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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश में ‘कृषि उद्योग समागम का उद्घाटन किया

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज किसान को हर प्रकार की सहायता सीधा किसान के कहते में देने की बात का समर्थन करते हुए कहा “किसान की आमदनी में उत्थान आएगा जब हर सहायता किसान को सीधी मिलेगी। अमेरिका वो देश है जहां किसान परिवार की आय सामान्य परिवार की आय से ज़्यादा है, इसका एक आधार है कि किसान को सीधी सरकारी सहायता मिलती है। हमारे यहां खाद को लेकर बहुत बड़ी सब्सिडी है, अन्य भी बहुत बड़ी सब्सिडी हैं पर वो indirect है। यदि वो सब सीधी किसान को दी जाए तो मेरा आंकलन है एक आधार पर कि हर किसान को हर साल कम से कम 35,000 रुपए मिलेंगे। मैं मानकर चलता हूँ कि इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च इस पर ध्यान देगी, इस पर पूरी तरह से एक टिप्पणी का कागज निकालेगी ताकि किसान को ज़्यादा से ज़्यादा फायदा हो पाए…. .किसान को हर तरीके से सरकार मदद कर रही है – PM KISAN सम्मान निधि सीधा किसान के खाते में जाता है, पर अब आवश्यकता है कि बाकी सहायता जो किसान को मिल रही है, वो सीधी किसान के खाते में जाए, क्योंकि इससे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा।”

“आज मैं मन से ऐलान करना चाहता हूँ सभी के लिए कि कृषि सिर्फ आर्थिक क्षेत्र नहीं है। कृषि का उद्योग से भारी लगाव है और माननीय मुख्यमंत्री ने यह पहल की है। हमारी आधी आबादी कृषि पर आधारित है”, उन्होंने कहा।

नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश में ‘कृषि उद्योग समागम’ के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में भारतीय सेना के पराक्रम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “आज का भारत ये मानता है कि…. हमारी सेनाओं के पराक्रम ने हर भारतीय का सर ऊंचा कर दिया है। हम शान से कहते हैं, हम भारतीय हैं, भारत बदल चुका है, भारत अब आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा। जो 70 साल में नहीं हुआ, वो कठोर निर्णय भारत ये प्रधानमंत्री ने लिया और पाकिस्तान का पानी बंद कर दिया और कहा खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा, ये बहुत बड़ा संदेश दिया है। जिनका सिंदूर उजड़ा उनकी लाज रखी है।”

ऑपरेशन सिन्दूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “ आज पूरा देश राष्ट्र-भावना से ओत-प्रोत है, राष्ट्र को समर्पित है। आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पहलगाम का जवाब ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से लिया। उसका लोहा दुनिया ने माना है। विश्व के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि देश का प्रधानमंत्री बिहार से विश्व को एक संदेश देता है, जिन्होंने सिंदूर मिटाया है, उनको धरती पर रहने का अधिकार नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा के अंदर घुसकर बहावलपुर, मुरिदके -जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर क्या सटीक बमबारी हुई, नष्ट कर दिया। कोई प्रमाण नहीं मांग रहा है, कोई नहीं मांग रहा है, कारण जब कॉफ़िन ले जाए जा रहे थे, उनकी फौज खड़ी थी, उनके नेता खड़े थे, आतंकवादी खड़े थे। भारत को प्रमाण की आवश्यकता नहीं। जिनको चोट लगी है, उन्होंने यह प्रमाण विश्व के सामने दे दिया। भारत के प्रधानमंत्री का संकल्प एक लौह पुरुष की तरह है। अब हर-व्यक्ति राष्ट्र-भावना से, राष्ट्रहित से ओत-प्रोत है।”

गत दशक की आर्थिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “ पिछले दशक में भारत ने बड़ी आर्थिक उछाल लगाई, हम बहुत कमज़ोर स्थिति में थे, दुनिया में, पर एक बड़ी खुशखबरी है — आज भारत दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बना है। हमने किनको पीछे छोड़ा? हमने France को छोड़ दिया, England को छोड़ दिया, Japan को छोड़ दिया। किसकी बारी है? Germany की — और बहुत ही जल्दी भारत दुनिया की तीसरी बड़ी महाशक्ति बनने वाला है। आप पूरे देश में देख रहे हो कि ढांचा किस तरह से बढ़ रहा है।”

Agri-entrepreneurship को बढ़ावा देने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा, “किसानों को कृषि क्षेत्र में उद्यमियों के रूप में उभरना चाहिए। हमारे किसानों को उद्यमिता को परिभाषित करना चाहिए। मैं उन्हें “एग्रीप्रेन्योर” कहता हूँ — हमें देश में लाखों एग्रीप्रेन्योर की आवश्यकता है, जो कृषि उत्पादों के विपणन, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन, और दुग्ध उत्पादन, सब्ज़ी एवं फल क्षेत्र में नेतृत्व करें। और यह खुशी की बात है कि आज के दिन समाज किसान के साथ जुड़ रहा है। देश में 730 कृषि विज्ञान केंद्र हैं और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की अनेक संस्थाएं हैं — ये सभी अब सजग और जागरूक हो गई हैं। मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जिस दिशा में मैंने मुंबई में ध्यान आकर्षित किया था, वह आज ज़मीनी हकीकत बन चुकी है….उद्योगों को भी [चाहिए]…. वे कृषि उत्पाद से काम करते हैं, फैक्ट्रियां चलाते हैं। यह बहुत अच्छा रहेगा कि कृषि आधारित उद्योग, सांसद, विधायक और प्रमुख NGOs किसान गाँव को गोद लें, उस गाँव की काया पलट का संकल्प लें। उसमें Agri-entrepreneurs, Agripreneurs, किसान उद्यमी का बढ़ावा दें। यह उनके लिए भी ठीक रहेगा, क्योंकि उनकी आर्थिक संपन्नता का आधार किसान है, तो किसान की उसमे भागीदारी स्वाभाविक है।”

मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पशु धन को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उठाये गए कदमों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “जो कदम मुख्यमंत्री ने उठाए हैं, खासतौर से डेयरी के मामले में, पशुधन के मामले में, सब्ज़ी के मामले में, फलों के मामले में — हमें तो विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। वो दिन दूर नहीं है कि किसान के यहाँ सिर्फ दूध तक मामला सीमित नहीं रहेगा, दही तक नहीं रहेगा, छाछ तक नहीं रहेगा, आइसक्रीम तक नहीं रहेगा, रसगुल्ले तक नहीं रहेगा — नई तकनीकी आएगी और मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि भारत का किसान राष्ट्रभक्ति में कभी कमी नहीं करता। भारत का किसान सब कष्ट सहन करके, विपरीत परिस्थितियों में — कई बार वो इंद्रदेवता की देरी से भी हो जाती है — किसान हिम्मत नहीं हारता। किसान को यदि अगर प्रेरित किया जाएगा कि किसान उद्योग में पड़े, किसान व्यापार में आए, तो देश की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत का जो लक्ष्य है, वो 2047 से पहले हासिल हो पाएगा।”

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