प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज पीएम गतिशक्ति के विजन पर वेबिनार को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि पीएम गतिशक्ति लॉजिस्टिक अवसंरचना सुधारने में बड़ी भूमिका निभाएगी और लॉजिस्टिक लागत कम करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यूनिफायड लॉजिस्टिक इंटरफेस प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी) विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा अपनाया जा रहा है और इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी आवश्यक है। छह मंत्रालयों की 24 डिजिटल प्रणालियां यूएलआईपी के माध्यम से एकीकृत की जा रही हैं। इससे राष्ट्रीय सिंगल विंडो लॉजिस्टिक पोर्टल बनेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत कम करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने पीएलआई पहल की चर्चा करते हुए निजी क्षेत्र से देश की अवसंरचना में निवेश करने को कहा।
बजट बाद के इस वेबिनार में बंदरगाह, शिपिंग तथा जलमार्ग मंत्रालय के सचिव डॉ. संजीव रंजन ने इस विषय पर अपना विचार साझा किया कि किस तरह यूएलआईपी भारतीय लॉजिस्टिक्स को क्रांतिकारी बना रहा है और मंत्रालय की भूमिका को किस तरह सफल बना रहा है।
उन्होंने कहा कि पीएम गतिशक्ति का उद्देश्य पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करना और अवसंरचना क्षमताओं को बढ़ाना, बाधारहित मल्टी मॉडल परिवहन के माध्यम से सक्षम लॉजिस्टिक, विभिन्न विभागों के बीच तालमेल करना है।
डॉ. संजीव रंजन ने कहा कि बंदरगाहों के इकोसिस्टम को और अधिक सक्षम बनाने तथा व्यावसायिक सुगम्यता को लागू करने के लिए 2006 में पोर्ट कम्युनिटी सिस्टम (पीसीएस) शुरू की गई थी। पीसीएस लागू करने के बाद 16000+ से अधिक कॉरपोरेट इसका उपयोग कर रहे हैं और इससे लाभान्वित हुए हैं। अब पीसीएस को नेशनल लॉजिस्टिक पोर्टल (एनएलपी मरीन) में उन्नत करने के प्रक्रिया जारी है। इससे संपूर्ण लॉजिस्टिक इकोसिस्टम अधिक सक्षम होगा, एक्जिम व्यापार लाभ होगा और विशेषज्ञता संपन्न नौकरियों के लिए अधिक अवसर बनेंगे। उन्होंने कहा कि यूएलआईपी के साथ एकीकृत होकर एनएलपी प्रक्रियाओं को मानक बनाएगा और संपूर्ण व्यापार से संबंधित प्रक्रियाओं को गति देगा।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय के सागरमाला कार्यक्रम का उद्देश्य बंदरगाह आधुनिकीकरण तथा बंदरगाह कनेक्टिविटी बढ़ाने की परियोजनाओं को लागू करके लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार करना है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2021 में डायरेक्ट पोर्ट डिलिवरी वित्त वर्ष 2018 के 39.15 प्रतिशत से बढ़कर 62.48 प्रतिशत हुआ है। 2020-21 में भारतीय बंदरगाहों पर कंटेनर ट्रैफिक 64.66 प्रतिशत बढ़ा है। आशा है कि 2030 तक इसमें लगभग ढाई गुना वृद्धि होगी। इस चुनौती से निपटने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी।
यूएलआईपी के तीन लेयर एकीकरण गवर्नेंस तथा प्रेजेंटेशन हैं। उन्होंने हितधारकों को इसके लाभ बताए तथा एकीकृत हितधारकों के बीच और अधिक तालमेल करने को कहा। उन्होंने दूसरों से इस एकीकरण का अधिक से अधिक लाभ उठाने को कहा।
बंदरगाह शिपिंग तथा जलमार्ग सचिव ने यूएलआईपी की आगे की राह की चर्चा की और कहा कि यूएलआईपी का उद्देश्य कागजरहित/केवल इलेक्ट्रॉनिक डेटा ट्रांसफर व्यवस्था बनाना है, जिससे परिपालन मानकों में कमी आएगी, एनएलपी/यूएलआईपी का उपयोग करने के लिए यूजरों तथा हितधारकों का विश्वास बढ़ाने के लिए वातावरण बनेगा। इसके लिए डेटा की प्रामाणिकता, प्रक्रियाओं का मानकीकरण और बाधारहित व्यापार की प्रक्रियाओं में तालमेल सुनिश्चित होगा और सभी के लिए व्यावसायिक सुगम्यता बढ़ेगी।
यूएलआईपी कार्गो की आवाजाही की रियल टाइम निगरानी करेगा, प्रारंभ से अंत तक इन्क्रीप्शन के साथ डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करेगा, लॉजिस्टिक लागत में कमी लाएगा, जिससे लागत स्पर्द्धी होगी। उन्होंने कहा कि यूएलआईपी जैसे आईटी हस्तक्षेप से यह सब कुछ हासिल किया जा सकेगा, जिससे नए रोजगार पैदा होंगे और रोजगार की भूमिका बनेगी।
पीएम गतिशक्तिः क्रिएटिंग सिनर्जी फॉर एक्सलेरेटेड इकोनॉमिक ग्रोथ विषय पर बजट बाद इस वेबिनार का संचालन नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने किया। सेमिनार में अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों ने अब तक यूएलआईपी की प्रगति पर विचार साझा किए।
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