संगठित वन्यजीव अपराध और अवैध वन्यजीव व्यापार से निपटने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा गठित एक शीर्ष निकाय वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डबल्यूसीसीबी) ने सभी बाघ अभयारण्यों और बाघ क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया। क्षेत्रों में गश्त तेज करने और विश्वसनीय इनपुट के आधार पर उपरोक्त सभी क्षेत्रों को शिकारी गिरोहों से मुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं।
दिनांक 28.06.2023 को असम वन और पुलिस अधिकारियों द्वारा गुवाहाटी में एक बाघ की खाल और हड्डियाँ जब्त की गईं और 05 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। मामले को असम वन विभाग ने जांच के लिए डब्ल्यूसीसीबी को स्थानांतरित कर दिया था क्योंकि मामले में कई राज्यों की संलिप्तता दिखाई दे रही थी। डबल्यूसीसीबी ने गुवाहाटी में बाघ की खाल और हड्डी जब्ती मामले की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया।
अपराधियों से प्रारंभिक पूछताछ से पता चला कि जब्त किए गए बाघ के शरीर के अंग महाराष्ट्र के गढ़चिरौली क्षेत्र के हैं। प्रारंभिक पूछताछ के ये निष्कर्ष डब्ल्यूसीसीबी द्वारा महाराष्ट्र वन विभाग के अधिकारियों के साथ साझा किए गए थे। डब्ल्यूसीसीबी ने इनपुट के आधार पर गढ़चिरौली इलाके से बावरिया समुदाय के शिकार गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से टांग पकड़ने वाले ट्रेप और बाघ के शरीर के कई हिस्से भी बरामद किये गये।
गुवाहाटी जब्ती मामले में वांछित अपराधियों में से भी एक को गढ़चिरौली इलाके से गिरफ्तार किया गया था। गुवाहाटी और गढ़चिरौली में गिरफ्तार अपराधी से पूछताछ के आधार पर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। यह पाया गया कि द्वारिका में एक व्यक्ति मिश्राम जाखड़ बाघ के अवैध शिकार और बाघ के शरीर के अंगों के अवैध व्यापार को नियंत्रित और निर्देशित करता है। वह न केवल बाघों के अवैध व्यापार सिंडिकेट को प्रायोजित करता है, बल्कि शिकारियों, तस्करों से भारी धन भी वसूलता है और उन्हें ब्लैकमेल करता है।
दिनांक 31.07.2023 को डब्ल्यूसीसीबी एसआईटी अधिकारियों ने गढ़चिरौली टीम के साथ संदिग्धों के परिसरों पर छापा मारा। मिश्रम जाखड़ को 14.80 लाख रूपये की नकदी सहित गिरफ्तार किया गया, जिसका बाघ के अंगों के अवैध व्यापार से जुड़े होने का संदेह है। तलाशी के दौरान जाखड़ के पास से एक आईडी कार्ड बरामद हुआ है, जिससे पता चलता है कि वह डब्ल्यूपीएसआई (वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया) में फील्ड ऑफिसर के पद पर काम कर चुका है। उसने कबूल किया है कि वह एनसीटी दिल्ली सरकार के वन विभाग के वन्यजीव विंग में काम कर चुका है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9/39/48/49ए/50/51/52 के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसे माननीय अदालत के समक्ष पेश किया गया है। उसके सहयोगियों के साथ आगे की पूछताछ के लिए उसे गढ़चिरौली ले जाने के लिए दायर ट्रांजिट रिमांड के जवाब में माननीय अदालत ने उसकी उम्र (81 वर्ष) को देखते हुए उसे ट्रांजिट जमानत दे दी है। आरोपी को अदालत और जांच अधिकारी के समक्ष मांगी गई तारीख और समय पर उपस्थित होने का निर्देश भी दिया गया। इसका संदेह है कि अपराधी मिश्राम जाखड़ बाघ शिकारियों और तस्करी सिंडिकेट के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
महाराष्ट्र के वन अधिकारियों के साथ, डब्ल्यूसीसीबी एसआईटी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत बाघ के अवैध शिकार और अवैध व्यापार नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपराध की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भी शामिल किया जाएगा।
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