केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि भारत मौसम पूर्वानुमान और जलवायु अध्ययन में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, “पृथ्वी विज्ञान विभाग के पास पहले से ही एक अल्पकालिक योजना है और अब विभाग भारत आत्मनिर्भर @2047 बनाने के लिए अमृतकाल की योजना तैयार कर रहा है।”
किरेन रिजिजू भारत मौसम विज्ञान विभाग, आईएमडी की राष्ट्र के प्रति 150 वर्षों की सेवा की स्मृति में लोगो जारी करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे।
किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाल ही में दुबई में संपन्न विश्व जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन, सीओपी28 को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किए गए चुनिंदा शासनाध्यक्षों में से थे, जो दर्शाता है कि विश्व समुदाय जलवायु परिवर्तन के शमन में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को समझता है।
उन्होंने कहा, ” प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बिरादरी के साहसिक कदमों के माध्यम से ‘पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली (लाइफ) को वैश्विक मिशन बनाने का विचार प्रस्तुत किया है।”
किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अनुसार, भारत ने 2030 के लिए निर्धारित अपने दो लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं।
किरेन रिजिजू ने स्थानीय मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए अधिक डॉपलर राडार की भारत की जरूरतों को पूरा करने में निजी क्षेत्र से अधिक भागीदारी का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “अधिक संख्या में पीएलआई योजनाओं के साथ भारत अब एक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। निजी क्षेत्र को ‘मेक इन इंडिया’ डॉपलर राडार की आपूर्ति के लिए आगे आना चाहिए।”
किरेन रिजिजू ने आईएमडी से अगले महीने से शुरू होने वाले साल भर चलने वाले समारोहों के दौरान जलवायु परिवर्तन के मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए स्कूली बच्चों को साथ जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग वैश्विक चिंताएं हैं। हमें इस बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है कि सभी व्यक्तियों को एक साथ आना होगा, क्योंकि प्रदूषण और बादल फटने तथा भारी बारिश जैसी मौसम की तात्कालिक चरम घटनाएं पृथ्वी पर व्यापक जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं।”
इस अवसर पर, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम रविचंद्रन ने आम लोगों और हितधारकों तक आईएमडी की मौसम और जलवायु सेवाओं को पहुंचाने की क्षमताओं में वृद्धि के साथ-साथ जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रमों को बढ़ाने की आवश्यकता पर चर्चा की।
आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने अपने स्वागत भाषण में, विभाग के लोगों के बारे में 1875 में स्थापना के बाद से, स्वतंत्रता-पूर्व युग, स्वतंत्रता युग और आईएमडी के मौजूदा लोगो तक के विकास पर चर्चा की।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की स्थापना 1875 में भारत सरकार के शुरुआती वैज्ञानिक विभागों में से एक के रूप में की गई थी। राष्ट्र के प्रति अपनी सेवा के 150वें वर्ष का जश्न मना रहा आईएमडी एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। आईएमडी इस उपलब्धि को 15 जनवरी, 2024 से 15 जनवरी, 2025 के दौरान साल भर चलने वाले समारोहों के साथ मनाएगा।
आईएमडी का लोगो 1875 से इस विभाग की उल्लेखनीय यात्रा का प्रतीक है:
यह आईएमडी द्वारा राष्ट्र के प्रति 150 वर्षों की समर्पित सेवा का प्रतीक है।
यह साल भर के मौसम के लिए तैयार और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र के लिए मौसम और जलवायु सहायता प्रदान करने में विभाग की निरंतर प्रगति को इंगित करता है।
यह “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना में विश्व कल्याण में आईएमडी की भूमिका पर बल देता है।
यह लोगो निर्भर भारत से आत्मनिर्भर भारत में परिवर्तित होने का प्रमाण है।
· यह प्राचीन युग से आधुनिक युग तक भारतीय मौसम विज्ञान की निरंतरता को दर्शाता है, इसके लोगो में “आदित्यात् जायते वृष्टिः” अंकित है।
राष्ट्रीय तिरंगे थीम के साथ लोगो की समानता आईएमडी की सेवाओं की राष्ट्रीय दृष्टि और मिशन के साथ अनुरूपता सुनिश्चित करती है।
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