नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसईसीआई) ने भारत की सबसे बड़ी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) को सफलतापूर्वक परिचालित किया है, जो सौर ऊर्जा का उपयोग करके ऊर्जा का भंडारण करती है। यह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में स्थापित है। यह सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) संयंत्र के साथ 40 मेगावाट (मेगावाट)/120 मेगावाट बीईएसएस है, जिसकी स्थापित क्षमता 152.325 मेगावाट घंटा (मेगावाट) और प्रेषण क्षमता 100 मेगावाट एसी (155.02 मेगावाट पीक डीसी) की है। इस बिजली की खरीदारी छत्तीसगढ़ करेगा। इस प्रकार यह हरित इलेक्ट्रॉनों का उपयोग करके राज्य में काफी अधिक ऊर्जा मांग की जरूरत को पूरा करने और इसके नवीकरणीय खरीद दायित्वों में भी अपना योगदान देगा। इस परियोजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज यानी 24 फरवरी, 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्र को समर्पित किया है।
सौर पैनलों और बैटरी भंडारण का उपयोग करने वाली यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन व उपयोग में एक बड़ी प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। यह परियोजना सूर्य के चमकने पर सौर ऊर्जा को एकत्रित करने के लिए बैटरी भंडारण का उपयोग करती है और इसके बाद राज्य में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए शाम के समय बिजली की अधिक मांग की जरूरत के दौरान इसका उपयोग करती है। इस परियोजना के तहत बिफेशियल मॉड्यूल स्थापित किए हैं, जो जमीन से प्रकाश को परावर्तित करते हैं, इस प्रकार मोनोफेशियल मॉड्यूल की तुलना में यह अधिक बिजली उत्पादन करते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए एक नया मानक स्थापित होता है।
इस परियोजना का एक अनूठा पहलू पहले से अप्रयुक्त भूमि का रणनीतिक उपयोग है। छत्तीसगढ़ सरकार के ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और एसईसीआई के बीच त्रिपक्षीय भूमि उपयोग अनुमति समझौते के माध्यम से राजनांदगांव जिले की डोंगरगढ़ और डोंगरगांव तहसील के 9 गांवों की 451 एकड़ बंजर भूमि का पुनरुद्धार किया गया है। इस तरह परियोजना के तहत पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हुए ऊर्जा परियोजना विकास के लिए एक स्थायी दृष्टिकोण अपनाया गया है।
यह परियोजना मौजूदा पावर ग्रिड में निर्बाध एकीकरण की सुविधा प्रदान करके छत्तीसगढ़ राज्य पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीटीसीएल) के 220/132 किलोवोल्ट (केवी) ठेलकाडीह सबस्टेशन को 132 किलो-वोल्ट (केवी) डबल-सर्किट डबल-स्ट्रिंग ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से बिजली की कुशल पारेषण सुनिश्चित कर समग्र बिजली स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।
इस परियोजना के चालू होने से हर साल कई टन कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। राज्य बिजली वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) के साथ एसईसीआई का दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौता इस परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता और ऐसे नवीकरणीय ऊर्जा प्रयासों के लिए सहायता को रेखांकित करता है।
इस परियोजना का निर्माण सौर ऊर्जा व हाइब्रिड प्रौद्योगिकी परियोजना में नवाचार के तहत विश्व बैंक और स्वच्छ प्रौद्योगिकी कोष से वित्त पोषण के साथ-साथ घरेलू ऋण एजेंसियों से प्राप्त वित्तपोषण के साथ किया गया है। इसके अलावा यह परियोजना को व्यावसायिक रूप से आकर्षक और व्यावहारिक बनाने, स्थायी वित्तीय व्यवस्था को परिचालित करने के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को रेखांकित करता है।
इस परियोजना से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दूरगामी सकारात्मक प्रभाव पड़ने और भारत व वैश्विक स्तर पर भूमि संसाधनों के जवाबहेद उपयोग को बढ़ावा मिलने की आशा है।
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