भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन एक संगठन, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने निर्यात सुविधा प्रदाता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 23 नवंबर, 2023 को राष्ट्रीय काजू दिवस पर बांग्लादेश, कतर, मलेशिया और अमेरिका के लिए अपने काजू निर्यात को झंडी दिखाकर रवाना किया। बांग्लादेश को ओडिशा से काजू की अब तक की पहली खेप प्राप्त होगी।
कोटे डी आइवर के बाद, भारत 15 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी के साथ काजू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, इसके बाद विश्व के काजू निर्यात में वियतनाम का स्थान है। भारत के शीर्ष निर्यात गंतव्य संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, जापान और सऊदी अरब हैं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक और तमिलनाडु भारत के प्रमुख काजू उत्पादक राज्य हैं। भारत मुख्य रूप से काजू गिरी को थोड़ी मात्रा में काजू शैल तरल और कार्डानोल के साथ निर्यात करता है।
यूएई और नीदरलैंड के भारतीय काजू के लिए शीर्ष निर्यात गंतव्य बने रहने के साथ, एपीडा जापान, सऊदी अरब, ब्रिटेन, स्पेन, कुवैत, कतर, अमेरिका और यूरोपीय देशों आदि के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काजू के लिए नए बाजारों की खोज करने की दिशा में काम कर रहा है।
एपीडा ने अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ संयुक्त रूप से काजू एसोसिएशन, निर्यातकों और हितधारकों के सहयोग से सात राज्यों में राष्ट्रीय काजू दिवस मनाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए। इस आयोजन में विविध प्रकार के कार्यकलाप शामिल थे, जैसे काजू के हितधारकों के साथ बातचीत सत्र, नेटवर्किंग के लिए प्लेटफॉर्म, ज्ञान साझा करना और उद्योग के रुझानों तथा इस सेक्टर में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा।
काजू उद्योग के हितधारकों, निर्यातकों और क्षेत्र से जुड़े उत्साही लोगों के एकजुट होने के इस कार्यक्रम में एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने राष्ट्रीय काजू दिवस मनाने के लिए प्रतिभागियों को संबोधित किया और कहा, “आज, एपीडा के हमारे विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालय न केवल समारोह मनाने बल्कि वृद्धि रुझानों, उत्पादन, निर्यात रणनीतियों और काजू क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों पर सार्थक चर्चा में शामिल होने के लिए भी एकत्र हुए हैं।”
काजू उत्पादों की मांग बढ़ रही है और उद्योग को विकसित और फलते-फूलते देखना एक सुखद क्षण है। यह वृद्धि किसानों, प्रोसेसरों और निर्यातकों की कड़ी मेहनत का प्रमाण है।
अध्यक्ष ने किसानों और काजू उत्पादकों की सराहना की, उन्हें प्रोत्साहित किया और कहा, “हमारे समर्पित किसानों ने काजू के बढ़ते उत्पादन में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने न केवल उद्योग के मानकों को ऊंचा किया है, बल्कि हमें वैश्विक बाजार में प्रमुख देशों के रूप में भी स्थापित किया है।”
जैसे ही काजू और इसका उत्पाद एपीडा के दायरे में आया है, इसने आधुनिकीकरण और प्रसंस्करण सुविधाओं, लॉजिस्टिक, गुणवत्ता के रूप में उद्योग के सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने और कड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए काजू क्षेत्र के हितधारकों के साथ जुड़ना आरंभ कर दिया है।
यह कार्यक्रम देश के सभी काजू उत्पादक क्षेत्रों में काजू क्षेत्र के हितधारकों के साथ जुड़ने का एक ऐसा मंच था और एपीडा विश्व काजू व्यापार में अपनी स्थिति फिर से हासिल करने के लिए इस तरह की पहल में तेजी लाएगा।
भविष्य में एपीडा काजू उद्योग के ऑटोमेशन में हस्तक्षेप कर सकता है। पेशेवरों का प्रशिक्षण, काजू प्रसंस्करण इकाइयों का पंजीकरण और मूंगफली की तरह काजू के लिए भी एक ट्रेसेबिलिटी प्रणाली तैयार की जाएगी। एपीडा हितधारकों तक काजू से संबंधित जानकारी प्रसारित करेगा। एपीडा लगातार नवोन्मेषी तरीकों की खोज करने, प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और व्यापार संबंधों को सुदृढ़ बनाने के लिए समर्पित है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय काजू उत्पाद दुनिया के हर कोने तक पहुंच सकें।
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