प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। केंद्रीय ग्रामीण विकास व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की नियमित समीक्षा कर रहे हैं, साथ ही उन्होंने काम में गति लाने के लिए अधिकारियों को दिशा-निर्देश देते हुए अकेले महीनेभर (मार्च 2025) में ही 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंजूरी प्रदान की है। इस राशि से 602 किलोमीटर लंबाई में 115 सड़कें बनेंगी, वहीं, 186 पुलों के निर्माण को भी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वीकृति दी है।
पीएमजीएसवाई-III के अंतर्गत मार्च 2025 के दौरान, 1,301.02 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के मूल्य पर 115 सड़कें (602.88 कि.मी.) और 186 पुल स्वीकृत किए गए हैं जिनमें आंध्र प्रदेश में 8 सड़कें (60.42 किमी) और 3 पुल, अरूणाचल प्रदेश में 1 सड़क (7.87 किमी) और 1 पुल, बिहार में 5 सड़कें (33.65 किमी) और 103 पुल, हिमाचल प्रदेश में 21 पुल), मणिपुर में 41 सड़कें (280.97 किमी), मध्य प्रदेश में 6 पुल, मिजोरम में 7 पुल, पुडुचेरी में 41 सड़कें (107.837 कि.मी.), पंजाब में 4 सड़कें (31.07 किमी) और 35 पुल, तमिलनाडु में 12 सड़कें (59.24 कि.मी.), उत्तर प्रदेश में 3 सड़कें (21.90 किमी) और 1 पुल तथा उत्तराखंड में 9 पुल शामिल हैं।
इसी तरह, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री जनमन योजना (PMJANMAN) के अंतर्गत मार्च 2025 में 647.50 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के मूल्य पर 428 सड़कें (886.61 कि.मी.) और 2 पुल स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें म.प्र. की 377 सड़कें (738.99 कि.मी.), ओडिशा की 26 सड़कें (63.27 कि.मी.) व 2 पुल एवं त्रिपुरा की 25 सड़कें (84.35 कि.मी.) शामिल हैं। इस अवधि में 3,410 कि.मी. लंबाई की 343 सड़कों व 154 पुलों का निर्माण योजना अंतर्गत राज्यों द्वारा पूरा किया गया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के निर्देशानुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 4,851 करोड़ का केंद्रांश विभिन्न राज्यों को इस अवधि में जारी किया जिससे मंत्रालय द्वारा स्वीकृत सड़कों का त्वरित निर्माण किया जा सके। इसमें आंध्रप्रदेश को 338 करोड़ रु., अरूणाचल प्रदेश को 200 करोड़ रु., बिहार को 157 करोड़ रु., छत्तीसगढ़ को 225 करोड़ रु., गुजरात को 73 करोड़ रु., हिमाचल प्रदेश को 309 करोड़ रु., जम्मू-कश्मीर को 342.75 करोड़ रु., झारखंड को 463 करोड़ रु., कर्नाटक को 50 करोड़ रु., लद्दाख को 37 करोड़ रु., मध्य प्रदेश को 165 करोड़ रु., महाराष्ट्र को 391 करोड़ रु., मेघालय को 97 करोड़ रु., मिज़ोरम को 87 करोड़ रु., ओड़िशा को 233 करोड़ रु., पुडुचेरी को 25 करोड़ रु. को, राजस्थान को 89 करोड़ रु., तमिलनाडु को 378 करोड़ रु., तेलंगाना को 118 करोड़ रु., त्रिपुरा को 147 करोड़ रु., उत्तर प्रदेश को 500 करोड़ रु., उत्तराखंड को 294 करोड़ रु., पश्चिम बंगाल को 110 करोड़ रु. का केंद्रांश शामिल है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कुछ पूर्व निर्धारित मापदंडों के आधार पर पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों सहित अन्य राज्यों में 2024-25 के दौरान पीएमजीएसवाई के कार्यान्वयन के प्रदर्शन का आंकलन करने के बाद, सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को 870 करोड़ रु. की प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसमें आंध्र प्रदेश को 34 करोड़ रु., अरुणाचल को 59 करोड़ रु., बिहार को 138 करोड़ रु., हरियाणा को 27 करोड़ रु., कर्नाटक को 37 करोड़ रु., लद्दाख को 3 करोड़ रु., म.प्र. को 177 करोड़ रु. और तमिलनाडु को 61 करोड़ रु. दिए गए हैं। साथ ही, असम को 112 करोड़ रु., राजस्थान को 130 करोड़ रु. एवं छत्तीसगढ़ को 92 करोड़ रु. दिए गए है। इस प्रोत्साहन राशि का उपयोग राज्य, पीएमजीएसवाई में निर्मित सड़कों, जिनकी 5 वर्ष की नियमित रखरखाव अवधि समाप्त हो गई है तथा सड़क के नवीनीकरण लेयर की आवश्यकता पर उपयोग कर सकते है ताकि उनके जीवन को बढ़ाया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि सड़क लंबी अवधि के लिए जनता की सेवा करने के लिए अच्छी स्थिति में बनी रहे।
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