केन्द्र सरकार ने ‘हरित हाइड्रोजन’ या ‘हरित अमोनिया’ के उत्पादन के लिए एक प्रमुख नीति प्रवर्तक की घोषणा की है। इस नीति के लागू होने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कच्चे तेल का आयात भी कम होगा। प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष भारत के 75 वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन का शुभारंभ किया था। मिशन का उद्देश्य सरकार को जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने और भारत को हरित हाइड्रोजन का केंद्र बनाने में सहायता करना है।
अमृत काल में हमें भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट का ग्लोबल हब बनाना है। ये ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की एक नई प्रगति उसको आत्मनिर्भर बनाएगा और पूरे विश्व में क्लीन एनर्जी ट्रांजीशन की नई प्रेरणा भी बनेगा। ग्रीन ग्रोथ से ग्रीन जॉब के नए-नए अवसर हमारे युवाओं के लिए हमारे स्टार्टअप के लिए आज दस्तक दे रहे हैं।
हरित हाइड्रोजन नीति से कार्बन-मुक्त हरित हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को कम करने में मदद मिलेगी। नीति के अन्तर्गत कंपनियों को स्वयं या दूसरी इकाई के माध्यम से सौर या पवन ऊर्जा जैसे नवीकणीय स्रोतों से बिजली पैदा करने को लेकर क्षमता स्थापित करने की आजादी होगी। उर्जा मंत्रालय ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख टन हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
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