केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसरो के 5 दिवसीय प्रौद्योगिकी सम्मेलन-2021 का उद्घाटन किया और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित की जाने वाली भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और आधुनिक व महत्वपूर्ण तकनीकों पर प्रकाश डाला। कॉन्क्लेव का आयोजन इसरो के तत्वावधान में प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार निदेशालय (डीटीडीआई) द्वारा किया जा रहा है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, इसरो मुख्यालय स्थित डीटीडीआई अनुसंधान और अनुसंधान एवं विकास के लिए उद्योग, इनोवेटर्स और शिक्षाविदों के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा, जब से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यभार संभाला है, वह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को विशेष प्रोत्साहन दे रहे हैं और 70 वर्षों में पहली बार, भारत को प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष बाजार बनाने के लिए निजी भागीदारी के लिए इस क्षेत्र को खोला गया है। इसके अलावा देश के सबसे गरीब लोगों तक अंतरिक्ष कार्यक्रम का लाभ पहुंचाने की भी कोशिश की जा रही है।
कुछ भविष्यवादी और आधुनिक व महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, उपग्रह आधारित क्वांटम संचार का विकास देश के संचार नेटवर्क के लिए बिना शर्त डेटा सुरक्षा को सक्षम बनाएगा। उन्होंने कहा, हाल ही में अहमदाबाद में इसरो द्वारा 300 मीटर की दूरी तक खुले अंतरिक्ष में क्वांटम संचार का प्रदर्शन उपग्रह आधारित क्वांटम संचार के विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है, जिसे हमारा देश निकट भविष्य में प्रदर्शित करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भविष्य की तकनीक में अनपेक्षित लाभ के अनुप्रयोग हैं और इन्हें केंद्रित क्षेत्रों व सरकारी प्रमुख कार्यक्रमों में लागू किया जाना चाहिए, जो प्रत्येक नागरिक के जीवन पर असर डालते हैं।
मंत्री महोदय ने निवेश के एक अन्य क्षेत्र के रूप में बिग डेटा एनालिटिक्स को चुनने के लिए इसरो को बधाई दी क्योंकि इसरो अपने विभिन्न उपग्रह मिशनों और जमीन आधारित प्रणालियों से भारी मात्रा में डेटा उत्पन्न करता है। उन्होंने कहा, “अपने बौद्धिक और वित्तीय संसाधनों के संदर्भ में इसरो के निवेश के परिणामस्वरूप अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भविष्य की प्रौद्योगिकियों की अधिकता हुई है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग, अंतरिक्ष मलबे, वैश्विक जलवायु अध्ययन, अंतरिक्ष तक लागत प्रभावी प्रौद्योगिकी पहुंच, अंतरिक्ष प्रणालियों के लिए घटकों और भागों के स्वदेशी निर्माण, और हरित प्रणोदक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि इसरो को ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में भविष्य की प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ाने के लिए तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष सुधारों के बाद की अवधि में, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी परिदृश्य बदल गया है और इसे नवीन प्रौद्योगिकियों के लिए अनुसंधान एवं विकास के अलावा, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और आधुनिक व महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के विकास की दिशा में उद्योगों और निजी संस्थाओं की भागीदारी को सक्षम करना चाहिए। उन्होंने इसरो से समावेशी विकास के प्रयासों के तालमेल को लाने और जीवंत वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान करने व भविष्य की प्रौद्योगिकियों से अवसर प्राप्त करने का आग्रह किया जो अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए गेम चेंजर बनने जा रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इसरो द्वारा किए जा रहे भविष्य और नवीन प्रौद्योगिकियों में क्वांटम रडार, सेल्फ-ईटिंग रॉकेट, सेल्फ-हीलिंग स्पेसक्राफ्ट और स्पेस व्हीकल, सेल्फ-डिस्ट्रक्टिव सैटेलाइट, फोटॉन थ्रस्टर, स्पेस-बेस्ड-सौर-पावर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का एक समूह जो कृषि, भूमि उपयोग भूमि कवर से लेकर ग्रहों और अंतरिक्ष का अन्वेषण शामिल हैं।
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