केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने “इंडस्ट्री कनेक्ट 2022; उद्योग और शैक्षणिक समुदाय तालमेल” सेमिनार का (रसायन और उर्वरक और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री) भगवंत खुबा की उपस्थिति में उद्घाटन किया। इस अवसर पर आरती आहूजा, सचिव (रसायन और पेट्रोकेमिकल); डॉ. शिशिर सिन्हा, महानिदेशक, सिपेट; काशी नाथ झा, संयुक्त सचिव रसायन एवं पेट्रो-रसायन विभाग तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड-19 महामारी का प्रभावी रूप से प्रबंधन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिक और चिकित्सा समुदाय को हर संभव सहायता प्रदान की, जिससे भारत वैक्सीन अनुसंधान में अन्य उन्नत देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने में समर्थ हुआ।
उन्होंने राष्ट्र की प्रगति के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी के महत्व पर जोर देते हुए उद्योग शैक्षणिक समुदाय की व्यापक भागीदारी का आह्वान किया जिससे अनुसंधान, नवाचार और शिक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. मनसुख मंडाविया ने यह भी कहा कि नवाचार और गुणवत्ता युक्त उत्पादों के निर्माण से प्रधानमंत्री मोदी के मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड के विजन को साकार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय उत्पाद दूर-दूर तक जाकर आत्मनिर्भर भारत और भारत की आर्थिक समृद्धि में योगदान देंगे। डॉ. मनसुख मंडाविया ने अपना विश्वास व्यक्त किया कि सेमिनार में इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक रोडमैप तैयार करने के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए भगवंत खुबा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आत्मनिर्भर भारत का विजन न केवल आत्मनिर्भर होने के बारे में बल्कि वैश्विक समुदाय की अपेक्षाओं को पूरा करने के बारे में भी है। उन्होंने यह भी कहा कि रासायनिक और पेट्रोरसायन उद्योग भी न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में, बल्कि निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक मांग को पूरा करके इस विजन में अपना योगदान करने के लिए विशिष्ट रूप से तैयार है और सिपेट को इस बारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।
आरती आहूजा ने कहा कि इस क्षेत्र में बहुत से स्टार्ट-अप को तकनीकी सहायता की आवश्यकता है और सिपेट उनकी सहायता कर सकता है। उद्योग को इस क्षेत्र के लिए बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सिपेट के साथ और जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगे विकास की अपार संभावनाएं हैं और अब नवाचार का समय है क्योंकि दुनिया व्यवधानों के साथ बदल रही है और हमें इन्हें अपने लाभ में बदलने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
फिक्की पेट्रोकेमिकल्स कमेटी के अध्यक्ष और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड के एमडी और सीईओ प्रभा दास ने कहा कि हमें अधिक डिजिटलीकरण होने और आगे रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस पर ध्यान केंद्रित करने से निश्चित रूप से कंपनियों में दक्षता और उत्पादकता बढ़ेगी।
राजेश कुमार पाठक, सचिव, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने उद्योग से आयात प्रतिस्थापन के लिए पहल करने का आग्रह किया और प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड उन्हें बढ़ावा देगा। उन्होंने वित्त पोषण सहायता सहित उद्योग को हर संभव मदद देने का भी आश्वासन दिया।
प्रोफेसर (डॉ) शिशिर सिन्हा, महानिदेशक सिपेट ने सिपेट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इंडस्ट्री कनेक्ट 2022 आयोजन के पीछे सिपेट और उद्योग के बीच तालमेल स्थापित करने की मंशा है। उन्होंने उद्योग के लिए सिपेट में उपलब्ध कौशल और तकनीकी सहायता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सीपीएमए के अध्यक्ष कमल नानावती ने इस क्षेत्र में कौशल अंतर को पाटने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भविष्य और नए प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग में कुशल मानव शक्ति की जरूरत के सृजन, टिकाऊ उत्पाद और नवाचार डिजाइनिंग, भविष्य के लिए प्रौद्योगिकी संभावनाएं तथा और नए विकास चालक/उप चालक/उत्प्रेरक के लिए उद्योग 4.0 को भी प्रस्तुत किया।
काशी नाथ झा, संयुक्त सचिव (पेट्रोकेमिकल्स), रसायन और पेट्रोरसायन विभाग, भारत सरकार ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि भारत उद्योग के लिए तैयार कुशल कार्यबल के क्षेत्र में विशेष रूप से पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में विश्व दिग्गज बन सकता है जिसके लिए सिपेट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय, भारत सरकार के रसायन और पेट्रोरसायन विभाग ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) तथा फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के साथ मिलकर “इंडस्ट्री कनेक्ट 2022; उद्योग और शैक्षणिक समुदाय तालमेल” सेमिनार का आयोजन किया।
सेमिनार के दौरान, “इंडस्ट्री कनेक्ट 2022”, दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इन तकनीकी सत्रों में इस क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए सिपेट, टीडीबी (प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड) और विभिन्न उद्योग संघों के अधिकारियों की उपस्थिति देखी गई।
इस सेमिनार का प्रमुख उद्देश्य उद्योग के लिए अनुसंधान एवं विकास- प्रयोगशाला से उद्योग, पेट्रोकेमिकल्स क्षेत्र में मानव पूंजी के लिए कौशल अंतर विश्लेषण, स्वदेशी प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर भारत का समर्थन करना, उद्योग कनेक्ट की सहायता से आत्मानिर्भर सिपेट, उद्योग और शैक्षणिक समुदाय के बीच समावेश की स्थापना द्वारा टीडीबी की सहायता से इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी सहायता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित करना है।
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