Categories: News-Headlines

सहयोग समझौते के तहत दक्षिण अफ्रीका ने 17 फरवरी 2023 को 12 चीतों को भारत में स्थानांतरित किया

चीता मेटा-आबादी का विस्तार करने और पिछली सदी में अधिक शिकार होने व निवास क्षेत्र में हुई कमी के कारण स्थानीय स्तर पर विलुप्त होने के बाद एक पूर्व निवास-स्थल देश में चीतों को फिर से पेश के एक पहल के हिस्से के रूप में आज (शुक्रवार) दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के लिए बारह चीते रवाना होंगे। यह मीडिया वक्तव्य दक्षिण अफ्रीका के वानिकी, मत्स्य पालन और पर्यावरण विभाग द्वारा जारी किया गया। इन चीतों को सितंबर 2022 में नामीबिया से भारत के कुनो नेशनल पार्क में स्थानांतरित हुए आठ स्तनधारियों में शामिल किया जाएगा।

इस साल के शुरुआत में, दक्षिण अफ्रीका और भारत की सरकारों ने चीता को भारत में फिर से लाने के सहयोग पर आधारित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। समझौता ज्ञापन भारत में व्यावहारिक और सुरक्षित चीता आबादी स्थापित करने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग की सुविधा प्रदान करता है; संरक्षण को बढ़ावा देता है और यह सुनिश्चित करता है कि चीता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विशेषज्ञता को साझा एवं आदान-प्रदान किया जाए और क्षमता का निर्माण किया जाए। इसमें मानव-वन्यजीव संघर्ष समाधान, वन्यजीवों का स्थानांतरण और दोनों देशों में संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं।

प्रजातियों के संरक्षण और इकोसिस्टम को बहाल करने के लिए संरक्षण स्थानान्तरण एक आम प्रथा बन गई है। दक्षिण अफ्रीका चीता जैसी प्रतिष्ठित प्रजातियों की आबादी और सीमा विस्तार के लिए संस्थापक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाता है।

वानिकी, मत्स्य पालन और पर्यावरण मंत्री सुश्री बारबरा क्रीसी ने कहा, “यह दक्षिण अफ्रीका की सफल संरक्षण प्रथाओं के कारण है कि हमारा देश इस तरह की परियोजना में भाग लेने में सक्षम है – एक पूर्व निवास-स्थल देश में प्रजाति को बहाल करना और इस प्रकार प्रजातियों के भविष्य के अस्तित्व में योगदान करना।“

चीता, एसिनोनिक्स जुबेटस, दुनिया का सबसे तेज़ स्तनपायी है और अफ्रीका के सवाना के लिए स्थानिक है। हालांकि, दक्षिणी अफ्रीका चीता का पारंपरिक निवास-स्थल है, इसे वन्य जीवों और वनस्पतियों (सीआईटीईएस) की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन के तहत असुरक्षित माना जाता है और इसे परिशिष्ट-I में सूचीबद्ध किया गया है। चीता को 1952 में भारत में विलुप्त घोषित किया गया था। भारत द्वारा चीता की आबादी को बहाल करना महत्वपूर्ण और दूरगामी संरक्षण प्रयास माना जाता है, जिसका उद्देश्य विभिन्न पारिस्थितिक उद्देश्यों को हासिल करना है, जिसमें भारत में चीता की ऐतिहासिक सीमा के भीतर कार्य भूमिका को फिर से स्थापित करना और स्थानीय समुदायों के आजीविका विकल्पों व अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाना शामिल हैं। फरवरी में 12 चीतों के आगमन के बाद, अगले आठ से 10 वर्षों में वार्षिक तौर पर 12 और चीतों को स्थानांतरित करने की योजना है। ऐसे स्थानान्तरण के बारे में जानकारी के लिए समय-समय पर वैज्ञानिक आकलन किए जाएंगे।

दुनिया भर में, चीतों की संख्या 1975 में अनुमानित 15,000 वयस्कों से घटकर वर्तमान वैश्विक जनसंख्या 7,000 से कम हो गई है। दक्षिण अफ्रीका में, लोकतंत्र की शुरुआत जंगली चीता संरक्षण के लिए पर्याप्त सहायक सिद्ध हुई। गेम थेफ्ट एक्ट (1991 का नंबर 105) भूमि उपयोग के संबंध में कृषि से इकोटूरिज्म के बड़े बदलाव के लिए जिम्मेदार था। 1994 के बाद से चीतों को 63 नए स्थापित गेम रिजर्व में फिर से शामिल किया गया है जो वर्तमान में 460 चीतों की संयुक्त मेटा-आबादी का समर्थन करते हैं। मत्स्य पालन, वानिकी और पर्यावरण विभाग ने देश के बाहर प्रजातियों के संरक्षण प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रति वर्ष 29 जंगली चीतों के निर्यात को मंजूरी दी है।

स्थानान्तरण-प्रयास के तहत सर्वोत्तम संभव चीतों का चयन करने के लिए ठोस प्रयास किए गए। सभी 12 चीते जंगल में पैदा हुए हैं और शेर, तेंदुआ, लकड़बग्घा तथा जंगली कुत्तों सहित प्रतिस्पर्धी शिकारियों के बीच बड़े हुए हैं। उन्हें शिकारी प्रेमी माना जाता है और जब वे भारत में एक नए शिकारी संघ का सामना करेंगे, जिसमें बाघ, तेंदुए, भेड़िये, कुत्ते, धारीदार लकड़बग्घे और सुस्त भालू शामिल हैं, तो उन्हें उचित जवाब देना होगा। इन चीतों को फ़िंडा गेम रिज़र्व (3), तस्वालू कालाहारी रिज़र्व (3), वाटरबर्ग बायोस्फीयर (3), क्वांडवे गेम रिज़र्व (2) और मापेसु गेम रिज़र्व (1) द्वारा उपलब्ध कराया गया है और उनका स्थानान्तरण आईयूसीएन दिशानिर्देशों – स्थानान्तरण और अन्य संरक्षण स्थानांतरण के लिए अंतरराष्ट्रीय पशु चिकित्सा मानक और प्रोटोकॉल – के अनुरूप है।

यह बहु-अनुशासनात्मक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम; वानिकी, मत्स्य और पर्यावरण विभाग (डीएफएफई), अंतर्राष्ट्रीय संबंध और सहयोग विभाग (डीआईआरसीओ), दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय जैव विविधता संस्थान (एसएएनबीआई), दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रीय उद्यान (एसएएन पार्क), चीता मेटापोपुलेशन इनिशिएटिव, प्रिटोरिया विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा विज्ञान के संकाय और दक्षिण अफ्रीका में लुप्तप्राय वन्यजीव ट्रस्ट (ईडब्ल्यूटी) द्वारा भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत के उच्चायोग, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) तथा मध्य प्रदेश वन विभाग के सहयोग से समन्वित किया जा रहा है।

Leave a Comment

Recent Posts

AIBE 21 (XXI) 2026: बार काउंसिल जल्द जारी कर सकती है नोटिफिकेशन, जानें रजिस्ट्रेशन और परीक्षा से जुड़ी अहम बातें

AIBE 21 (XXI) 2026: बार काउंसिल जल्द जारी कर सकती है नोटिफिकेशन, जानें रजिस्ट्रेशन और… Read More

12 minutes ago

Skyroot Aerospace ने अंतरिक्ष मिशनों को दी नई रफ्तार, निजी स्पेस सेक्टर में भारत की बढ़ी ताकत

Skyroot Aerospace ने अंतरिक्ष मिशनों को दी नई रफ्तार, निजी स्पेस सेक्टर में भारत की… Read More

1 hour ago

Kal Ka Rashifal 19 July 2026: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से बदलेगा दिन, जानें मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का राशिफल

Kal Ka Rashifal 19 July 2026: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से बदलेगा दिन, जानें मेष… Read More

2 hours ago

भारत बनाम इंग्लैंड दूसरा वनडे: जो रूट की नाबाद 99 रन की पारी से इंग्लैंड की शानदार जीत, सीरीज 1-1 से बराबर

भारत बनाम इंग्लैंड दूसरा वनडे: जो रूट की नाबाद 99 रन की पारी से इंग्लैंड… Read More

22 hours ago

ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की बड़ी चुनौती, नए सीजन में जीत की लय बरकरार रखने पर नजर

ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की बड़ी चुनौती, नए सीजन में जीत की लय बरकरार रखने पर… Read More

1 day ago

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को बड़ी सौगात, 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ जारी

प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को बड़ी सौगात, 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ जारी नई दिल्ली:… Read More

1 day ago

This website uses cookies.