की मदद से देश में पीएसपी क्षमता 200 गीगावाट को पार कर गई है और यह लगभग हर महीने बढ़ रही है। इस प्रकार, देश में परिचालन हाइड्रो पीएसपी क्षमता के मात्र 3.5 गीगावाट से, इस क्षमता का दोहन करने के लिए विकास को त्वरित मिशन मोड में शुरू करने की जरूरत है। इस वर्ष लगभग 3000 मेगावाट के दो पीएसपी चालू हो जाएंगे और 2032 तक हमें लगभग 50 गीगावाट की उम्मीद है। अभी 10 गीगावाट की 8 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और लगभग 3 गीगावाट की 3 परियोजनाओं के लिए डीपीआर पर सहमति बन गई है। इसके अलावा, 66 गीगावाट की 49 परियोजनाएं सर्वेक्षण और जांच के अधीन हैं। उम्मीद है कि इन सभी डीपीआर को डेवलपर्स 2 वर्षों में अंतिम रूप दे देंगे।
हाइड्रो पीएसपी ऊर्जा परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे ऑफ-पीक घंटों के दौरान उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को ऊंचे जलाशयों में पानी के रूप में संग्रहीत करने की अनुमति देते हैं। इस संग्रहीत ऊर्जा का उपयोग गैर-सौर घंटों की पीक मांग अवधि के दौरान किया जा सकता है, जिससे एक विश्वसनीय, सुसंगत और सुदृढ़ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
डेवलपर्स और निवेशकों के लिए यह 70-80 वर्षों से अधिक की दीर्घकालिक परिसंपत्तियों को विकसित करने और उनमें निवेश करने का एक बेहतरीन अवसर है।
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