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आयकर विभाग (सीबीडीटी) ने ई-सत्यापन के लिए 68000 मामले लिए: वित्त मंत्रालय

आयकर विभाग ने स्वैच्छिक कर अनुपालन को प्रोत्साहित करने और एक पारदर्शी तथा गैर-बिना हस्तक्षेप के टैक्स प्रशासन की सुविधा के लिए कई प्रगतिशील कदम उठाए हैं। ऐसी ही एक प्रमुख पहल ई-सत्यापन योजना, 2021 (“योजना”) है, जिसे 13 दिसंबर, 2021 को अधिसूचित किया गया था।

सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी ढंग से उपयोग करते हुए, योजना का उद्देश्य करदाता के साथ ऐसी वित्तीय लेन-देन की जानकारी को साझा करना और इसकी जांच करना है, जो करदाता द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न (आईटीआर) में या तो रिपोर्ट नहीं की गई है या अधूरी रिपोर्ट पेश की गयी प्रतीत होती है।

विभाग विभिन्न स्रोतों से वित्तीय लेनदेन की जानकारी एकत्र कर रहा है। इससे पहले, इसके एक हिस्से को करदाता के साथ 26एएस विवरण में साझा किया जाता था। विभिन्न स्रोतों से एकत्र किए गए डेटा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने की दृष्टि से, अब पूरी जानकारी करदाता को वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) के माध्यम से दी जाती है। एआईएस, करदाता को किसी भी जानकारी पर आपत्ति करने की सुविधा प्रदान करता है, यदि स्रोत द्वारा ऐसी किसी जानकारी की गलत सूचना दी गयी हो। विभाग उक्त जानकारी की स्रोत से पुष्टि करता है और यदि स्रोत कहता है कि कोई त्रुटि नहीं है, तो उक्त जानकारी ई-सत्यापन के लिए जोखिम मूल्यांकन के अधीन हो जाती है।

ई-सत्यापन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, सूचना प्रपत्र इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी किए जाते हैं और करदाताओं द्वारा जवाब भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं। जांच पूरी होने पर, करदाता के साथ बिना किसी भौतिक संपर्क के, इलेक्ट्रॉनिक रूप से एक सत्यापन रिपोर्ट तैयार की जाती है।

यह योजना करदाताओं के लिए बेहद फायदेमंद है, क्योंकि यह करदाता को साक्ष्य के साथ वित्तीय लेनदेन की व्याख्या करने में सक्षम बनाती है। यह डेटा सुधार/सही करने में भी मदद करती है और इस तरह गलत सूचना पर कार्यवाही शुरू करने से रोकती है। इसके अलावा, चूंकि वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी करदाता के साथ साझा की जाती है, यह उस आय को सही/अद्यतन करने का अवसर प्रदान करती है, जिसके बारे में करदाता द्वारा दाखिल आईटीआर में उचित रिपोर्ट पेश नहीं की गयी है। दूसरे शब्दों में, ई-सत्यापन योजना करदाता को जोखिमों से अवगत कराती है, यह करदाता को आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139(8ए) के तहत आय-विवरण को अद्यतन करने का अवसर प्रदान करके उसे स्वैच्छिक अनुपालन के लिए प्रेरित करती है।

पायलट आधार पर, लगभग 68,000 मामलों में, वित्त वर्ष 2019-20 से संबंधित वित्तीय लेनदेन की जानकारी, ई-सत्यापन के लिए प्राप्त की गयी है। शुरुआत में, ई-अभियान के माध्यम से लेनदेन का विवरण व्यक्तिगत करदाता के साथ साझा किया गया है। अब तक, नामित निदेशालय द्वारा लगभग 35,000 मामलों में ई-सत्यापन पूरा कर लिया गया है और शेष सत्यापन होने की प्रक्रिया में हैं।

योजना के तहत, करदाताओं को, दाखिल की गई मूल आईटीआर की तुलना में, सूचना के बेमेल को स्वीकार करने का अवसर प्रदान किया गया है और यह पाया गया है कि कई करदाताओं ने अद्यतन आईटीआर दाखिल किए हैं।

योजना और उसमें शामिल विभिन्न प्रक्रियाओं की बेहतर समझ की सुविधा के लिए, ई-सत्यापन योजना, 2021 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) www.incometaxindia.gov. पर उपलब्ध हैं।

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