ईसीजीसी लिमिटेड (पूर्व में निर्यात ऋण गारंटी कॉरपोरेशन) ने निर्यातकों को आश्वासन दिया है कि वह बीमा प्रीमियम में बढोतरी नहीं करेगी और कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न बाधाओं के बावजूद उसी लागत पर ऋण बीमा कवर देती रहेगी। ईसीजीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एम. सेंथिलनाथन ने मुंबई में निर्यातकों एवं मीडिया कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि, ‘भुगतान योग्य सभी दावों का समुचित रूप से भुगतान किया जाएगा और हमारे पास दावों में किसी भी वृद्धि को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं।‘
मीडिया के साथ परस्पर बातचीत का आयोजन केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा हाल में 4,400 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी का समावेश करने तथा कॉरपोरेशन को स्टॉकएक्सचेंज पर सूचीबद्ध करने के निर्णय के आलोक में किया गया था। सेंथिलनाथन ने कहा, ‘ सरकार द्वारा बहुत सही समय पर और समुचित तरीके से सहायता की गई है। यह न केवल दावों के भुगतान बल्कि हमारी सेवाओं के विस्तार में भी हमारी मदद करेगी। ‘
सेंथिलनाथन ने कहा, ‘ भारत जैसे देश के लिए विशाल अवसर है जहां दुनिया भर की अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां गंभीरतापूर्वक आपूर्ति स्रोतों को विविधीकृत करने की ओर देख रही हैं। यह सही समय है और हमें भरोसा है कि हम भारत से विस्तारित हो रहे निर्यात की मांग के अनुरूप अपनी सेवाओं को विस्तारित करने में सक्षम होंगे। ‘
भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए प्रतीक्षा कर रहे विशाल अवसरों की चर्चा करते हुए, उन्होंने बताया कि किस प्रकार महामारी के बाद वी (V)-आकार की रिकवरी अंतर्राष्ट्रीय वस्तु व्यापार की वृद्धि में सकारात्मक रूप से योगदान देगी, जैसाकि अधिकांश देशों में देखा गया है। उन्होंने कहा कि, ‘ ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2030 तक 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वस्तु व्यापार सालाना 3.1 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा।‘
सेंथिलनाथन ने निर्यात को विस्तारित करने के लिए ईसीजीसी की प्रतिबद्धता के बारे में बताया। उन्होंने सिडबी जैसे समान विचार वाले संस्थान के साथ साझीदारी करने की इच्छा व्यक्त की जो स्वदेशी उत्पादों का निर्यात करने के लिए नई कंपनियों और स्टार्टअप्स की पहचान करने का प्रयास कर रहा है, जो उन्नत हैं और नई प्रौद्योगिकीयों का उपयोग कर रही हैं।
अध्यक्ष ने देश के निर्यात क्षेत्र की सहायता करने के लिए महामारी के दौरान ईसीजीसी द्वारा निभाई गई भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘जब बाजार से ( महामारी के कारण) कई निजी बीमा कंपनियों ने हाथ खींच लिए, हमने अपने कवर को 2020 तक बढ़ा दिया था। हम अग्निशामकों की तरह हैं।‘
सीएमडी ने यह भी कहा कि अन्य देशों के विपरीत, भारत में, सरकार ने निर्यात की सहायता करने के लिए तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि ट्रस्ट का वित्तपोषण 1: 20 के लाभ अनुपात में हो जिससे कि जोखिम का निर्वहन ट्रस्ट द्वारा हो, एनईआईए (राष्ट्रीय निर्यात बीमा खाता) स्कीम के रूप में एक स्पेशल पर्पस वेहिकल का सृजन किया है और इसकी मदद सरकारी फंडिंग के द्वारा भी की जाती है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भी पांच वर्षों के लिए अनुदान सहायता के रूप में 1,650 करोड़ रुपये के समावेश की स्वीकृति दी है।
भविष्य की परियोजनाओं की चर्चा करते हुए, सीएमडी ने कहा कि ईसीजीसी वैसे सेक्टरों की पहचान करने के लिए भारतीय विदेश व्यापार संस्थान की सहायता ले रही है जो निर्यात बीमा केंद्रित तथा निर्यात आधारित हैं।
कर्यक्रम के दौरान दी गई एक प्रस्तुति में ईसीजीसी के जीएम निर्दोष चोपड़ा ने बताया कि ईसीजीसी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान लगभग 7,500करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया है और जिससे निर्यातकों तथा बैंकों को भी बिना किसी विलंब के उनके व्यवसाय को निष्पादित करने में सहायता मिली।
उन्होंने कहा कि पूंजी समावेश से ईसीजीसी बीमा कवर को जारी करने में सक्षम हो जाएगी जिससे पांच वर्षों की अवधि के दौरान 5.28लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निर्यात को सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईसीजीसी में पूंजी समावेश इसे निर्यातोन्मुखी उद्योग, विशेष रूप से श्रम केंद्रित क्षेत्रों तक अपने कवरेज को विस्तारित करने में सक्षम बनाएगा। स्वीकृत राशि किस्तों में समावेशित की जाएगी जिससे इसकी क्षमता बढ़कर 88,000करोड़ रुपये तक जोखिम को अंडरराइट करने की हो जाएगी। ‘
ईसीजीसी के वित्त वर्ष 2022-23के दौरान स्टॉकएक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। उम्मीद है कि इससे कंपनी को बेहतर कॉरपोरेट प्रथाओं का अपनाने तथा भविष्य में आईपीओ के जरिये बाजार से संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
ईसीजीसी की स्थापना 1957में ऋण जोखिम बीमा तथा निर्यात के लिए संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने के जरिये देश से निर्यात को बढ़ावा देने के उद्वेश्य से की गई थी। यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्य करती है। पिछले कुछ वर्षों में इसने भारतीय निर्यातकों एवं निर्यात ऋण देने वाले वाणिज्यिक बैंकों की आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न निर्यात ऋण जोखिम बीमा उत्पादों को डिजाइन किया है। कंपनी का मुख्यालय मुंबई में है और भारत के सभी प्रमुख नगरों में इसके शाखा कार्यालय हैं।
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