वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR), नई दिल्ली और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL), एक नवरत्न एनओसी ने ऊर्जा मूल्य श्रृंखला के विशिष्ट क्षेत्र ( डोमेन) में तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (अम्ब्रेला मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग –MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सीएसआईआर और ओआईएल की प्रयोगशालाओं के बीच एक सहयोगी व्यवस्था होगी।
इस समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक एवं वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसन्धान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव डॉ. एन कलैसेल्वी, तथा आयल इडिया लिमिटेड (ओआईएल) के मुख्य महाप्रबंधक (सीएमडी) डॉ. रंजीत रथ ने हस्ताक्षर किए। इस आयोजन में ओआईएल के डी (ओ) और डी (ई एंड डी), एमडी (एनआरएल), सीएसआईआर के संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार (जेएस एंड एफए), सीएसआईआर में संयुक्त सचिव प्रशासन (जेएसए) एवं सीएसआईआर के विधिक सलाहकार (लीगल एडवाइजर-एलए), सीएसआईआर के वैज्ञानिक निदेशालय के प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशक और सीएसआईआर के प्रख्यात वैज्ञानिक इस कार्यक्रम में वर्चुअल मोड में शामिल हुए।
समझौता ज्ञापन (अम्ब्रेला मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग – एमओयू) ओआईएल और सीएसआईआर प्रयोगशालाओं (लैब्स) के बीच सहयोग के लिए एक औपचारिक रूपरेखा तैयार करता है। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग की सुविधा प्रदान करना है। संयुक्त अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों और प्रौद्योगिकी साझेदारी के लिए पहचाने गए प्रारंभिक क्षेत्रों में निम्नवत शामिल हैं :
हाइड्रोकार्बन अन्वेषण में नए अग्रणी क्षेत्र ;
अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम ऑपरेशन ;
नई और नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी / भंडारण प्रणाली ;
हरित और नवीकरणीय हाइड्रोजन / बायोहाइड्रोजन (एच 2)
पर्यावरण प्रदूषण को कम करना और बायोरेमेडिएशन
अपशिष्ट उपचार सहित तेल पृथक्करण और अपशिष्ट जल से पुनर्प्राप्ति और कच्चे तेल कीचड़ सहित अपशिष्ट कीचड़ ;
क्षरण (जंग) का निरीक्षण और जंग विरोधी कोटिंग ;
ऑयलफ़ील्ड जल से लिथियम और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ्स) का निष्कर्षण;
अणुओं को ईंधन देने के लिए बाधित (स्ट्रैंडेड) हुई प्राकृतिक गैस; और
डीकार्बनाइजेशन और शुद्ध शून्य लक्ष्य।
इस अवसर पर, डॉ रंजीत रथ ने कहा, “ आयल इडिया लिमिटेड (ओआईएल) का भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) तथा पूर्वोत्तर विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी संस्थान (एनईआईएसटी) जैसी वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) प्रयोगशालाओं के साथ एक दीर्घकालिक संबंध है और अतीत में हमने एक साथ मिलकर काम किया है। वर्तमान एमओयू सीएसआईआर की सभी प्रयोगशालाओं के साथ सहयोग के लिए प्रवेश द्वार खोलेगा। ओआईएल एक एकीकृत ऊर्जा कंपनी होने के नाते हितधारकों को मूल्य प्रदान करने वाली वैश्विक उपस्थिति के साथ ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में प्रौद्योगिकी अपनाने के मामले में सबसे आगे रहने का इरादा रखती है। मिशन मोड में इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सीएसआईआर के साथ सहयोग एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा।
सीएसआईआर की महानिदेशक ने अपने सम्बोधन में कहा, “सीएसआईआर एक प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संगठन है जो अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और उत्पादों के विकास में लगा हुआ है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास में अपनी क्षमताओं और दक्षता के लिए जानी जाती है। इस प्रकार, यह सहयोग न केवल पारस्परिक रूप से लाभप्रद होगा बल्कि देश और सामान्य नागरिकों के लिए भी दीर्घकालिक रूप से लाभ पहुंचाने वाला सिद्ध होगा।”
दोनों संगठन प्रशिक्षण और कौशल विकास के माध्यम से क्षमता निर्माण की दिशा में काम करने पर भी सहमत हुए हैं। ओआईएल सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, आकांक्षी जिलों, ग्रामीण विकास, सरकारी मिशनों / पहलों आदि को आगे बढाने के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व ( सीएसआर) वित्त पोषण सहायता प्रदान करने पर भी विचार करेगा।
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