सरकार ने राज्यों द्वारा वितरण कंपनियों को लेखांकन, रिपोर्टिंग, बिलिंग और सब्सिडी भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए हैं। सुधार की यह प्रक्रिया ऐसे समय आई है जब इस क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए एक ढांचे की आवश्यकता महसूस हो रही है और वास्तव में अनुचित और गैर-पारदर्शी लेखांकन के साथ-साथ राज्यों द्वारा घोषित सब्सिडी का भुगतान न होना या विलंबित भुगतान होना भी डिस्कॉम के वित्तीय संकट के कारणों में से एक प्रमुख कारण है। विद्युत मंत्रालय ने 26 जुलाई 2023 को नियम अधिसूचित किए हैं।
नियमों में कहा गया है कि वितरण लाइसेंसधारी द्वारा संबंधित तिमाही की समाप्ति की तिथि से तीस दिनों के भीतर एक त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और राज्य आयोग इस रिपोर्ट की जांच करेगा। त्रैमासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के तीस दिनों के भीतर इसे जारी करेगा। रिपोर्ट में अन्य बातों के साथ-साथ सब्सिडी प्राप्त श्रेणियों द्वारा खपत की गई ऊर्जा के कारणों के आधार पर सब्सिडी की मांग को बढ़ाने के संबंध में उठाए गए कदम, राज्य सरकार द्वारा घोषित इन श्रेणियों को देय सब्सिडी और अधिनियम की धारा 65 के अनुसार सब्सिडी का वास्तविक भुगतान को शामिल किया जाएगा।
यह प्रावधान किया गया है कि यदि सब्सिडी का लेखांकन और सब्सिडी के लिए बिल जारी करना अधिनियम या नियम या विनियम के अनुसार नहीं पाया जाता है, तो राज्य आयोग नियमों का अनुपालन न करने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई करेगा।
स्थिरता के ढांचे के अंतर्गत, समग्र तकनीकी और वाणिज्यिक (एटी एंड सी) हानि के सटीक व उचित लक्ष्य को परिभाषित करने हेतु, यह निर्धारित किया गया है कि एटी एंड सी हानि में कमी की स्थिति को टैरिफ निर्धारण के लिए राज्य आयोगों द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। साथ ही, किसी राष्ट्रीय योजना या कार्यक्रम के अंतर्गत यह स्थिति संबंधित राज्य सरकारों द्वारा स्वीकृत की जाएगी और केन्द्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त होगी। तदनुसार वितरण लाइसेंसधारी के लिए संग्रह और बिलिंग दक्षता की स्थिति का निर्धारण राज्य आयोग द्वारा किया जाएगा।
विद्युत वितरण में वितरण लाइसेंसधारी द्वारा की गई पूरी लागत की वसूली सुनिश्चित करने के लिए, यह निर्धारित किया गया है कि टैरिफ को मंजूरी देते समय पारदर्शी तरीके से की गई विद्युत खरीद की संपूर्ण लागतों को ध्यान में रखा जाएगा। इसी प्रकार, वितरण प्रणाली के विकास और रख-रखाव के लिए परिसंपत्तियों के निर्माण हेतु वितरण लाइसेंसधारक द्वारा की गई संपूर्ण लागत का हिसाब निर्धारित शर्तों के अनुसार किया जाएगा।
यह भी प्रावधान किया गया है कि अनुमोदित एटी एंड सी हानि में कमी की स्थिति से अंतर के कारण वितरण लाइसेंसधारी को होने वाले लाभ या हानि को वितरण लाइसेंसधारी और उपभोक्ताओं के बीच साझा किया जाएगा।
वितरण प्रणाली के संचालन और रखरखाव के लिए मानदंड स्थापित करने के लिए, केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण को दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया गया है।
इक्विटी पर उचित रिटर्न (आरओई) इस क्षेत्र में निवेश सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक एक प्रमुख कारक है। नियम में प्रावधान है कि राज्य आयोग द्वारा आरओई को संबंधित अवधि के लिए उसके टैरिफ विनियमों में सीईआरसी द्वारा निर्दिष्ट आरओई के साथ संरेखित किया जाएगा, जिसमें वितरण व्यवसाय में शामिल जोखिमों को ध्यान में रखते हुए उचित संशोधन किया जाएगा।
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