अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने आज जारी अपनी नवीनतम विश्व आर्थिक आउटलुक रिपोर्ट में, वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर के अनुमान को पहले के 9 प्रतिशत से घटाकर 8.2 प्रतिशत कर दिया है। कोष ने इसके लिए यूक्रेन-रूस संघर्ष के कारण घरेलू उपभोग और निजी निवेश पर तेल की ऊंची कीमतों के नकारात्मक प्रभाव का हवाला दिया है। इसने वैश्विक आपूर्ति पक्ष व्यवधान के बीच मुद्रास्फीति अपेक्षाओं को नियंत्रण में रखने के लिए केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक सख्ती का सुझाव दिया है।
इससे पहले, विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद के अनुमान में कटौती कर इसे 8 प्रतिशत कर दिया था। इस बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने भी वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भारत के विकास अनुमान में कटौती कर इसे 7.2 प्रतिशत कर दिया है, जबकि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान में कहा गया है कि इस दौरान सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि आठ दशमलव नौ प्रतिशत रहेगी।
कोष ने कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए अपने वैश्विक विकास दृष्टिकोण को भी 4.4 प्रतिशत से घटाकर तीन दशमलव छह प्रतिशत कर दिया है।
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