फर्जी फर्मों का संचालन और प्रबंधन करने वाले सिंडिकेट के खिलाफ निरंतर अभियान के तहत, जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (डीजीजीआई), जयपुर जोनल यूनिट ने दिल्ली स्थित एक बड़े अपराध सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।
यह सिंडिकेट 569 फर्जी फर्मों का संचालन कर रहा था और उनके माध्यम से 1,047 करोड़ रुपये की भारी धोखाधड़ी वाली आईटीसी बनाई थी। मास्टरमाइंड ऋषभ जैन, उम्र 30 वर्ष, दिल्ली निवासी ने इन फर्जी फर्मों को संचालित करने के लिए 10 कर्मचारियों को काम पर रखा था। व्यापक रेकी और डेटा विश्लेषण के बाद, डीजीजीआई, जयपुर के अधिकारी दिल्ली में इस मास्टरमाइंड का पता लगाने में सक्षम हुए और उसे पकड़ लिया।
कार्यप्रणाली से संकेत मिलता है कि सिंडिकेट का फर्मों, बैंक खातों, सिम कार्डों को खरीदने, उनके आरटीजीएस/नकद हस्तांतरण का प्रबंधन करने और उनके और लाभार्थी फर्मों के बीच मध्यस्थता करने के लिए विभिन्न दलालों के साथ घनिष्ठ संबंध है। ऐसे दलाल/एजेंट हैं जो गरीब, जरूरतमंद और अतिसंवेदनशील लोगों की आईडी का उपयोग करके जीएसटीएन पर फर्मों को पंजीकृत करने में माहिर हैं और इन पंजीकृत फर्मों को सिंडिकेट को बेचते हैं, जो आगे उनके माध्यम से नकली चालान जारी करते हैं। इस सिंडिकेट ने 6,022 करोड़ रुपये के कर योग्य कारोबार वाले चालान जारी किए हैं, जिसमें का 1,047 करोड़ का आईटीसी शामिल है, जो इन 569 फर्जी फर्मों के माध्यम से 2,000 से अधिक लाभार्थी फर्मों को दिए गए। अधिकांश फर्जी कंपनियां दिल्ली में स्थित हैं और 13 अन्य राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, झारखंड, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गोवा, असम और उत्तराखंड में भी मौजूद हैं। अब तक सिंडिकेट और दलालों द्वारा इस्तेमाल किए गए 73 बैंक खाते जब्त किए जा चुके हैं।
ऋषभ जैन को 25.06.2023 को गिरफ्तार किया गया और आर्थिक अपराध न्यायालय, जयपुर के समक्ष पेश किया गया और 07.07.2023 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
डीजीजीआई, जयपुर जोनल यूनिट पिछले वित्त वर्ष (2022-23) के दौरान फर्जी आईटीसी मामलों का पता लगाने में राजस्थान में सबसे आगे रही है। इस दौरान, फर्जी आईटीसी से जुड़े 142 मामले दर्ज किए गए जिसमें 1,327 करोड़ रुपए शामिल थे और 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस वित्तीय वर्ष (2023-24) में 3 महीने से भी कम समय में, 5 फर्जी आईटीसी मामलों में 5 मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ 1,531 करोड़ रुपए के मामले दर्ज किए गए हैं। यह इकाई ऐसे सिंडिकेट्स और उनके मास्टरमाइंडों का पता लगाने के लिए सभी निवारक कदम उठाने के लिए समर्पित है, जो फर्जी बिल जारी करके जीएसटी प्रशासन को खतरे में डाल रहे हैं। इस यूनिट ने पिछले सात दिनों के अंदर 2 बड़े सिंडिकेट को तोड़ने में सफलता हासिल की है। पिछले सप्ताह भी 19.06.2023 को जयपुर से 320 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी सिंडिकेट चलाने के आरोप में दो मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया गया था। सरकारी राजस्व की वसूली हेतु अनुवर्ती कार्यवाही की जा रही है।
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