केन्द्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि “स्टार्टअप्स के बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा” का लक्ष्य नवोन्मेषण और उद्यमशीलता को बढ़ावा देना है। नई दिल्ली के नेशनल फिजिकल लेबोरेट्री में सीएसआईआर द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा महोत्सव’ में अपने उद्घाटन समारोह में डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि उद्योग लिंकेज के साथ-साथ स्टार्टअप्स द्वारा पेटेंट और ट्रेड मार्क सहित बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) दाखिल करने से भारत में नवोन्मेषण को प्रोत्साहन और उद्यमिता को प्रेरणा मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, 2016 में सरकार द्वारा आईपीआर अधिनियम लागू किए जाने के बाद ट्रेडमार्क पंजीकरण की प्रक्रिया का समय घटकर एक महीने रह गया है, जो पहले एक वर्ष से अधिक था।
डॉ. सिंह ने कहा “इसके तुरंत बाद ‘स्टार्टअप्स के बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा’ स्कीम लाई गई,जिसमें पेटेंट फाइल करने में 80 प्रतिशत छूट और उद्योग तथा कंपनियों के मुकाबले 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत छूट की परिकल्पना की गई है।”
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई योजनाएं शुरू की हैं,जो स्टार्टअप इकोसिस्टम और उनके क्षमता निर्माण को मजबूत बनाने में एक-दूसरे की सहायता करती हैं।” उन्होंने कहा कि आप स्टार्टअप्स को संयोजित कर सकते हैं अर्थात् आपके पास मुद्रा स्कीम है,जो आपको बिना किसी ग्रेच्युटी बंधक लगभग ब्याज मुक्त 10-20 लाख के ऋण की पेशकश करती है।
यह उल्लेख करना उचित है कि स्टार्टअप्स के लिए आईपीआर की सुरक्षा के विजन के साथ, सरकार ने नवोन्मेषण और स्टार्टअप्स की सृजनशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए स्टार्टअप्स के लिए बौद्धिक संपदा सुरक्षा (एसआईपीपी) लॉन्च की है। स्टार्टअप्स को पेटेंट दाखिल करने के शुल्क पर 80 प्रतिशत की छूट और पेटेंट आवेदनों की त्वरित जांच की सुविधा प्रदान की जाती है। नए ट्रेडमार्क नियमों के तहत,स्टार्टअप्स को दूसरी कंपनियों के मुकाबले शुल्क दाखिल करने में 50 प्रतिशत की छूट दी गई है।
नए डिजाइन संशोधन नियम 2021 के अनुरूप, स्टार्टअप्स द्वारा औद्योगिक डिजाइनों के पंजीकरण के संवर्द्धन के लिए भी सरकार ने छोटे निकायों के लिए फाइलिंग और अभियोजन शुल्कों को घटा दिया है।
डॉ. सिंह ने कहा, नवोन्मेषी और उद्यमी होने के लिहाज से स्टार्टअप्स के लिए प्रोत्साहन और संवर्द्धन दोनों ही पर्याप्त मात्रा में हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, “पिछले 9 वर्षों में, प्रधानमंत्री मोदी ने विज्ञान एवं वैज्ञानिकों को सम्मान प्रदान किया है और इसे अंतरार्ष्ट्रीय विचार-विमर्शों के एक विषय के रूप में भी आगे बढ़ाया है। अमेरिका की उनकी बिल्कुल हाल की यात्रा के दौरान भी संयुक्त वक्तव्य में प्रमुख विषय विज्ञान संबंधित मुद्दे– सेमी कंडक्टर से लेकर अंतरिक्ष से लेकर अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केन्द्र आर्टेमिस समझौते ही रहे।”
उन्होंने कहा “वैश्विक नवोन्मेषण सूचकांक में हमने 81 से 40– 31 स्थानों की छलांग लगाई है : स्टार्टअप इकोसिस्टम में हमने बहुत देर से, 2016 में शुरुआत की, जब प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में इसकी अपील की लेकिन कुछ ही वर्षों में हम विश्व में स्टार्टअप इकोसिस्टम में तीसरे स्थान पर पहुंच चुके हैं।”
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पारंपरिक ज्ञान और विरासत के डिजिटल भंडार को आधुनिक वैज्ञानिक नवोन्मेषण के साथ जोड़ने की अपील की और कहा कि इस तंत्र को संस्थागत बनाने के द्वारा हम खादी,एरोमा मिशन और लेवेंडर खेती जैसे सेक्टरों में बढ़त प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि यह सर्वश्रेष्ठ समय में से एक है,बहुत अच्छा समय चल रहा है और अगर हम इस स्टार्टअप आईपीआर सुरक्षा पर ध्यान देते हैं तो हमें हमारे पारंपरिक ज्ञान के साथ अपने स्टार्टअप उद्यमों की सहायता करने का लाभ प्राप्त हो सकता है। और अगर हम ऐसा करते हैं तो वास्तव में हमें दूसरे देशों के मुकाबले बढ़त हासिल हो सकती है।”
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी क्योंकि वह इस विजन को आगे बढ़ाते रहे हैं, के नेतृत्व में सरकार के नौ वर्षों में, आज हम विकसित देशों के साथ समान गति और समान स्तर पर हैं। उन्होंने कहा “आज, हम प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग में अन्य देशों के साथ समान साझीदार हैं। उदाहरण के लिए क्वांटम कम्प्यूटिंग में हम विकसित देशों के बराबर ही हैं।” इस अवसर पर, डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की डीजी डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा पर्व इस महीने की पहली तारीख से 30 जुलाई, 2023 तक मनाया जा रहा है।
डीपीआईआईटी के सचिव राजेश कुमार सिंह और सीएसआईआर तथा डीएसटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक और पदाधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
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