14वीं स्वच्छ ऊर्जा मंत्रिस्तरीय और 8वीं मिशन इनोवेशन बैठक के दूसरे दिन स्वच्छ ऊर्जा पारेषण के लिए रणनीतियों से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान “वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा परिनियोजन और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा अंतर-संबद्धता में तेजी लाना” शीर्षक से आयोजित सत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए ऊर्जा सेवाओं के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया। सत्र के दौरान, देशों के बीच एक-दूसरे से जुड़े हुए स्वच्छ ऊर्जा नेटवर्क को स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। परस्पर रूप से जुड़ी हुई यह प्रणाली व्यापक स्थिरता और कम लागत का मार्ग प्रशस्त करेगी जिससे तेजी से स्वच्छ ऊर्जा विकास की सुविधा और ऊर्जा पारेषण के माध्यम से शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। परस्पर रूप से जुड़ी ऊर्जा प्रणालियों के अंतर्गत औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विद्युतीकरण की एक प्रमुख रणनीति के रूप में पहचान की गई।
परिवर्तनीय ऊर्जा स्रोतों को प्रबंधित करने और ऊर्जा खपत पैटर्न की पहचान करने में सक्षम जटिल अंतर-संबद्धता प्रणाली की स्थापना में रणनीतिक साझेदारी और सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया। एकीकृत ऊर्जा प्रणालियों के सफल संचालन और लचीलेपन के लिए डिजिटलीकरण, अल्ट्रा-हाई वोल्टेज तकनीक और साइबर सुरक्षा को भी आवश्यक माना गया। एसी और डीसी बुनियादी ढांचे की अंतर-संबद्धता और विशिष्ट घटकों, मॉड्यूल और उप-प्रणाली के विकास को देशों और ग्रिड क्षेत्रों में बेहतर इंटरकनेक्शन के लिए महत्वपूर्ण माना गया, जिससे अनिश्चित परिस्थितियों में आर्थिक विकास, विश्वसनीयता और सुग्राह्यता सुनिश्चित हुई। परिवर्तनशीलता को संभालने और ऊर्जा भंडारण एवं उत्पादन में स्थायी विविधता को बढ़ावा देने के लिए इंटरकनेक्शन के भौगोलिक पदचिह्न का विस्तार करने पर जोर दिया गया, जिससे लागत में कमी का लाभ लिया जा सके।
सीओपी28 यूएई अध्यक्षता और यूएनईपी के नेतृत्व वाले रचनात्मक गठबंधन द्वारा आयोजित इस स्थल कार्यक्रम के माध्यम से न्यायसंगत और समान ऊर्जा पारेषण के लिए स्थायी कूलिंग में तेजी लाने के लिए आवश्यक साधानों पर चर्चा के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और जनहितैषी लोगों को एक साथ एक मंच पर लाया गया। सीओपी 28 यूएई की अध्यक्षता में देशों से ग्लोबल कूलिंग प्रतिबद्धता का समर्थन करने का आह्वान किया गया, जिसका उद्देश्य ऊर्जा दक्षता में सुधार और स्थायी कूलिंग तक पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत, फ्रांस और नॉर्वे ने यह सिद्ध किया कि इस परिवर्तन को वर्तमान में किस प्रकार से हासिल किया जा सकता है। भारत के कूलिंग एक्शन प्लान जैसे उदाहरण किसी भी सरकार की ओर से लाई गई इस तरह की पहली समग्र कूलिंग योजना है।
सत्र के दौरान चर्चा ग्रीन पावर्ड फ्यूचर मिशन (जीपीएफएम) पर केंद्रित थी, जिसका लक्ष्य सामर्थ्य, सुग्राहयता और लचीलेपन को सुनिश्चित करते हुए दुनिया भर में 100 प्रतिशत परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करना है। इन उद्देश्यों में विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली में लचीलापन और एकीकरण के लिए डिजिटलीकरण शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, डेटा साझाकरण और नवाचार के लिए वित्त पोषण इस मिशन की सफलता की कुंजी है। जीपीएफएम टूलबॉक्स स्थिरता के लिए डेटा विनिमय और व्यवहार्य समाधान की सुविधा प्रदान करता है। प्रभावशीलता के लिए महाद्वीपीय सहयोग और डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों की निगरानी महत्वपूर्ण है। जीपीएफएम का लक्ष्य व्यापक सहयोग के माध्यम से त्वरित, प्रभावशाली स्थिरता जैसे दृष्टिकोण हासिल करना है।
भारत सरकार के ऊर्जा दक्षता ब्यूरो महानिदेशक ने विद्युत आपूर्तिकर्ताओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए उपकरण के उपयोग को विनियमित और अनुकूलित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत में 2040 तक उपकरण मांग में आठ गुना वृद्धि होने की आशा है, जिससे बिजली की मांग काफी बढ़ जाएगी। उन्होंने इसके लिए समाधान खोजने और भविष्य में संभावित बिजली संकट से बचने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आग्रह किया।
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