नई नीति में सभी हितधारकों के बीच बाधारहित आपसी समन्वय होना चाहिए, इसके लिए श्रृंखला की कमजोर कड़ियों, पृथक रूप से काम करने आदि की पहचान करके इन्हें दूर किया जाना चाहिए। भविष्य, सभी प्रौद्योगिकियों के आपसी तालमेल और एकीकरण पर आधारित होगा।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर के. विजय राघवन और डीएसटी के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने 12 जून, 2020 को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति (एसटीआईपी) 2020 के निर्माण के लिए आम लोगों और विशेषज्ञों से परामर्श प्राप्त करने हेतु एसटीआईपी 2020 टाउन हॉल मीट, ट्रैक-I लॉन्च किया।
एसटीआईपी 2020 टाउन हॉल मीट का उद्घाटन करते हुए प्रोफेसर के. विजय राघवन ने कहा कि कोविड-19 ने हमें दिखाया है कि विज्ञान में निवेश करना महत्वपूर्ण है। परिवर्तन और सतत निरंतरता, पर्यावरण और जैव विविधता एवं सूचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत, साम्राज्यवाद से मुक्त कुछ गिने–चुने देशों में एक है, जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास में निवेश किया है।"
उन्होंने विज्ञान और ज्ञान को सभी लोगों के लिए सुलभ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए भाषा और अन्य बाधाओं को दूर किया जाना चाहिए। नीति-निर्माण के द्वारा जितना संभव हो, अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए विज्ञान का अनुवाद बहुत आवश्यक है, ताकि लोग अपनी भाषा में स्वतंत्र रूप से सोच सकें तथा ज्ञान और संसाधनों का लाभ उठा सकें।
ट्रैक I परामर्श प्रक्रिया में, साइंस पालिसी फोरम के माध्यम से आम लोगों और विशेषज्ञों से व्यापक स्तर पर परामर्श प्राप्त करना शामिल है। इसका लक्ष्य एसटीआईपी 2020 को विकेंद्रीकृत और समावेशी बनाना है। साइंस पालिसी फोरम एक समर्पित मंच है जिसके माध्यम से विज्ञान नीति के बारे में आम लोगों और विशेषज्ञों के विचारों/परामर्शों को आमंत्रित किया गया है।
ट्रैक I के तहत विशेषज्ञों और नीति विद्वानों के साथ संवाद श्रृंखला, आम लोगों के संवाद के साथ एक विषय आधारित पैनल परिचर्चा, लक्षित सर्वेक्षण, लिखित सामग्री के लिए प्रिंट मीडिया व चैनल के लेख, व्यापक कनेक्टिविटी के लिए सामुदायिक पॉडकास्ट शामिल होंगे।
उद्घाटन सत्र में प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने उल्लेख किया कि नई नीति में सभी हितधारकों के बीच बाधारहित आपसी समन्वय होना चाहिए। इसके लिए श्रृंखला की कमजोर कड़ियों, पृथक रूप से काम करने आदि के पहचान करके इन्हें दूर किया जाना चाहिए। भविष्य, सभी प्रौद्योगिकियों के आपसी तालमेल और एकीकरण पर आधारित होगा।
विज्ञान नीति के निर्माण की संरचना तथा 2020 की नीति कैसे विशेष है पर संक्षिप्त विचार प्रस्तुत करते हुए प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि आगे बढ़ने एवं विज्ञान द्वारा परिवर्तन लाने के लिए डेटा व ज्ञान को एक साथ आना चाहिए। प्रो. शर्मा ने कहा कि कोविड-19 ने आत्मनिर्भर भारत को आवश्यक बनाया है और आत्मनिर्भर भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी होना चाहिए। यह तभी किया जा सकता है जब बुनियादी, ज्ञान प्रणाली आपस में जुड़ी हों।
एसटीआईपी 2020 सचिवालय के प्रमुख और डीएसटी के सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता ने परामर्श के शुभारंभ पर #STIP2020 ट्रैक I परामर्श प्रक्रिया के बारे में प्रस्तुति दी ताकि नीति साक्ष्य व ज्ञान आधारित; विषयगत तथा समावेशी हो।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय (पीएसए का कार्यालय) और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने नई राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति (एसटीआईपी 2020) के निर्माण के लिए एक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रक्रिया में हितधारकों की एक विस्तृत श्रृंखला को जोड़ा गया है।
एसटीआईपी 2020 निर्माण प्रक्रिया को 4 श्रेणियों (ट्रैक) में आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत नीति निर्माण के लिए बड़ी संख्या में हितधारकों को परामर्श के लिए जोड़ा जायेगा। ट्रैक I में साइंस पॉलिसी फोरम के माध्यम से आम लोगों और विशेषज्ञों की व्यापक परामर्श प्रक्रिया शामिल है। फोरम, नीति निर्माण प्रक्रिया के दौरान और बाद में आम लोगों और विशेषज्ञों से इनपुट प्राप्त करने के लिए एक समर्पित मंच के रूप में कार्य करेगा। ट्रैक II के तहत नीति-निर्माण प्रक्रिया में विशेषज्ञों के विषयगत परामर्श व साक्ष्य-आधारित सिफारिशों को शामिल किया जायेगा। इस उद्देश्य के लिए इक्कीस (21) विषयगत समूहों का गठन किया गया है। ट्रैक III में मंत्रालयों और राज्यों के साथ परामर्श किये जायेंगे, जबकि ट्रैक IV के अंतर्गत शीर्ष स्तर के बहु-हितधारकों के परामर्श प्राप्त किये जायेंगे।
विभिन्न श्रेणियों (ट्रैक) के अंतर्गत परामर्श प्रक्रियाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं और समानांतर रूप से चल रही हैं। ट्रैक II विषयगत समूह (टीजी) परामर्श, सूचना सत्रों की एक श्रृंखला के साथ शुरू हुआ, और ट्रैक -1 को विशेषज्ञों के साथ-साथ आम लोगों से इनपुट प्राप्त करने के लिए लॉन्च किया गया।
पूरी प्रक्रिया के समन्वय के लिए डीएसटी (प्रौद्योगिकी भवन) में एक सचिवालय स्थापित किया गया है जो नीतियों के सम्बन्ध में जानकारी एवं डेटा सहयोग प्रदान करेगा। इसका संचालन डीएसटी-एसटीआई के नीति विशेषज्ञों की एक टीम कर रही है।
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