29 क्षेत्रों में सेवाओं की सुपुर्दगी हेतु एक आदर्श पंचायत नागरिक घोषणा पत्र/रूपरेखा, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआर डीपीआर) के सहयोग से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के साथ यथा निरूपित कार्यों को केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से पंचायतों द्वारा अपनाए जाने एवं इनके अनुकूल कार्य करने के लिए जारी किया गया।
यह नागरिक घोषणा पत्र सेवाओं डिजाइनिंग एवं सुपुर्दगी करते हुए स्थाई विकास हेतु सार्वजनिक सेवाओं की पारदर्शी एवं प्रभावी सुपुर्दगी सुनिश्चित करेगा और विभिन्न मतों को सम्मिलित करके नागरिक सेवा अनुभवों, गहरे समावेशी एवं स्थानीय सरकारों की जवाबदेही को बढ़ाएगा।
इस अवसर पर, केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर देते हुए कि पंचायतों को लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए हैं, जमीनी स्तर पर कोविड-19 की अप्रत्याशित महामारी की रोकथाम एवं प्रबंधन में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में बताया। नागरिक घोषणापत्र को बनाने का उद्देश्य लोगों को सेवाएं समयबद्ध तरीके से प्रदान करना, उनकी शिकायतों का निपटान करना और उनके जीवन में सुधार लाना है। यह घोषणापत्र जहां एक ओर नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करेगा और दूसरी और पंचायतों एवं उनके चुने हुए प्रतिनिधियों को लोगों के प्रति सीधे जवाबदेह बनाएगा। यह आशा की जाती है कि पंचायतें इस फ्रेमवर्क का उपयोग नागरिक घोषणा पत्र बनाने में करेंगी और दिनांक 15 अगस्त, 2021 तक इसे ग्राम सभा के संकल्प के माध्यम से अंगिकार करेगी। राज्यों से तद्नुसार समयबद्ध कार्य योजना तैयार करने का अनुरोध किया गया ।
सचिव, पंचायती राज मंत्रालय ने संक्षेप में बताया कि ग्राम पंचायत नागरिक घोषणापत्र का मूल उद्देश्य बिना किसी पक्षपात के और नागरिकों की आकांक्षाओं के अनुसार नागिरकों को सार्वजनिक सेवाओं के संबंध में सशक्त बनाना और उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है। यह आशा है कि पंचायतें इस रूपरेखा का उपयोग करते हुए और ग्राम सभा के यथोचित अनुमोदन से एक नागरिक घोषणापत्र बनाएंगी जिसमें पंचायत द्वारा नागिरकों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की विभिन्न श्रेणियों, ऐसी सेवाओं के लिए शर्तों और ऐसी सेवाओं की समय-सीमा का विस्तृत ब्यौरा होगा।
इस कार्यक्रम में सभी राज्यों / केन्द्रशासित प्रदेशों – राजस्थान के मुख्यमंत्री, असम, बिहार, हरियाणा, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, सिक्किम, तमिल नाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के पंचायती राज विभाग के मंत्रियों, पंचायती राज सचिवों एवं राज्य के अधिकारियों और अन्य मंत्रालयों अर्थात् ग्रामीण विकास मंत्रालय,पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्चुअल रूप से भाग लिया।
पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार का तीसरा स्तर है और भारतीय जनता के 60 प्रतिशत से अधिक के लिए सरकार के साथ सम्पर्क का प्रथम स्तर है। पंचायतें भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 जी में यथा विहित बुनियादी सेवाओं विशेषकर स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, शिक्षा, पोषण, पेयजल की सुपुर्दगी के लिए उत्तरदायी हैं।
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