केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने टाइकॉन वडोदरा कार्यक्रम के दौरान एक चर्चा में भाग लिया, जहां स्थानीय निवेशकों ने गुजरात में आरंभिक चरण के स्टार्टअप का सहयोग करने के लिए 100 करोड़ रुपये देने का वचन दिया। यह पहल पिछले वर्ष स्थापित उद्यमियों और हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (एचएनआई) से सहयोग प्राप्त करने में राज्य मंत्री महोदय राजीव चंद्रशेखर के सफल प्रयासों का अनुसरण करती है, जिसके परिणामस्वरूप गुजरात में स्टार्टअप के लिए 1,500 करोड़ रुपये का वादा किया गया था।
राज्य मंत्री महोदय ने कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप के लिए अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप अवसरों का लाभ उठाने के लिए गुजरात सरकार की सराहना की।
राज्य मंत्री महोदय ने कहा, “गुजरात में उद्यमशीलता की भावना अद्वितीय है। मैंने देश भर की बड़े स्तर पर यात्रा की है और मैं विश्वास के साथ गवाही दे सकता हूं कि गुजरात जोखिम लेने, उद्यमिता और आर्थिक विकास में उत्कृष्ट है। मैं गुजरात सरकार और भारत सरकार के साथ उसके सहयोग का बहुत सम्मान करता हूं। गुजरात ने किसी भी अन्य राज्य से पहले सेमीकंडक्टर अवसर की पहचान की और इसे प्राप्त कर लिया। गुजरात के युवा और राज्य के भीतर नवाचार ईको-सिस्टम उचित विकास के लिए तैयार हैं। गुजरात ने अब उत्कृष्ट तकनीकी क्षमताओं के लिए मानचित्र पर स्वयं को स्थापित कर लिया है। नवाचार की अगली लहर गुजरात जैसे राज्यों और देश के छोटे शहरों और कस्बों से शुरू होगी।”
राजीव चन्द्रशेखर ने इस बात पर बल दिया कि सरकार के प्रोत्साहन से स्टार्टअप ईको-सिस्टम में गतिविधि में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा, ”हम बेहद रोमांचक समय में रह रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जो संभव किया है वह भारतीयों और युवा भारतीयों में आत्मविश्वास पैदा कर रहा है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारतीयों को सभी क्षेत्रों में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित किया है। वह अक्सर प्रश्न करते हैं कि हम कुछ क्षेत्रों में आगे क्यों नहीं बढ़ रहे हैं, जैसे कि हमारे युवा भारतीय अंतरिक्ष रॉकेट क्यों नहीं बना पा रहे हैं, ऐसा कुछ जो अतीत में किसी अन्य राजनेता ने नहीं किया है। जब आप युवा भारतीयों और हमारे देश में विश्वास प्रदर्शित करते हैं, तो हम लगभग वह सब कुछ प्राप्त करने में सक्षम होते हैं जो बाकी दुनिया कर सकती है। यह विनिर्माण के लिए सच है, और यह सेमीकंडक्टर्स के लिए भी सच है।”
राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने अतीत पर विचार करते हुए कहा कि पिछली गैर-भाजपा सरकारें और राजनीतिक नेतृत्व हमेशा भारत की वास्तविक क्षमता का एहसास करने में विफल रहे। हालाँकि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व ने युवा भारतीयों के बीच ‘कर सकते हैं’ और ‘आप यह अवश्य कर सकते हैं’ दृष्टिकोण को सक्षम किया है।
राज्य मंत्री महोदय ने कहा, “पहले, सरकारें और राजनीतिक नेतृत्व हमारे देश की क्षमता को समझने में विफल रहे। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही थे जिन्होंने युवा भारतीयों में आत्मविश्वास जगाया, ‘कर सकते हैं’ और ‘आप यह अवश्य कर सकते हैं’ का दृष्टिकोण अपनाया, नकारात्मकता को दूर किया और पुष्टि की कि युवा भारतीय असंभव को भी संभव कर सकते हैं। इस भावना ने नवाचार और उद्यमिता ईको-सिस्टम को सक्रिय किया है। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि डिजिटल अर्थव्यवस्था में ऐसी कोई जगह नहीं है जहां सेमीकंडक्टर, वेब 3, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, क्रिप्टो, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से लेकर क्वांटम तक भारतीय गतिविधि न हो। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार, हमारी सरकार युवा भारतीयों और पहली पीढ़ी के स्टार्टअप उद्यमियों की सफलता को सशक्त बनाने के लिए गहराई से काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछली सरकारें समूह और प्रमुख समूहों पर अधिक ध्यान केंद्रित करती थीं। मैंने इस मुद्दे को 2011 में संसद में उठाया था और बताया था कि कैसे नौ समूहों ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली के 97 प्रतिशत हिस्से पर अधिकार कर लिया है।”
राज्य मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने ‘प्रतिभा पलायन’ के मुद्दे को संबोधित करते हुए कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय तेजी से भारत में अपार अवसरों को पहचान रहे हैं और वापस लौटने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने डिग्री के अलावा कौशल के महत्व पर बल दिया और युवा भारतीयों को यह समझने का परामर्श दिया कि स्टार्टअप ईको-सिस्टम और नौकरी बाजार में अवसरों का लाभ उठाने के लिए कौशल भी अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।
राज्य मंत्री महोदय ने कहा, “युवा भारतीयों को यह समझना चाहिए कि डिग्री महत्वपूर्ण है, लेकिन कौशल प्राप्त करना और भी अधिक महत्वपूर्ण है। यदि आप बिना कौशल के महाविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त करते हैं, तो आपको स्टार्टअप के अवसरों और नौकरी बाजार के मामले में थोड़ा नुकसान हो सकता है। सरकार विभिन्न कौशल और उद्यमिता कार्यक्रम पेश करती है जिनका युवा भारतीय लाभ उठा सकते हैं। हमने इस दृष्टिकोण को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ जोड़ा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चे भी आवश्यक कौशल प्राप्त कर सकें। मैंने कई उद्यमियों और कर्मचारियों से चर्चा की है जो विदेश में काम कर रहे हैं, और आज, वे भारत लौटने के लिए उत्सुक हैं क्योंकि वे इसमें अपार संभावनाएं देखते हैं।”
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