प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जलियांवाला बाग स्मारक के पुनर्निर्मित परिसर को राष्ट्र को समर्पित किया। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जलियांवाला बाग की पवित्र मिट्टी को मेरा अनेक-अनेक प्रणाम। वो मासूम बालक-बालिकाएं, वो बहनें, वो भाई, जिनके सपने आज भी जलियांवाला बाग की दीवारों में अंकित गोलियों के निशान में दिखते हैं। वो शहीद कुआं, जहां अनगिनत माताओं-बहनों की ममता छीन ली गई, उनका जीवन छीन लिया गया। उनके संपनों को रौंदा गया। उन सभी को आज हम याद कर रहे हैं।
जलियांवाला बाग वो स्थान है जिसने सरदार उधम सिंह, सरदार भगत सिंह जैसे अनगिनत क्रांतिवीरों, बलिदानियों, सेनानियों को हिंदुस्तान की आज़ादी के लिए मर-मिटने का हौसला दिया। जलियांवाला बाग जैसी ही एक और विभीषिका हमने भारत विभाजन के समय भी देखी। पंजाब के परिश्रमी और जिंदादिल लोग तो विभाजन के बहुत बड़े भुक्तभोगी रहे हैं। विभाजन के समय जो कुछ भी हुआ, उसकी पीड़ा आज भी हिंदुस्तान के हर कोने में और विशेषकर पंजाब के परिवारों में हम अनुभव करते हैं।
किसी भी देश के लिए अपने अतीत की ऐसी विभीषिकाओं को नजरअंदाज़ करना सही नहीं है। इसलिए भारत ने 14 अगस्त को हर साल ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का फ़ैसला किया है। ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ आने वाली पीढ़ियों को भी याद दिलाएगी कि कितनी बड़ी कीमत चुकाकर हमें स्वतंत्रता मिली है। वो उस दर्द और तकलीफ़ को भी समझ सकेंगे जो विभाजन के समय करोड़ों भारतीयों ने सही थी।
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