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जेएनसीएएसआर के वैज्ञानिकों ने मधुमेह रोगियों में इंसुलिन के निरंतर वितरण के लिए इंजेक्शन देने लायक सिल्क फाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल विकसित किया

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) के वैज्ञानिकों ने हाल ही में मधुमेह रोगियों में इंसुलिन वितरण के लिए इंजेक्शन देने लायक सिल्क फ़ाइब्रोइन-आधारित हाइड्रोजेल विकसित किया है। इस आविष्कार के लिए एक पेटेंट आवेदन भी दाखिल किया गया है।

प्रो टी गोविंदराजू और जेएनसीएएसआर की उनके अनुसंधान टीम ने जैव फ़ाइबोमोटोपेबल एडिटिव्स का उपयोग करके सिल्क फाइब्रोइन (एसएफ) सूत्र विकसित किया है और एक ऐसा इंजेक्शन एसएफ हाइड्रोजेल (आईएसएफएच) तैयार किया है जो मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन वितरण को आसान बना सकता है। आईएसएफएच ने चूहों में सक्रिय इंसुलिन के वितरण का सफल प्रदर्शन किया है, और प्रदर्शन के परिणाम एसीएस एप्लाइड बायो मटेरियल पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

जेएनसीएएसआर वैज्ञानिकों ने दिखाया है कि मधुमेह वाले चूहों में त्वचा के नीचे आईएसएफएच युक्त इंसुलिन के इंजेक्शन ने त्वचा के नीचे सक्रिय डिपो का गठन किया, जिसमें से इंसुलिन धीरे-धीरे बाहर निकलता है और 4 दिनों की लम्बी अवधि के लिए शारीरिक ग्लूकोज होमियोस्टेसिस को बहाल रखता है। इसमें रक्त में इंसुलिन की उच्च एकाग्रता के बढ़ने से रक्त शर्करा के अचानक कम होने का कोई जोखिम नहीं होता है।

टीम द्वारा उपयोग किए जाने वाले चिपचिपे  एडिटिव्स ने एसएफ प्रोटीन की गतिशीलता को सीमित कर दिया और तेजी से जेल में परिणत हुआ। माइक्रोस्ट्रक्चर यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं। (इंजेक्शन को मदद करने के लिए) आईएसएफएच की  रंध्र युक्त आकृति ने डायबेटिक चूहों में अपने सक्रिय रूप में मानव पुनःसंयोजक इंसुलिन के एनकैप्सुलेशन (कैप्सूल बनना) में मदद की।

भारत में मधुमेह से 70 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हैं, जो दुनिया में दूसरे स्थान पर है। यह शरीर के भीतर बीटा कोशिकाओं के नुकसान या इंसुलिन प्रतिरोध के कारण इंसुलिन के अपर्याप्त उत्पादन के परिणामस्वरूप होता है, जो ग्लूकोज होमियोस्टेसिस में असंतुलन पैदा करता है और रक्त शर्करा के स्तर में अचानक वृद्धि का कारण बनता है।

उपचार के पारंपरिक और अंतिम उपाय के तहत  शारीरिक ग्लूकोज होमियोस्टेसिस को बनाए रखने के लिए बार-बार त्वचा के नीचे इंसुलिन इंजेक्शन देना शामिल है। त्वचा के नीचे इंसुलिन इंजेक्शन दर्द, स्थानीय ऊतक क्षय, संक्रमण, तंत्रिका क्षति और स्थानीय रूप से केंद्रित इंसुलिन; शारीरिक रूप से ग्लूकोज होमियोस्टेसिस को प्राप्त करने में असमर्थता के लिए जिम्मेदार होते हैं। नियंत्रित और निरंतर इंसुलिन वितरण से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। अपने सक्रिय रूप (गतिविधि की हानि के बिना) में इंसुलिन का एनकैप्सुलेशन और निरंतर वितरण सबसे महत्वपूर्ण है।

आईएसएफएच ने यह सिद्ध किया है कि यह  एक प्रभावी इंसुलिन वितरण उपकरण है। इसने मधुमेह जानवरों  में यांत्रिक शक्ति, जैव अनुकूलता , एनकैप्सुलेशन, भंडारण और सक्रिय इंसुलिन के अपने निरंतर वितरण का  प्रदर्शन किया है। आईएसएफएच द्वारा इंसुलिन के सक्रिय इनकैप्सुलेशन और डिलीवरी से भविष्य में मुंह से दिए जाने वाले इंसुलिन का भी विकास किया जा सकता है। जेएनसीएएसआर टीम को उम्मीद है कि दवा कंपनियां आगे आएंगी और इसे मानव उपयोग के लिए विकसित करेंगी।

वर्तमान अनुसंधान भारत के स्वर्णजयंती फैलोशिप अनुदान और डीएसटी-नैनो मिशन के तहत जेएनसीएएसआर, बेंगलुरु, ब्रिक्स बहुपक्षीय अनुसंधान एवं विकास परियोजना अनुदान और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), सरकार द्वारा वित्त पोषित किया गया था।

प्रकाशन:

बी मैती, एस सामंता, एस सरकार, एस आलम, टी गोविंदराजू

इंजेक्टेबल सिल्क फाइब्रोइन-बेस्ड हाइड्रोजेल फॉर सस्टेन्ड इंसुलिन डिलीवरी इन डायबिटिक रेट्स

जर्नल का नाम: ए सी एस एप्लाइड बायो मटेरियल।

PIB

Khushi Bhargav

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