केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स श्रम और रोजगार मंत्रियों की बैठक को संचालित किया। बैठक में सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के मंत्रियों ने भाग लिया।
भारत ने वैश्विक श्रम बाजार पर पड़ने वाले कोविड -19 के प्रभाव पर विचारों का आदान-प्रदान करने, सूचना साझा करने को विस्तृत करने, चर्चा करने तथा ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सहयोग के विशिष्ट क्षेत्रों पर सहमत होने के लिए ब्रिक्स श्रम एवं रोजगार मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया। सदस्य राष्ट्रों के बीच सहयोग की प्राथमिकता वाले चार क्षेत्रों पर चर्चा हुई, अर्थात् ब्रिक्स देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौतों को बढ़ावा देना; श्रम बाजारों का औपचारिककरण; श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी; और रोज कमाने वाले तथा अस्थायी श्रमिकों की श्रम बाजार में भूमिका।
बैठक का महत्वपूर्ण पहलू ब्रिक्स श्रम एवं रोजगार मंत्रियों की घोषणाओं को अपनाना था। मंत्रिस्तरीय घोषणा में यह स्वीकार किया गया कि कोविड -19 महामारी ने बेरोजगारी, सम्माननीय कार्य की कमी और असमानता को दूर करने के प्रयासों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। यह मजबूत राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं, समावेशी श्रम बाजारों एवं सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के साथ इससे उबरने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के मजबूत दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है।
अपने उद्घाटन भाषण में, भूपेंद्र यादव ने ब्रिक्स सदस्यों के बीच एकजुटता बढ़ाने और सभी के लिए निरंतर, समावेशी, पूर्ण एवं उत्पादक रोजगार तथा सम्माननीय कार्यों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा चार श्रम कानूनों अर्थात् “वेतन संहिता विधेयक 2019”, “सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020”, “औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक 2020” तथा “व्यवसायगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां संहिता 2020” में अपने श्रम कानूनों के एकीकरण, सरलीकरण तथा वर्गीकरण के द्वारा पथ-प्रदर्शक सुधारों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। नए श्रम कानून श्रम बाजार के मजबूत औपचारिकीकरण, श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और श्रम बाजार में अनुबंधित तथा अस्थायी श्रमिकों की भूमिका को बढ़ाने के लिए एकीकृत मार्ग प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय प्रवासी कामगारों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
“ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौतों को बढ़ावा देने” के मुद्दे पर ब्रिक्स मंत्रियों ने सीमा पार श्रम प्रवाह के लिए रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा पर ब्रिक्स देशों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और उचित समय सीमा के भीतर ब्रिक्स देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौते शुरू करने का संकल्प लिया। “श्रम बाजारों के औपचारिककरण” के मुद्दे पर सदस्य राष्ट्रों ने अनौपचारिकता से औपचारिकता में परिवर्तन को जीवन और काम करने की स्थिति में सुधार, उत्पादकता और नौकरी में वृद्धि और गुणवत्ता वाले रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच के माध्यम से गरीबी को कम करने के प्रयासों को मजबूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ब्रिक्स देशों ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि, श्रम बाजार में महिलाओं की निरंतर हिस्सेदारी तथा लाभकारी, उत्पादक और सभ्य कार्यों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए रणनीति राष्ट्रीय नीति एजेंडे में सर्वोच्च प्राथमिकता है। श्रम बाजार में रोज कमाने वाले तथा अस्थायी श्रमिकों की भूमिका को बढ़ाने के लिए ब्रिक्स मंत्रियों ने डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास का समर्थन किया, जिसमें सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी भी शामिल है, साथ ही कोविड -19 जैसे संकट की स्थिति में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं को लचीलापन प्रदान करने में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को स्वीकार किया गया।
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