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आईटी हार्डवेयर निर्माण के लिए पीएलआई योजना ने लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर (PC) और सर्वर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में एक नए युग का शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और “डिजिटल इंडिया” एवं “मेक इन इंडिया” कार्यक्रमों जैसी उनकी दूरदर्शी पहल के तहत, भारत ने पिछले पांच वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में अभूतपूर्व वृद्धि देखी है। इलेक्ट्रॉनिक्स 2019 पर राष्ट्रीय नीति में इसके आकार और व्यापक पैमाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अंतर्गत निर्यात को बढ़ावा देने और उद्योग हेतु वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक सक्षम वातावरण बनाते हुए घरेलू मूल्यवर्धन में वृद्धि के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण (ईएसडीएम) के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति की अवधारणा तैयार की गई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) ने सूचना प्रौद्योगिकी हार्डवेयर के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) के तहत 14 पात्र आवेदकों को मंजूरी दी है। 3 मार्च 2021 को अधिसूचित आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना, पात्र कंपनियों को भारत में निर्मित लक्ष्य खंडों के तहत चार वर्ष की अवधि के लिए (वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25) माल की शुद्ध वृद्धिशील बिक्री (वित्त वर्ष 2019-20 के आधार वर्ष पर) पर 4% से 2%/1% का प्रोत्साहन प्रदान करती है। आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना के तहत लक्षित खंडों में लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) और सर्वर शामिल हैं। यह योजना घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और इन आईटी हार्डवेयर उत्पादों की मूल्य श्रृंखला में बड़े निवेश को आकर्षित करने के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन का प्रस्ताव भी देती है।

पीएलआई योजना के तहत पात्र आवेदकों को स्वीकृति देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना-प्रौदयोगिकी, संचार, विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पीएलआई योजना वैश्विक के साथ-साथ घरेलू निर्माण कंपनियों से प्राप्त आवेदनों के मामले में बहुत सफल रही है। उन्होंने कहा कि इस उद्योग ने विश्व स्तरीय विनिर्माण गंतव्य के रूप में भारत की शानदार प्रगति के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया है और यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत- के आह्वान के साथ दृढ़ता से प्रतिध्वनित होता है। मंत्री महोदय ने कहा कि “हम आशावादी हैं और मूल्य श्रृंखला में एक मजबूत इको सिस्‍टम के निर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण के लिए तत्पर हैं, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इको सिस्‍टम को मजबूत किया जा सके”।

आईटी हार्डवेयर कंपनियों की श्रेणी में चार कंपनियों का चयन किया गया है जिनमें डेल, आईसीटी (विस्ट्रॉन), फ्लेक्सट्रॉनिक्स और राइजिंग स्टार्स हाई-टेक (फॉक्सकॉन) शामिल हैं।

घरेलू कंपनियों की श्रेणी के तहत, लावा इंटरनेशनल लिमिटेड, डिक्सन टेक्नोलॉजीज (इंडिया) लिमिटेड, इन्फोपावर टेक्नोलॉजीज (सहस्रा और एमआईटीएसी का संयुक्त उद्यम), भगवती (माइक्रोमैक्स) नियोलिन्क, ऑप्टिमस, नेटवेब, स्माइल इलेक्ट्रॉनिक्स, वीवीडीएन और पनाचे डिजिलाइफ नामक 10 कंपनियों को स्वीकृति दी गई है।

अगले 4 वर्षों में, आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना के तहत अनुमोदित कंपनियों से कुल 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन होने की उम्मीद है। कुल उत्पादन में से, आईटी हार्डवेयर कंपनियों की श्रेणी के तहत स्वीकृत कंपनियों ने 84,746 करोड़ रुपये के उत्पादन का प्रस्ताव दिया है। घरेलू कंपनियों की श्रेणी के तहत स्वीकृत कंपनियों ने 76,007 करोड़ रुपये के उत्पादन का प्रस्ताव दिया है। इस योजना से आईटी हार्डवेयर निर्माण में 2,517 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश लाया जाएगा।

यह योजना अगले 4 वर्षों में अप्रत्यक्ष रोजगार के लगभग 3 गुना अतिरिक्त रोजगार सृजन के साथ-साथ 36,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी। इससे घरेलू मूल्यवर्धन के मौजूदा 10-15% से बढ़कर 25-30% होने की उम्मीद है।

भारत में 2025 तक इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग कई गुना बढ़ने की उम्मीद के साथ, माननीय मंत्री महोदय ने विश्वास व्यक्त किया कि पीएलआई योजना और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए की गईं अन्य पहल भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक प्रतिस्पर्धी गंतव्य बनाने में मदद करेगी और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देगी। वैश्विक स्तर पर लक्ष्य रखते हुए इस योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में घरेलू चैंपियन कंपनियों के निर्माण से लोकल के लिए वोकल को बढ़ावा मिलेगा।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए, विनिर्माण की दुनिया एक बदलाव के दौर से गुजर रही है। दुनिया भर में विनिर्माण कंपनियां एकल बाजार के आधार पर शामिल जोखिम को कम करने के लिए अपने विनिर्माण स्थलों में विविधता लाने की कोशिश कर रही हैं।

पीएलआई योजनाएं भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी गंतव्य बनाने में मदद करेंगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को अर्जित करने के हमारे मिशन को आगे बढ़ाने के लिए घरेलू चैंपियन भी बनाएंगी।

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