केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत में वस्त्र उद्योग के अग्रणी लोगों के साथ संवाद करते हुए कहा, “हमें जल्द से जल्द भारत के वस्त्र निर्यात को तीन गुना करते हुए वर्तमान 33 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर काम करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर हस्तशिल्प सहित कपड़े और परिधान के लिए 2021-22 में 44 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लेना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनका वस्त्र मंत्रालय निर्यातकों के लिए प्रोत्साहनों के पुराने बकाये के मुद्दे के समाधान के लिए एमओएफ के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग की सभी आवश्यकताओं पर विचार करने के लिए हमेशा से तैयार है। उन्होंने कहा कि वे उद्योग ज्यादा फलते-फूलते हैं, जो उद्योग सब्सिडी पर निर्भर नहीं है।
पीयूष गोयल ने कहा कि वस्त्रों के लिए पीएलआई योजना और मित्र पार्क्स योजना मंजूरी के अग्रिम चरण में है। उन्होंने कहा कि हमेशा अच्छे लगने वाले फैब्रिक्स बनाने के लिए भारतीय कपड़ा उद्योग और हमारे बुनकर सदियों पुराने ज्ञान, शिल्प और तकनीक का उपयोग करते रहे हैं। इनमें कलाकारी और जटिलता का स्तर बेजोड़ है। अगर ये हमारे ‘वस्त्र निर्यातक’ नहीं होते तो दुनिया इन उत्पादों का अनुभव कभी नहीं ले पाती।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत ने दुनिया के भरोसेमंद भागीदारों के साथ की गईं अपनी सभी अंतर्राष्ट्रीय सेवा प्रतिबद्धताओं को पूरा किया है। उन्होंने कहा, देखने की बात है कि 2021-22 की पहली तिमाही में भारत के जीडीपी में आर्थिक सुधार से मजबूती के संकेत दिख रहे हैं। 2021-22 की पहली तिमाही में एक साल पहले की समान तिमाही की तुलना में भारत की जीडीपी 20.1 प्रतिशत बढ़ी है और एफडीआई प्रवाह में 90 प्रतिशत बढ़ोतरी देखने को मिली है। अगस्त, 2021 में वाणिज्यिक निर्यात 33 बिलियन डॉलर रहा, जो 2020-21 की तुलना में 45 प्रतिशत और 2019-20 की तुलना में 27.5 प्रतिशत ज्यादा रहा और अप्रैल-अगस्त, 2021 के दौरान वाणिज्यिक निर्यात 164 बिलियन डॉलर रहा, जो 2020-21 की तुलना में 67 प्रतिशत और 2019-20 की तुलना 23 प्रतिशत ज्यादा रहा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें वस्त्र उद्योग की उपलब्धियों पर गर्व है। पीयूष गोयल ने कहा कि आज, हमें हस्तशिल्प सहित कपड़ों और परिधान के लिए 2021-22 में 44 बिलियन डॉलर का निर्यात का लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लेना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब हम मामूली सुधार से संतुष्ट नहीं हो सकते, यह लंबी छलांग का समय है।
पीयूष गोयल ने उद्योग से जल्द से जल्द निर्यात मूल्य को वर्तमान 33 बिलियन डॉलर (यानी वस्त्र निर्यात 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा करने) से तीन गुना बढ़ाने और घरेलू उत्पादन 250 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने के लक्ष्य पर काम करने का आह्वान किया। पीयूष गोयल ने कहा कि निर्यातकों को प्रयास, विशेषज्ञता और दक्षता के साथ राष्ट्र की उम्मीदों पर खरा उतरना चाहिए। उन्हें नए बाजारों की खोज और दूसरों के साथ मार्केट इंटेलिजेंस/ मांग से जुड़ी जानकारी भी साझा करनी चाहिए।
पीयूष गोयल ने कहा कि अग्रणी उद्योगपतियों से छोटे निर्यातकों को सहयोग करने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए कहा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार और निर्यातक भारत के विकास की कहानी में भागीदार हैं और सरकार का लक्ष्य हमारी प्रतिस्पर्धी और तुलनात्मक बढ़त हासिल करने के लिए एक अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। इनमें कानूनों का सरलीकरण, अनुपालन का बोझ कम करना, आरओएसटीसीएल और आरओडीटीईपी अधिसूचित करना आदि शामिल है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय फाइबर गुणवत्ता वाले भारतीय ब्रांड “कस्तूरी कॉटन” के लॉन्च के साथ वस्त्र उद्योग के सामने कारोबार में विस्तार के नए अवसर खुल गए हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि वह एफटीए/पीटीए (यूके, ईयू, ऑस्ट्रेलिया आदि) में तेजी लाने के लिए विभिन्न देशों के साथ व्यक्तिगत रूप से संवाद कर रहे हैं। इससे एक भरोसेमंद उपभोक्ता आधार तैयार करने के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र में ‘लोकल गोज ग्लोबल- मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड’ के उद्देश्य को साकार करने के लिए ताकत, भरोसा और क्षमता है।
इस अवसर पर, वस्त्र और रेलवे राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने कहा कि भारतीय वस्त्र और परिधान उद्योगों को अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वस्त्र क्षेत्र महिलाओं को सशक्त करता है, क्योंकि अधिकांश महिलाएं इस क्षेत्र में लगी हुई हैं और अपनी आजीविका अर्जित कर रही हैं।
वस्त्र सचिव यू. पी. सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि सरकार और निर्यातक भारत की विकास गाथा में भागीदार हैं और मंत्रालय ने वैश्विक वस्त्र बाजार में भारत के गौरव का बहाल करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और क्लस्टर विकास, तकनीक वस्त्र मिशन, प्रदर्शन से जुड़े प्रोत्साहन और निर्यात पर शून्य कर नीति के द्वारा एक समग्र विकास मॉडल अपनाया है।
विनिर्माण को प्रोत्साहन और निर्यात बढ़ाने के उपायों पर विचार विमर्श के लिए आयोजित संवाद में प्रमुख कपड़ा निर्यातकों और अग्रणी उद्योगपतियों ने भाग लिया।
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