सुगंधित और लंबे दानों वाले बासमती चावल के गुणवत्ता उत्पादन के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोगी बासमती निर्यात विकास फाउंडेशन (बीईडीएफ) ने अच्छी कृषि संबंधी प्रथाओं के अनुपालन के लिए उगाए जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों में बासमती चावल की खेती से जुड़े किसानों को संवेदनशील बनाने के लिए अभिनव कदम उठाये हैं।
पहलों के हिस्सों के रूप में, बीईडीएफ ने सात राज्यों में उच्च गुणवत्तापूर्ण बासमती चावल उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एवं कश्मीर तथा दिल्ली के चावल निर्यातक संघों, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों तथा राज्य कृषि विभागों के सहयोग से 75 जागरूकता-व-प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया। बीईडीएफ बासमती चावल उगाने वाले राज्यों विभिन्न एफपीओ, निर्यातक संघों आदि के लिए तकनीकी साझीदार के रूप में भी जुड़ा है।
बीईडीएफ ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव समारोहों’ के हिस्से के रूप में, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जहांगीरपुर गांव से 16 जुलाई, 2021 को जागरूकता-व-प्रशिक्षण कार्यशाला लॉन्च किया, जो भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर को मनाने तथा समारोह आयोजित करने की भारत सरकार की एक पहल है। जागरूकता अभियानों का आयोजन ‘कीटनाशकों का विवेकपूर्ण उपयोग तथा अच्छी कृषि संबंधी प्रथाओं के अनुपालन’ की थीमों पर फोकस करते हुए किसानों के लिए किया गया था। जागरूकता अभियानों का एक अन्य उद्देश्य बेहतर गुणवत्ता के बीजों की गैर-उपलब्धता के मुद्दे का समाधान करने के लिए बीज उत्पादन करने हेतु किसानों को प्रशिक्षित करना था।
कार्यशाला में, किसानों को कीट-कीड़ों और बासमती चावल के रोगों की पहचान करने तथा उनके प्रबंधन की विभिन्न पद्धतियों के बारे में प्रशिक्षित किया गया। 2021 के पूरे बासमती उगाए जाने वाले सीजन में जागरूकता अभियानों के दौरान बासमती चावल के निर्यात में समस्याएं तथा चावल उद्योग की अपेक्षाओं जैसे मुद्दों को उत्पादकों एवं निर्यातकों के संज्ञान में लाया गया।
एपीडा को गंगा के मैदानी क्षेत्रों में उगाए जाने वाले बासमती चावल के एकमात्र संरक्षक के रूप में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग दिया गया है। फरवरी, 2016 में जारी जीआई प्रमाणन के तहत, सात राज्यों- पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली तथा जम्मू एवं कश्मीर के 77 जिलों को बासमती चावल उगाये जाने वाले क्षेत्र के रूप में संदर्भित किया जाता है।
बीईडीएफ द्वारा आयोजित जागरूकता अभियान के दौरान, वैज्ञानिकों ने किसानों तथा निर्यातकों को स्थानीय भाषाओं में बासमती चावल के निर्यात में कीटनाशक अवषेश समस्या तथा नर्सरी पालन, समेकित पोषण और जल प्रबंधन सहित उत्पादन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के बारे में विस्तार से बताया। कीटनाशकों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा अच्छी कृषि संबंधी प्रथाओं के अनुपालन के बारे में जानने के लिए कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान, निर्यातक, एफपीओ आदि एकत्रित हुए जिनका आयोजन सात राज्यों में 75 विभिन्न स्थानों पर किया गया।
पंजाब में, 25 जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जबकि उत्तर प्रदेश में 21, हरियाणा में 17, उत्तराखंड में 05, जम्मू एवं कश्मीर में 03 तथा हिमाचल प्रदेश एवं दिल्ली में दो-दो जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
जागरूकता पैदा करने वाले कार्यक्रमों के आयोजन के जरिये, किसानों को जानकारी दी गई कि बासमती चावल की खेती एक भारतीय परंपरा है और यह सामूहिक उत्तरदायित्व है कि इस परंपरा को बनाये रखा जाए क्योंकि वैश्विक बाजार में चावल की भारी मांग है। किसानों से राज्य कृषि विभाग के माध्यम से खुद को basmati.net पर पंजीकृत किए जाने का आग्रह किया गया है।
बीईडीएफ के जरिये एपीडा बासमती चावल की खेती को बढ़ावा देने में राज्य सरकारों की सहायता करता रहा है।
एपीडा ने बासमती चावल का गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए रसायनिक उर्वरक के वैज्ञानिक उपयोग के साथ साथ किसानों द्वारा उत्पादों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए प्रमाणित बीजों के उपयोग का भी सुझाव दिया है जिससे कि देश से बासमती चावल के निर्यात को बढ़ावा देने में और अधिक मदद मिलेगी।
भारत ने 2020-21 में 29,849 करोड़ रुपये ( 4019 मिलियन डॉलर) के बराबर के 4.63 मिलियन टन बासमती चावल का निर्यात किया। भारत के बासमती चावल के लिए प्रमुख गंतव्य स्थलों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, यमन गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात तथा यूरोपीय संघ के देश शामिल है।
एपीडा मूल्य श्रृंखलाओं में विभिन्न हितधारकों के साथ गठबंधनों के जरिये चावल निर्यात को बढ़ावा देता रहा है। सरकार ने एपीडा के तत्वाधान में, चावल निर्यात संवर्धन फोरम (आरईपीएफ) का गठन किया था। आरईपीएफ में चावल उद्योग, निर्यातकों, एपीडा तथा वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़ और ओडिशा सहित प्रमुख चावल उत्पादक राज्यों के कृषि के निदेशकों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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