पुनर्वसित बंगाली समाज के नमःशुद्र, पौंड्र व राजवंशी उपजाति को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में आयोग ने अध्यक्ष (कार्य प्रभारित) अरूण हालदार के निर्देशानुसार संबंधित राज्यों को जांच के आदेश दिए हैं और रिपोर्ट मांगी है।
निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति का दस राज्यों का प्रतिनिमंडल आयोग मुख्यालय में अध्यक्ष (कार्य प्रभारित) अरूण हालदार से मिला। अध्यक्ष (कार्य प्रभारित) को समिति ने पूरी जानकारी दी कि अनुसूचित जाति का दर्जा न मिलने के कारण इस समाज के लोगों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा, जिसके कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस संबंध में अध्यक्ष (कार्य प्रभारित) अरूण हालदार ने कहा कि, साल 1947 में पूर्वी पाकिस्तान से आए लोगों को साल 1960 से भारत सरकार द्वारा 18 राज्यों में पुनर्वास किया गया था। इनमें से 8 राज्यों में बंगाली समाज के नमःशुद्र, पौंड्र व राजवंशी उपजातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा मिला लेकिन दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड व कर्नाटक में इन्हें आज तक अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिल सका है।
अध्यक्ष (कार्य प्रभारित) ने कहा कि ये सभी पुनर्वसित लोग अपने हक की लड़ाई लंबे समय से लड़ रहे हैं। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए संबंधित राज्य सरकारों को जांच कर आयोग के समक्ष रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि आयोग, केंद्र सरकार से बात कर जल्दी से जल्दी अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने का प्रयास करेगा।
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