केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के कल्याण के लिए पिछले तीन वर्षों के दौरान केंद्रीय बजट में आवंटित कुल धनराशि इस प्रकार है: यह धनराशि 2018-2019 में 37802.94 (करोड़ रुपये में), 2019-2020 में 51283.53 (करोड़ रुपये में) और 2020-2021 में 52024.23 (करोड़ रुपये में) थी।
जनजातीय कार्य मंत्रालय देश में अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास और कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों का कार्यान्वयन कर रहा है।
जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अलावा, 40 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों को नीति आयोग द्वारा आदिवासी विकास के लिए हर साल उनके कुल योजना आवंटन के 4.3 से 17.5 प्रतिशत की सीमा में जनजातीय उप योजना (टीएसपी)/अनुसूचित जनजाति घटक (एसटीसी) निधि के रूप में निर्धारित करने के लिए बाध्य किया गया है।
देश में अनुसूचित जाति के त्वरित सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, आवास, पेयजल, विद्युतीकरण, रोजगार सृजन, कौशल विकास आदि से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा उनकी योजनाओं के तहत टीएसपी फंड खर्च किया जाता है।
केंद्रीय बजट में योजना-वार आवंटन किया जाता है और विभिन्न राज्यों/संघ शासित प्रदेशों को उनसे प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर बाध्य केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों द्वारा निधियां प्रदान की जाती हैं।
वचनबद्ध मंत्रालयों/विभागों द्वारा योजना-वार वास्तविक (व्यय), अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए निधियों का आवंटन केंद्रीय बजट-व्यय प्रोफाइल में विवरण 10बी के रूप में दर्शाया गया है जिसे सदन के पटल पर रखा गया है।
यह जानकारी केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने आज राज्यसभा में दी।
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