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केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में 2 एसटीपीआई केंद्रों का उद्घाटन किया

केंद्रीय इलेक्ट्रोनिक्स एवं आईटी, कौशल विकास तथा उद्यमिता और जल शक्ति राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि, हम आखिरकार एक ऐसे समय में जीवन व्यतीत कर रहे हैं जब एक सेमीकंडक्टर इंजीनियर भी एक सुपरहीरो है – जो आपको बताता है कि हमारा देश कितना आगे बढ़ चुका है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रौद्योगिकी के युग में हमारे देश ने कितनी प्रगति की है। ये बातें केंद्रीय मंत्री ने आज केरल में चौथे सेमीकॉन इंडिया फ्यूचर डिजाइन रोड शो में छात्रों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं और इसरो के सदस्यों को संबोधित करते हुए की।

केंद्रीय मंत्री ने आईबीएम और सी-डैक के बीच एक समझौता ज्ञापन की सुविधा प्रदान की, जिसका उद्देश्य उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग के लिए भारत के प्रोसेसर डिजाइन एवं विनिर्माण क्षमताओं में तेजी लाना है। इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) में किया गया।

उन्होंने यह भी घोषणा किया कि आगामी भारत सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर (बीएसआरसी) का आईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम में एक क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होगा, जो शहर के स्टार्टअप और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगा।

केरल में इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने के लिए, केंद्रीय इलेक्ट्रोनिक्स एवं आईटी, कौशल विकास तथा उद्यमिता और जल शक्ति राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में नए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) केंद्रों का भी उद्घाटन किया।

ये केंद्र केरल के आईटी अवसंरचना को मजबूत करने, उभरते तकनीकी स्टार्टअप को अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं, जिससे उन्हें वैश्विक स्तर पर नवाचार करने, आगे बढ़ने और प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाया जा सके।

उद्घाटन के बाद, मंत्री ने इनक्यूबेशन केंद्र का दौरा किया और स्टार्टअप से मुलाकात की और मंत्री ने “केरल में टेक स्टार्टअप्स को उत्प्रेरित करना” विषय पर चर्चा की।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष, एस सोमनाथ के साथ अपनी बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तिरुवनंतपुरम में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास के लिए एक महान उत्प्रेरक बनने का महत्वपूर्ण अवसर है। तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में नए उद्घाटन किए गए एसटीपीआई केंद्र, राज्य में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देते हुए राज्य को दक्षिण भारत का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी केंद्र बनने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि 1990 के दशक में शहर में भारत के पहले टेक्नोपार्कों में से एक होने के बावजूद, यह दुखद है कि आज भी तिरुवनंतपुरम स्टार्टअप इनोवेशन इकोनॉमी के शीर्ष 20 में शामिल नहीं है है। यूडीएफ और एलडीएफ के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों में राजनीतिक दृष्टिकोण की कमी होने के कारण केरल न केवल इस उपलब्धियों से वंचित रहा बल्कि विकास मार्ग की पटरी से पूरी तरह से उतर गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि नवाचार की अगली लहर केरल से आए, जिसमें केरल के युवा इसकी प्रेरक शक्ति बनेंगे।

फ्यूचर डिजाइन रोड शो में अपने संबोधन में, राजीव चंद्रशेखर ने भारत में सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र पर अपना व्यापक अवलोकन प्रदान किया और पिछले 2.5 वर्षों में इसकी महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला।

मंत्री ने कहा, “सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र में यह भारत के लिए सबसे रोमांचक समय है, मैं चाहूंगा कि केरल में स्टार्टअप और युवा इस प्रगति की इस यात्रा में शामिल हों। इस क्षेत्र में हम जो विकास, सफलता और अवसर देख रहे हैं, आने वाले वर्षों में, हम यह भी देखेंगे कि इनका विस्तार होगा और इनमें तेजी आएगी। डिजिटलीकरण और हमारे जीवन, उद्यमों और पूरी दुनिया में प्रौद्योगिकी की तीव्रता अभूतपूर्व रूप से बढ़ रही है। यहां तक ​​कि ऐसे क्षेत्र जो प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए सहज नहीं थे – सरकार एवं शासन, सार्वजनिक सेवाएं, जल आपूर्ति, सब्सिडी वितरण, ऐसी बातों के दायरे से बिल्कुल बाहर रहे – अब तकनीक को अपना रहे हैं। यह वर्तमान और भविष्य के उद्यमियों को एक बड़ा अवसर प्रदान करता है, जो भविष्य की पद्धति, उपकरणों और उत्पादों को डिजाइन करने और फिर से तैयार होने की शुरुआती सीमा रेखा पर है। यह उस पृष्ठभूमि के साथ है जिसे हमने फ्यूचर डिजाइन लॉन्च किया है।”

इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने फ्यूचर डिजाइन के बारे में विस्तार से बताया और इस बात पर बल दिया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्टार्टअप को सशक्त बनाना और सेमीकंडक्टर्स के क्षेत्र में एक भारतीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि, “70-75 वर्षों में, हमने इसरो और डीआरडीओ को छोड़कर सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में बहुत कम काम किया है। भारत सेमीकंडक्टर डिजाइन के वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र में नगण्य रहा है- भारत की प्रतिभा वैश्विक आर एंड डी के लिए लगातार काम कर रही है और यह जारी है। आप स्वतंत्र भारत के छात्रों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी हैं। यहां एक सरकार है, एक उद्योग है जो आपके पास आ रहा है और कह रहा है कि हम आपको कुछ करने के लिए अवसर, रोडमैप और फंडिंग देने के लिए तैयार हैं, आप अपना खुद के लिए कुछ कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार से वैश्विक कंपनियों द्वारा भारत में इकाइयां स्थापित करने के साथ देश बहुत तीव्रता से आगे बढ़ रहा है।

मंत्री ने आगे कहा कि, “हम पहले से ही तीव्रता से आगे बढ़ रहे हैं, एप्पल कंपनी ने हाल ही में स्वीकार किया है कि 2027-2029 तक उनके डिवाइस निर्माण और वैश्विक जीवीसी का लगभग 12-15% भारत में होगा। हम आशा करते हैं कि सेमीकंडक्टर बाजार तब तक 110 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। हमारे प्रधानमंत्री ने कहा है कि जितना हम विनिर्माण के बारे में महत्वाकांक्षी हैं, उतना ही हम डिजाइन, आईपी और नवाचार में भी अग्रणी बनना चाहते हैं। यह केवल विनिर्माण-आधारित प्रदर्शन तक सीमित नहीं है बल्कि डिजाइन और नवाचार-आधारित प्रदर्शन की हमारी महत्वाकांक्षा को भी प्रदर्शित करता है।”

आत्मनिर्भर भारत को और आगे बढ़ाने के विषय पर, उन्होंने कहा कि सरकार एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने की दिशा में कोई कमी नहीं कर रही है।

मंत्री ने कहा, “अभी सरकार ने इस क्षेत्र में स्टार्टअप का वित्तपोषण करने के लिये लगभग 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। हमारे प्रधानमंत्री का यह विश्वास है कि आने वाले दशक में, इंडिया टेकेड – जो भारतीय स्टार्टअप और बड़ी कंपनियों को आकार प्रदान करेगा –इसमें युवा भारतीयों और स्टार्टअप की महत्वपूर्ण भूमिका है। अनुप्रयोगों के एक व्यापक स्पेक्ट्रम में सेमीकंडक्टर डिजाइन का नवाचार – ऑटोमोबाइल, मोबाइल, कंप्यूट, और अगली पीढ़ी के डिजाइन स्टार्टअप से – आईपी, सह-विकास और संयुक्त स्वामित्व को उत्प्रेरित करना शामिल है। हम एक रणनीति पर दोगुनी शक्ति से काम कर रहे हैं जिसमें आरआईएससी वी और आईबीएम की शक्ति शामिल है – ये दोनों सेमीकंडक्टर के भारतीय परिवार में शामिल होंगे जिनके चारों ओर हम कई अनुप्रयोगों का निर्माण करेंगे- माइक्रोप्रोसेसर, आईओटी एवं अन्य के बीच में। आज, हमने लगभग 26 बिलियन डॉलर के निवेश प्रस्तावों को देखा है – माइक्रोन, टॉवर, पीएसएमसी ताइवान और टाटा कई अरब डॉलर की विनिर्माण सुविधाओं का निर्माण कर रहे हैं। आज सेमीकॉन में प्रत्येक वैश्विक नाम के भारत में अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। हमने पिछले दो वर्षों में एक बहुत ही जीवंत, तीव्र, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है। मैं चाहता हूं कि आप इस यात्रा का हिस्सा बनें और आप सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करें।”

इसमें सेमीकंडक्टर उद्योग और इसरो के वरिष्ठ उद्योग सदस्य भी उपस्थित हुए, जिन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे सरकार ने एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है जो एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेगा।

डॉ. एस उन्नीकृष्णन नायर, निदेशक वीएसएससी और आईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम ने कहा, “हम इसरो और आईआईएसटी में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में उत्कृष्टता की हमारी खोज में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विचारों को पूर्ण रूप से शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। देश में एक जीवंत सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र अंतरिक्ष क्षेत्र को जटिल अभियानों के लिए नए डिजाइनों को लागू करने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार इस बहुत महत्वपूर्ण और सामरिक क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रही है। माननीय केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर जैसे लोगों का मानना है कि सेमीकंडक्टर आज या कल के लिए नहीं है, बल्कि यह भविष्य के लिए बहुत उपयोगी होने वाला है।”

इसरो के लिक्विड प्रॉपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) के निदेशक. डॉ. वी नारायणन ने कहा, “इसरो में हम सभी के लिए यह बहुत सम्मान की बात है कि माननीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर यहां उपस्थित हैं। वह एक राजनेता, एक ओजस्वी व्यक्तित्व हैं जिन्होंने पिछले 5 वर्षों में देश के राज्य मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हम पिछले 76 वर्षों से एक स्वतंत्र देश में जीवनयापन कर रहे हैं, और हमने लगभग सभी क्षेत्रों में एक लंबा सफर तय किया है। देश को विकसित भारत बनने के लिए कई क्षेत्रों और क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर विकसित करने की आवश्यकता है – इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विकास इसके महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हैं। मुझे खुशी है कि हमारे माननीय मंत्री राजीव चन्द्रशेखर इस क्षेत्र में एक चैंपियन हैं और उन्होंने इसमें अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है।”

एनवीडिया के प्रबंध निदेशक (दक्षिण एशिया) विशाल धूपर ने कहा कि “अवसर हमारे पास है, हम भारत को न केवल ‘विश्व का बैक ऑफिस’ बना सकते हैं, बल्कि इसे विश्व का ‘कार्यालय’ बना सकते हैं, यहां इंटेलिजेंस का निर्माण कर सकते हैं और वैश्विक खुफिया जानकारी का निर्यात कर सकते हैं।”

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