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अमेरिकी अधिकारियों ने अपने सैनिकों को वापस बुलाने के बाद, तालिबान से पहली बार आमने-सामने बातचीत की

अमेरिकी अधिकारियों ने इस साल अगस्त में अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाने के बाद वहां के सत्तारूढ़ तालिबान से पहली बार आमने-सामने बातचीत की है। अधिकारियों ने बताया कि चरमपंथी गुटों पर नियंत्रण करने, अमेरिकी नागरिकों को वहां से निकालने और मानवीय सहायता सहित कई मुद्दों पर बाचतीत हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह बातचीत तालिबान को मान्यता देने के बारे में नहीं हुई।

अमेरिका ने कहा है कि उसकी सेना के हटने के बाद अफगानिस्तान के उत्तरी शहर कुंदुज में एक मस्जिद में सबसे बड़ा आत्मघाती हमला हुआ है, जिसमें कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई और एक सौ से अधिक लोग घायल हो गए।

कतर में हुई इस बैठक के बाद तालिबान के विदेशमंत्री अमीर खान मुत्तकी ने बताया कि दोनों पक्ष 2020 में हुए दोहा समझौते की शर्तों को कायम रखने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, अमरीका की तरफ से कल की वार्ता पर अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है। लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने पहले कहा था कि इस बैठक का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों का सम्मान, एक समावेशी सरकार का गठन तथा मानवीय एजेंसियों के संचालन की अनुमति देने के लिए तालिबान पर दबाव बनाना है।

अमेरिकी अधिकारियों ने इस साल अगस्त में अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से वापस बुलाने के बाद वहां के सत्तारूढ़ तालिबान से पहली बार आमने-सामने बातचीत की है। अधिकारियों ने बताया कि चरमपंथी गुटों पर नियंत्रण करने, अमेरिकी नागरिकों को वहां से निकालने और मानवीय सहायता सहित कई मुद्दों पर बाचतीत हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह बातचीत तालिबान को मान्यता देने के बारे में नहीं हुई।

अमेरिका ने कहा है कि उसकी सेना के हटने के बाद अफगानिस्तान के उत्तरी शहर कुंदुज में एक मस्जिद में सबसे बडा आत्मघाती हमला हुआ है, जिसमें कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई और एक सौ से अधिक लोग घायल हो गए।

कतर में हुई इस बैठक के बाद तालिबान के विदेशमंत्री अमीर खान मुत्तकी ने बताया कि दोनों पक्ष 2020 में हुए दोहा समझौते की शर्तों को कायम रखने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, अमेरिका की तरफ से कल की वार्ता पर अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है। लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने पहले कहा था कि इस बैठक का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों का सम्मान, एक समावेशी सरकार का गठन तथा मानवीय एजेंसियों के संचालन की अनुमति देने के लिए तालिबान पर दबाव बनाना है।

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