युद्ध वीर जैसलमेर
नई दिल्ली: 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 व 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के 92 वर्षीय पूर्व सेना अधिकारी कैप्टन चुन्नीलाल (सेवानिवृत्त) अब अपने जीवन की “चौथी लड़ाई” लड़ रहे हैं। इस बार उनका मुकाबला सीमा पर नहीं, बल्कि राजस्थान के जैसलमेर में अपनी कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेची गई जमीन को वापस पाने के लिए है। परिवार का आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर जमीन का सौदा कर दिया गया।
कैप्टन चुन्नीलाल को पोंग डैम पुनर्वास योजना के तहत जैसलमेर के मोहनगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि आवंटित की गई थी। परिवार का आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज और एक कथित हमशक्ल व्यक्ति का इस्तेमाल कर जमीन को गिरवी रखकर बाद में बेच दिया। इस कथित सौदे की जानकारी उन्हें काफी समय बाद मिली।
कैप्टन चुन्नीलाल के बेटे का कहना है कि उनके पिता ने देश के लिए तीन युद्ध लड़े, लेकिन अब उन्हें अपनी ही जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों और पुलिस के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि कई जगह शिकायत करने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हुई।
और पढ़ें : Join Indian Army 2026: भर्ती, योग्यता और आवेदन प्रक्रिया https://vikral.com/join-indian-army-2026-application-eligibility-selection-process/ मामले की शिकायत के बाद जैसलमेर कोतवाली पुलिस में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। यदि जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस और राजस्व विभाग मामले की जांच में जुटे हैं। परिवार ने सरकार से जल्द न्याय दिलाने और जमीन वापस दिलाने की मांग की है। मामले की आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
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