प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि कुछ देश सीमापार आतंकवाद को अपनी नीतियों में जगह देते हैं और आतंकवादियों को पनाह देते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शंघाई सहयोग संगठन-एससीओ को ऐसे देशों की आलोचना करने में हिचकना नहीं चाहिए। संगठन के शिखर सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे गम्भीर मामलों में दोहरे मापदंड नहीं रखे जाने चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता की समस्या से निपटने में भी परस्पर सहयोग की जरूरत पर बल दिया। आतंकवाद को क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए बडा खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए निर्णायक कार्रवाई की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन के देशों को आतंकवाद से मिलकर लडना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अफगानिस्तान के मामले में भारत की अपेक्षाएं और चिन्ता शंघाई सहयोग संगठन के अधिकांश देशों के समान ही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच सदियों पुराने रिश्ते हैं और भारत ने अफगानिस्तान के आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग पडोसी देशों में अस्थिरता फैलाने या कट्टरपंथी विचारधाराओं को प्रोत्साहन देने के लिए नहीं होने देना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन, पिछले दो दशकों में सम्पूर्ण एशिया क्षेत्र में शांति, खुशहाली तथा विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि संगठन के बहुआयामी सहयोग को नई उंचाईयों पर पहुंचाने के लिए भारत ने अध्यक्ष के रूप में निरन्तर प्रयास किये हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने संगठन में सहयोग के पांच नये स्तम्भ स्थापित किये हैं। ये हैं- स्टार्टअप और नवाचार, पारम्परिक औषधि, युवा सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन तथा साझा बौद्धिक विरासत। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने यह सुनिश्चित करने के प्रयास किये हैं कि संगठन के भीतर सहयोग केवल सरकारों तक ही सीमित न रहे। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में लोगों के बीच सम्पर्क बढाने के नये प्रयास किये गये हैं। पहली बार शंघाई सहयोग संगठन में मोटा अनाज खाद्य उत्सव, फिल्मोत्सव, सूरजकुंड शिल्प मेला, बुद्धिजीवियों का सम्मेलन तथा साझा बौद्धिक विरासत पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संघर्ष, तनाव और वैश्विक महामारी से घिरे विश्व में खाद्य, ईंधन तथा उर्वरक संकट से निपटना सभी देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। उन्होने इस पर मिलकर विचार करने को कहा कि क्या एससीओ, संगठन के रूप में लोगों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने में समर्थ है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संगठन विश्व की लगभग 40 प्रतिशत आबादी और लगभग एक-तिहाई वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए एक दूसरे की जरूरतों और संवेदनशीलता को समझना संगठन के देशों की साझा जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत संगठन में सुधारों और आधुनिकीकरण के प्रस्तावों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन, संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक संस्थाओं में सुधारों की महत्वपूर्ण आवाज बन सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान एस सी ओ परिवार का नया सदस्य बनने वाला है।
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