आयुष मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए आज बड़ी संख्या में प्रमुख पहलों की घोषणा की है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत उत्तर प्रदेश को विभिन्न गतिविधियों के लिए कुल 553.36 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। केंद्रीय आयुष और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में ये प्रमुख घोषणाएं कीं।
देश में एक टिकाऊ, प्रभावी और सस्ती स्वास्थ्य सेवा के निर्माण की दिशा में प्रयास करते हुए, 50 बिस्तरों वाले आठ नए एकीकृत आयुष अस्पतालों का उद्घाटन किया गया। ये अस्पताल देवरिया, कौशाम्बी, सोनभद्र, लखनऊ, कानपुर, संत कबीर नगर, कानपुर देहात और ललितपुर में स्थित हैं। इनका निर्माण 72 करोड़ रुपये के कुल पूंजीगत परिव्यय के साथ किया गया। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न हिस्सों में कुल 500 नए आयुष स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्रों (एचडब्ल्यूसी) का भी उद्घाटन किया गया।
लोगों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की इस मजबूत नींव पर केंद्रीय मंत्री ने आयुर्वेद के लिए एक नए आयुष शैक्षणिक संस्थान का शिलान्यास किया। इसका निर्माण 49.83 करोड़ रुपये की पूंजीगत परिव्यय के साथ किया जाएगा। इस नई संस्थान का निर्माण अयोध्या में किया जाएगा। इसके अलावा उन्नाव, श्रावस्ती, हरदोई, गोरखपुर, संभल और मिर्जापुर में 50 बिस्तरों वाले छह नए अस्पतालों का भी शिलान्यास किया गया है। इस परियोजना के लिए कुल 78 करोड़ रुपये व्यय करने की योजना है। वहीं, राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 250 नए आयुष औषधालयों का भी निर्माण किया जाएगा।
राज्य में एक मजबूत स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली के निर्माण में आयुष की भूमिका के बारे में सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इन 50 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पतालों के निर्माण से लोगों को उनके समग्र स्वास्थ्य के लिए विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों का उचित लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने आगे कहा कि आयुष सिद्धांतों व अभ्यासों के आधार पर लोगों के समग्र स्वास्थ्य की देखभाल करने के उद्देश्य से आयुष स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्र का निर्माण मुख्य रूप से प्राथमिकता के स्तर पर किया गया है, जिससे लोग स्वस्थ जीवन जी सकें।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आयुष मंत्रालय के उठाए गए इन कदमों से आम लोगों को काफी सहायता प्राप्त होगी।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय 2014 से केंद्रीय प्रायोजित योजना राष्ट्रीय आयुष मिशन का कार्यान्वयन कर रहा है। इसका उद्देश्य आयुष अस्पताल और औषधालयों के उन्नयन के जरिए एक सार्वभौमिक पहुंच के साथ सस्ती आयुष सेवाएं प्रदान करना है। इसके अलावा, राज्य स्तर पर आयुष शिक्षण संस्थानों का उन्नयन कर संस्थागत क्षमता को मजबूत करना और 50/30/10 बिस्तरों वाले एकीकृत आयुष अस्पताल की स्थापना करना भी इस मिशन मुख्य उद्देश्यों में से एक है।
इसके अलावा केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय आयुष मिशन के जरिए 2023-24 तक की अवधि के लिए कार्यान्वयन के संबंध में आयुष्मान भारत के तहत 12,500 आयुष स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्र (आयुष स्वास्थ्य और आरोग्य केंद्र) घटक के परिचालन को भी मंजूरी दी है। इस घटक का उद्देश्य आयुष सिद्धांतों और अभ्यासों के आधार पर एक समग्र स्वास्थ्य प्रारूप की सेवाएं प्रदान करना है, जिससे रोग के बोझ को कम किया जा सके और जनता को “स्व-देखभाल” के लिए सशक्त किया जा सके। अब दूसरे चरण में राष्ट्रीय आयुष मिशन के क्रियान्वयन के जरिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इसमें शामिल करके लक्षित आयुष सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को शुरू करने का भी प्रस्ताव है। दूसरे चरण की अवधि 2025-26 तक है।
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