केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच आपसी समझ सर्वोत्तम कार्यप्रणाली की को साझा करने और सहयोग की भावना से हमें महामारी के खिलाफ लड़ाई में मदद मिली है। उन्होंने यह बात आज दक्षिण भारत के आठ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप) के स्वास्थ्य मंत्रियों और प्रधान सचिवों/अतिरिक्त मुख्य सचिवों और प्रशासकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत दौरान कही। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच उल्लेखनीय तालमेल की सराहना की। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन रंगास्वामी भी उपस्थित थे।
वर्चुअल माध्यम से यह बैठक कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की तैयारियों और राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण अभियान की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में शामिल होने वाले राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों में डॉ के सुधाकर (कर्नाटक), डॉ वीना जॉर्ज (केरल), मा सुब्रमण्यम (तमिलनाडु) और थन्नीरु हरीश राव (तेलंगाना) शामिल हुए। राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों ने सर्वसम्मति से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को केंद्र सरकार के निरंतर समर्थन और उन्हें कोविड-टीकाकरण की आवश्यक खुराक प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया।
भारत में वयस्कों को टीके की पहली और दूसरी खुराक की कवरेज क्रमशः 95 फीसदी और 74 फीसदी की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ’’भारत का कोविड-19 टीकाकरण अभियान दुनिया में सफलता की एक दास्तान है, खास तौर से हमारे जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी कोविड-19 टीकाकरण अभियान को और बढ़ावा देने के लिए, हमने अब इस महीने से 15-17 वर्ष आयु वर्ग के लिए एहतियाती खुराक और टीकाकरण शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दोनों टीकों की खुराक की अनुमानित आवश्यकता से अधिक प्रदान की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीकाकरण अभियान की गति में कोई कमी न हो। उन्होंने राज्यों से अनुरोध किया कि वे 15-17 वर्ष आयु वर्ग के लिए और जिनकी दूसरी खुराक बाकी है उनके लिए टीकाकरण की गति में तेजी लाएं।
दूर-दराज के क्षेत्रों और एकांत घरों में रहने वालों की सेवा के लिए देश में टेली-कंसल्टेशन और टेली-मेडिसिन की भूमिका पर जोर देते हुए डॉ मंडाविया ने राज्यों को बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए हब और स्पोक मॉडल के हिस्से के तौर पर ज्यादा से ज्यादा टेली-कंसल्टेशन सेंटर खोलने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
उन्होंने बताया, ’’टेली-कंसल्टेशन सेंटर से हमें न सिर्फ कोविड महामारी के दौरान, बल्कि कोविड से इतर चिकित्सा देखभाल के लिए भी हमारी मदद करेंगे।’’ केरल ने जानकारी दी कि कैंसर, मधुमेह प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य आदि गैर-कोविड के लिए भी टेली-मेडिसिन केंद्रों के माध्यम से उन लोगों को चिकित्सा देखभाल की सेवा प्रदान की गई जो एकांत घरों में थे और उन्होंने संस्थानों सुविधाओं नहीं पहुंच पा रही थी। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने बहुत बड़ी संख्या में टेली-कंसल्टेशन के साथ ई-संजीवनी में अच्छी प्रगति दिखाई है, उनके इन प्रयासों की सराहना की गई।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने मजबूत और लचीला स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और ईसीआरपी-2 पैकेज के महत्व को रेखांकित किया जिसके तहत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को धन उपलब्ध कराया गया है और 31 मार्च, 2022 से पहले इसका उपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्यों को सलाह देते हुए कहा,’’जबकि कुछ राज्यों ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए स्वीकृत धन के प्रभावी उपयोग में तेजी लाई है, वहीं अन्य राज्य भी ईसीआरपी-2 के तहत भौतिक और वित्तीय प्रगति की समीक्षा कर सकते हैं और इसमें प्रगति में तेजी ला सकते हैं।’’
डॉ. मंडाविया ने दोहराया कि कोविड प्रबंधन के लिए मामलों की प्रभावी निगरानी के साथ-साथ ’परीक्षण-खोजबीन-उपचार-टीकाकरण और कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन’ के 5 रणनीतिक उपाय महत्वपूर्ण है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उभरते क्लस्टर और हॉटस्पॉट पर कड़ी नजर रखने की सलाह दी गई। जिन राज्यों ने कोविड-परीक्षण में आरटीपीसीआर की कम हिस्सेदारी की सूचना दी है, उन्हें इसकी समीक्षा करने की सलाह दी गई है। उन्होंने सलाह दी कि पर्याप्त और समय पर परीक्षण से संक्रमित मरीजों की शीघ्र पहचान करने और अचानक वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी।
राज्यों को कोविड प्रतिक्रिया और प्रबंधन के लिए उनके प्रयासों में केंद्र से पूरी मदद का आश्वासन देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उनसे समय पर डेटा प्रदान करने का आग्रह किया क्योंकि इससे अधिक मजबूत और कुशल नीति निर्माण होगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री, डॉ भारती प्रवीण पवार ने सभी राज्यों को ईसीआरपी-2 निधि का पूरी तरह से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्रयोगशालाओं को मजबूत करने, कमी की सूरत में दवाओं की खरीद का आदेश समय पर देने, पीएसए संयंत्रों को चालू करने में तेजी लाने और अधिक टेली-कंसल्टेशन केंद्र खोलने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि टेली-कंसल्टेशन से भविष्य में मरीजों के इलाज में मदद मिलेगी और सह-रुग्णता वाले मरीजों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में कोविड प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक और विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें कोविड परीक्षणों की नियमित निगरानी, अस्पताल के बिस्तरों की आक्यूपेंसी, पाजिटिव और एक्टिव केसों में वृद्धि, अस्पताल के बुनियादी ढांचे में सुधार, परीक्षण में वृद्धि, संचरण की श्रृंखला को तोड़ने के लिए कड़े प्रतिबंधात्मक उपाय और जनसमूहों के बीच कोविड अनुरूप व्यवहार पर जोर देना शामिल हैं। कर्नाटक ने 8 क्षेत्रों में स्थापित 8 युद्ध कक्षों की जानकारी दी, जिनकी निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई थी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कोविड महामारी से निपटने के लिए मेडिकल एचआर को बढ़ाने की जानकारी दी। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों ने ’बुखार सर्वेक्षण’ आयोजित करने का जिक्र किया जहां स्वास्थ्यकर्मी बुखार और एसएआरआई/आईएलआई के लिए निवासियों की निगरानी के लिए घर-घर गए। तेलंगाना ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अस्पतालों में बिस्तर की उपलब्धता के बारे में वास्तविक समय की जानकारी देने वाले सभी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों में एक अस्पताल बिस्तर प्रबंधन प्रणाली स्थापित की गई है। इसके अलावा, परिवारों की निगरानी और दवाओं, परीक्षण किट आदि के साथ उनका सहयोग करने के लिए एक बहु-विभाग समूह बनाया गया है। ये समूह हर दिन लगभग 40-50 घरों का दौरा करते हैं।
राजेश भूषण, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, डॉ बलराम भार्गव, डीजी आईसीएमआर, डॉ मनोहर अगनानी, एएस (स्वास्थ्य मंत्रालय), लव अग्रवाल, जेएस (स्वास्थ्य मंत्रालय), डॉ सुजीत सिंह, निदेशक, एनसीडीसी और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी और बैठक में मौजूद थे।
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