केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 15 मई, 2023 को तेलंगाना में हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (एनआईपीएचएम) में एकीकृत जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला का शुभारंभ किया।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्रयोगशाला का उद्घाटन करने के बाद वहां उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभिन्न फसलों में कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग के प्रतिकूल प्रभावों को दूर करने के साथ-साथ ही खेती की लागत को कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कीटों के लिए जैव नियंत्रण का उपयोग करना बहुत जरूरी है। नरेंद्र सिंह तोमर ने इस आवश्यकता का भी उल्लेख किया कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को उन किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए, जिनकी इन मामलों में जानकारी तक बहुत कम पहुंच होती है, ताकि वे इन तकनीकों के लाभों के बारे में समझ सकें और उपयोग के संबंध में आश्वस्त हो सकें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की ब्रांड छवि को बनाए रखने का ध्यान रखना होगा और विदेशी बाजारों में निर्यात होने वाली जैविक रूप से उत्पादित कृषि वस्तुओं में कोई कीटनाशक अवशेष नहीं होना चाहिए। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने नए एकीकृत जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला भवन के लिए एनआईपीएचएम के सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को बधाई दी और आशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे किसानों तक प्रौद्योगिकी पहुंचाने के लिए स्वयं को पुनः समर्पित करेंगे।
इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू) में सचिव आईएएस मनोज आहूजा, तेलंगाना सरकार में कृषि मंत्रालय के सचिव आईएएस रघुनंदन राव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में अपर सचिव आईएएस डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा, एनआईपीएचएम के महानिदेशक डॉ. सागर हनुमान सिंह तथा केंद्र व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और आईसीएआर संस्थान के प्रशिक्षु अधिकारी एवं विद्यार्थी भी उपस्थित थे।
नवीन एकीकृत जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला (बीसी लैब) एनआईपीएचएम में स्थापित की गई एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला है, जिसमें जैव कीटनाशकों और जैव नियंत्रण एजेंटों के लिए उत्पादन पद्धतियों पर अनुभव प्रदान करने की सुविधा है। इनमें प्रेडटर्स और पैरासाइटोइड्स, एंटोमोपैथोजेनिक कवक, जैव उर्वरक, एनपीवी, फेरोमोन और वनस्पतियां शामिल हैं। जैव-नियंत्रण एजेंटों, जैव-कीटनाशकों एवं जैव-उर्वरकों का उपयोग रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद करेगा, जिसके फलस्वरूप पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकेगा और इससे मिट्टी एवं पौधों के स्वास्थ्य में सुधार की गतिविधियां संचालित करने में सहायता मिलेगी। नवीन एकीकृत जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला में एक कीट संग्रहालय, खरपतवार संग्रहालय, प्रदर्शनी हॉल, प्राकृतिक कृषि प्रकोष्ठ आदि भी होंगे, जहां पर कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण कीटों एवं खरपतवारों के नमूनों को सर्वोत्तम तरीके से संरक्षित या जीवित रूपों में प्रदर्शित किया जाएगा।
नवीन एकीकृत जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है और इन प्रयोगशालाओं में उच्च कोटि के योग्य संकाय सदस्यों के साथ कर्मचारी तैनात हैं। एनआईपीएचएम विभिन्न जैविक एजेंटों, जैव-कीटनाशकों और जैव-उर्वरकों के बढ़ते उपयोग के साथ कीट प्रबंधन के लिए कृषि पारिस्थितिकी तंत्र विश्लेषण (एईएसए) तथा पारिस्थितिक इंजीनियरिंग (ईई) जैसी टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है।एनआईपीएचएम विभिन्न फसलों में कीट और रोग प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विभिन्न राज्यों में कार्यरत अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालयों, केवीके, आईसीएआर संस्थानों के वैज्ञानिक/शिक्षाविद, छात्र, किसान, डीपीपीक्यूएंडएस तथा निजी संगठन शामिल होते हैं।
इससे पहले, नरेंद्र सिंह तोमर के साथ तेलंगाना के कृषि मंत्री सिंगरेड्डी निरंजन रेड्डी, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में सचिव मनोज आहूजा, तेलंगाना सरकार में कृषि मंत्रालय के सचिव रघुनंदन राव, साइबराबाद पुलिस आयुक्त स्टीफन रवींद्र और भारत सरकार तथा तेलंगाना सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने 15 मई, 2023 को नोवोटेल हैदराबाद में आगामी जी20 कृषि मंत्रियों की बैठक की तैयारियों समीक्षा की।
एनआईपीएचएम द्वारा प्रदान किए जाने वाले कई क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यक्रम इस प्रकार से हैं: वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पीजीडीपीएचएम), जैविक खेती में वनस्पति स्वास्थ्य प्रबंधन पर सर्टिफिकेट कोर्स, विभिन्न फसलों के लिए अच्छी कृषि पद्धतियां (जीएपी), वनस्पति परजीवी नेमाटोड का क्षेत्रीय निदान एवं प्रबंधन, जैव-इनपुट का ऑन-फार्म उत्पादन, उत्पादन बायोफर्टिलाइजर्स और बायोपेस्टीसाइड्स के लिए प्रोटोकॉल, प्रीडेटर्स व पैरासाइटोइड्स (कीटों के प्राकृतिक दुश्मन) के लिए उत्पादन प्रोटोकॉल, एंटोमोपैथोजेनिक नेमाटोड्स का उत्पादन प्रोटोकॉल, टिड्डी कीट प्रबंधन, खरपतवार प्रबंधन में अग्रिम, माइक्रोबियल जैव कीटनाशकों का गुणवत्ता नियंत्रण कार्यक्रम आदि।
एकीकृत जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला जैसी सुविधा की शुरुआत होना भारत में रसायन मुक्त टिकाऊ कृषि के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सुविधा एक्सटेंशन अधिकारियों को कृषि एवं बागवानी की फसलों में कीट प्रबंधन के गैर-रासायनिक विकल्पों को बढ़ावा देने में मदद करेगी। प्रशिक्षित अधिकारी स्थायी कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा कीट प्रबंधन के लिए पर्यावरण के अनुकूल कार्य प्रणालियों के उपयोग को बढ़ावा देने हेतु संबंधित क्षेत्रों में किसानों को प्रशिक्षित करेंगे। यह सुविधा देश में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में कृषि अधिकारियों, एक्सटेंशन अधिकारियों तथा किसानों के ज्ञान व कौशल को बढ़ाने में भी मदद करेगी।
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