एक ब्रिटिश कंसल्टेंसी फर्म सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च ने कहा है कि उच्च मुद्रास्फीति की वजह से ब्याज दरों में होने वाली वृद्धि के परिणामस्वरूप वैश्विक अर्थव्यवस्था को 2023 में मंदी का सामना करना पड़ेगा। संस्थान ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2022 में पहली बार 100 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गई, लेकिन 2023 में बढती हुई कीमतों के कारण इसमें गिरावट आएगी। रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक आर्थिक लागत के बावजूद 2023 में अपने रुख पर कायम रहेंगे। इसमें कहा गया है कि मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखने के प्रयासों से विकास दर प्रभावित होगी।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवीनतम पूर्वानुमान की तुलना में ये निष्कर्ष और अधिक निराशाजनक हैं।
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