आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का शहीदी दिवस है। आज ही के दिन 1931 में लाहौर षडयंत्र मामले में इन तीनों महान शहीदों ने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले से लगा लिया था। इस अवसर पर आज पंजाब सहित देश के कोने-कोने में इन महान शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है।
शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले बस यही उनका आखरी निशां होगा- इन पंक्तियों की तर्ज़ पर पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर ज़िले में स्थित भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़कलां और फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर विशेष शहीदी समारोह का आयोजन किया जा रहा है। 23 मार्च 1931 को हुसैनीवाला में ही तीनों शहीदों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का अंतिम संस्कार किया गया था। भगत सिंह की शहादत के बाद उनके करीबी मित्र भगवती चरण वोहरा की पत्नी दुर्गा भाभी, जो खुद एक क्रांतिकारी योद्धा थीं, ने कहा था, “फांसी उनका मंडप बन गई, फंदा उनकी माला और मौत उनकी दुल्हन बन गई। इन महान शहीदों को शत-शत नमन जो देश की खातिर अमर हो गए।
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