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इंडियन सार्स-सीओवी-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) अनुक्रमण से रियल टाइम आधार पर चिंताजनक वैरिएंट (वीओसी) का पता लगाने में सहायता मिली

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में देश में कम मात्रा में अनुक्रमण और पैटर्न का पता लगाने व सरकार को कदम उठाने के उद्देश्य से अलर्ट करने के लिए नमूना संग्रह व डाटाबेस में अनुक्रम जमा करने के बीच खामियां होने का आरोप लगाया गया है। यह स्पष्ट किया जाता है कि नमूने की रणनीति देश के उद्देश्यों, वैज्ञानिक सिद्धांतों और डब्ल्यूएचओ के मार्गदर्शन संबंधी दस्तावेजों पर आधारित हैं। इस क्रम में, रणनीति की समीक्षा की गई है और समय समय पर संशोधन किया गया है।

आईएनएसएसीओजी के तहत डब्ल्यूजीएस नमूना रणनीति का क्रमागत विकास :

भारतीय सार्स-सीओवी-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी), भारत सरकार द्वारा 25 दिसंबर, 2020 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत स्थापित किया गया एक फोरम है। इसका उद्देश्य भारत में फैल रहे कोविड-19 के स्ट्रेन के जीनोम अनुक्रमण और वायरस भिन्नता का अध्ययन व निगरानी करना है।

शुरुआती चरण में, इन उद्देश्यों के साथ नमूने लिए गए थे

अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की पहचान करना जो विभिन्न स्ट्रेन ला सकते हैं
यह पता लगाना कि क्या वैरिएंट पहले से ही आबादी में मौजूद हैं

अंतर्राष्ट्रीय यात्री चुनिंदा देशों से आ रहे हैं और उनके संपर्क में आने वाले लोग ही डब्ल्यूजीसी के लिए लक्षित थे
हर राज्य से आरटीपीसीआर पॉजिटिव मामलों के 5 प्रतिशत समुदाय आधारित नमूने

इस बात पर गौर करना अहम है कि 5 प्रतिशत का मानक तात्कालिक दैनिक नए मामलों (लगभग 10,000-15,000 प्रति दिन) और उस समय की आरजीएसएल की अनुक्रमण क्षमता के आधार पर तय किया गया था। दोनों ही उद्देश्य पूरे हो गए, जब यह निर्णायक रूप से स्थापित हो गया कि अंतर्राष्ट्रीय यात्री वैरिएंट्स लेकर आ रहे हैं और पांच राज्यों में समुदाय (यूके वैरिएंट) में इनका संचरण हो चुका है।

इसके परिणामस्वरूप, वैश्विक अनुक्रमण रणनीति और डब्ल्यूएचओ के मार्गदर्शन दस्तावेज की तर्ज पर नमूना रणनीति को निम्नलिखित उद्देश्य के साथ आईएनएसएसीओजी द्वारा संशोधित किया गया है :

संभावित नमूना संग्रहण द्वारा जीनोमिक वैरिएंट्स/ म्यूटेशंस के उभार का पता लगाना
बड़े क्लस्टर, असामान्य क्लीनिकल प्रस्तुतीकरण, वैक्सीन सफलता, संधिग्ध पुनः संक्रमण आदि जैसी विशेष/ असामान्य घटनाओं में वीओसी/ जीनोमिक वैरिएंट्स का पता लगाना।

इस क्रम में, नए कोविड-19 मामलों की संख्या में बढ़ोतरी, आरजीएसएल की मौजूदा क्षमता और देश व अन्य स्थानों पर सामने आ रहे अन्य जीनोमिक वैरिएंट सहित चिंताजनक वैरिएंट्स (वीओसी) का समय से पता लगाने के लिए एक रणनीति अपनाई गई है। इस रणनीति को 12 अप्रैल को “सेंटिनेल सर्विलांस” में संशोधित कर दिया गया था। इस पर डब्ल्यूएचओ द्वारा भी मुहर लगा दी गई, जिसने इसी तरह का मार्गदर्शन जारी किया था।

वर्तमान सेंटिनेल सर्विलांस रणनीतिक के तहत :

राज्यों ने नामांकित आरजीएसएल को नमूने भेजने के लिए सेंटिनेल साइट्स के रूप में 5 प्रयोगशालाओं और 5 तृतीयक देखभाल अस्पतालों की पहचान की है।
प्रत्येक सेंटिनेल साइट डब्ल्यूजीएस के लिए नियमित रूप से 15 नमूने नामांकित प्रयोगशालाओं को भेज रही है।

सेंटिनेल सर्विलांस के अलावा, बड़े क्लस्टर, असामान्य क्लीनिकल प्रस्तुतीकरण, वैक्सीन सफलता, संदिग्ध पुनः संक्रमणों जैसी विशेष/ असामान्य घटनाओं के लिए खोज, जांच और प्रतिक्रिया के लिए सेंटिनेल सर्विलास के अलावा एक अतिरिक्त घटना आधारित सर्विलांस को भी मंजूरी दी गई। महामारी संबंधी जांच, अध्ययन विधि का विवरण, डब्ल्यूजीसी आदि के लिए संग्रहित नमूनों की संख्या हालात/ घटना पर निर्भर करेगी।

जहां तक टर्नअराउंड समय की बात है, आईएनएसएसीओजी अनुक्रमण से रियल टाइम आधार पर वीओसी का पता लगाने में सहायता मिली है और इसे संबंधित राज्यों को भी साझा किया गया है। मौजूदा टर्नअराउंड समय सिर्फ 10 से 15 दिन है। हालांकि, इस बात का उल्लेख करना जरूरी है कि रोग संचरण और गंभीरता पर ज्ञात वीओसी का प्रभाव पहले से स्थापित है, लेकिन जांच के अंतर्गत नए म्यूटेशंस/ वैरिएंट्स के लिए; महामारी विज्ञान परिदृश्य/ नैदानिक दृष्टिकोण से जीनोमिक म्यूटेशंस के सह संबंध स्थापित करने के लिए, वैज्ञानिक रूप से वैध प्रमाण जुटाने के उद्देश्य से कुछ हफ्तों तक मामलों/ नैदानिक गंभीरता के महामारी विज्ञान संबंधी रुझान और जीनोमिक वैरिएंट के नमूनों के अनुपात की निगरानी करना अहम है।

मौजूदा जीनोम अनुक्रमण प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाने के संबंध में, यह बताया गया है कि मौजूदा 10 प्रयोगशालाओं के अलावा, 18 अन्य प्रयोगशालाओं को आईएनएसएसीओजी नेटवर्क में शामिल करने को भी मंजूरी दे दी गई है।

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