एससीओ के सदस्य देशों के प्रमुखों की परिषद की 21वीं बैठक आज शाम वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉक्टर एस. जयशंकर ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में, एससीओ क्षेत्र के साथ भारत के मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया। डॉक्टर जयशंकर ने खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, व्यापार और संस्कृति के क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहरायी। उन्होंने 20 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक मिशन ‘लाइफ’ के शुभारंभ और खाद्य तथा ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसकी प्रासंगिकता के बारे में बताया।
विदेश मंत्री ने जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में भारत की प्रतिबद्धता और इस दिशा में उसकी उपलब्धियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने महामारी के बाद आर्थिक मोर्चे पर बहाली की भारत की उपलब्धि का उल्लेख भी किया। डॉक्टर जयशंकर ने उचित बाजार पहुंच के आधार पर भारत-एससीओ व्यापार के विस्तार में भी रुचि व्यक्त की। बैठक के समापन पर एक संयुक्त विज्ञप्ति और अन्य निर्णयों को को मंजूरी दी गई। बैठक में एससीओ सदस्य देशों, पर्यवेक्षक राज्यों, एससीओ के महासचिव, एससीओ क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी संरचना के कार्यकारी निदेशक, तुर्कमेनिस्तान और अन्य आमंत्रित अतिथि शामिल हुए।
संगठन के सदस्य देशों के प्रमुखों की परिषद की बैठक के बाद जारी संयुक्त विज्ञप्ति में प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देशों को ऐसे तरीकों का पालन करना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास की समस्याओं को हल करने के लिए टकराव के दृष्टिकोणों से बचाते हैं। शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुलवाद के सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त सिद्धांतों के आधार पर अधिक प्रतिनिधित्व वाली लोकतांत्रिक, न्यायसंगत और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के गठन के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
संगठन के सदस्य देशों के प्रमुखों की परिषद की बैठक के बाद जारी संयुक्त विज्ञप्ति में प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने इस बात पर जोर दिया कि सदस्य देशों को ऐसे तरीकों का पालन करना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विकास की समस्याओं को हल करने के लिए टकराव के दृष्टिकोणों से बचाते हैं। संयुक्त वक्तव्य में सदस्य देशों की राय को ध्यान में रखते हुए, पारस्परिक सम्मान, न्याय, समानता और पारस्परिक रूप से लाभप्रद सहयोग की भावना में नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के निर्माण में बातचीत को बढ़ावा देने के लिए पहल की प्रासंगिकता की पुष्टि की गई। वक्तव्य में 2022-2023 में संगठन में भारत की अध्यक्षता के लिए समर्थन व्यक्त किया गया।
प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने पुष्टि की कि सदस्य देशों ने वैश्विक आर्थिक शासन में और सुधार करना महत्वपूर्ण माना है। उन्होंने कहा कि वे विश्व व्यापार संगठन, उसके नियमों तथा सिद्धांतों के आधार पर एक खुली, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और गैर-भेदभावपूर्ण बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली की लगातार हिमायत करेंगे और इसे मजबूत करेंगे। सतत विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र 2030 एजेंडा के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सदस्य देशों के समावेशी आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में बातचीत बढ़ाने की भी हिमायत की गई है।
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