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स्वास्थ्य मंत्री ने लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के राजदूतों के साथ बातचीत की, भारत सभी देशों को कोविशील्ड और कोवैक्सिन की आपूर्ति करने को तैयार

“भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के दर्शन से प्रेरित है जिसने हमें अपने सभी मित्र देशों को कोविड-19 टीके, एचसीक्यू और अन्य चिकित्सा सामग्री को उपहार में देने के लिए प्रेरित किया है। इसके अलावा, भारत सभी उपस्थित देशों को कोविशील्ड और कोवैक्सिन की आपूर्ति करने को तैयार है।”यह बात केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज लैटिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों (ग्रुलैक समूह) के राजदूतों के साथ अपनी बैठक में कही।

डॉ. मांडविया ने अपने संबोधन में भविष्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रकोप से लड़ने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “भारत संपूर्ण दृष्टिकोण के तहत कोविड-19 से लड़ने में सक्षम रहा है, जहां प्रांतीय और स्थानीय प्रशासन ने भारत सरकार के प्रयासों को गति प्रदान की है।’’ कोविड-19 पर अंकुश लगाने की भारत की रणनीति के बारे में बताते हुए उन्होंने भारत में स्वीकृत छह टीकों पर बात की, जिनमें से दो स्वदेशी रूप से विकसित हैं। 82% भारतीयों को टीके की कम से कम एक खुराक और 44% भारतीयों को टीके की दोनों खुराक दिए जाने के साथ देश में लगभग 1.2 अरब खुराक दी जा चुकी हैं।

मंत्री ने भारत में हुए टीकाकरण को मान्यता देकर लोगों के बीच संपर्क को आसान बनाने के लिए देशों के प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया। भारत के टीकाकरण को वर्तमान में 110 देशों द्वारा मान्यता दी गई है। उन्होंने कहा, “टीकाकरणों की पारस्परिक मान्यता से पर्यटन और व्यवसाय के लिए यात्रा में आसानी होती है, जिससे आर्थिक सुधार को बढ़ावा मिलता है, जिसकी दुनिया को सख्त जरूरत है।”

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने पूरे महामारी में अन्य देशों की कैसे मदद की: विश्व की फार्मेसी होने के नाते, भारत ने 27 देशों को उदारतापूर्वक एचसीक्यू टैबलेट और अन्य चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की है। वैक्सीन मैत्री पहल के तहत 95 देशों को 6.63 करोड़ खुराक भेजी गईं।

सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर बोलते हुए, डॉ मांडविया ने कहा कि भारत के प्रमुख टेलीमेडिसिन पोर्टल ई-संजीवनी में सात करोड़ से अधिक टेलीकंसल्टेशन दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी में भारत की विशेषज्ञता के साथ, भारत अपने टीकाकरण कार्यक्रम के लिए कोविड प्लेटफॉर्म को जल्दी से तैनात कर सका। उन्होंने कहा कि भारत पहले ही इस प्रौद्योगिकी को अपनाने के इच्छुक साझेदार देशों के साथ प्रौद्योगिकी साझा कर चुका है और यह सभी देशों को उनके टीकाकरण अभियान को बढ़ाने में मदद करेगा।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल (यूनिवर्सल हेल्थ केयर) की दिशा में भारत के विजयी मार्च की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने आयुष्मान भारत के चार स्तंभों के बारे में बताया। आयुष्मान भारत के चार स्तंभ: प्राथमिक स्तर पर 1.5 लाख स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों की परिकल्पना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जो लक्षित जनसंख्या वर्गों को बीमा प्रदान करती है, स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन जो नैदानिक और निगरानी क्षमताओं के साथ-साथ भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करेगा, डिजिटल मिशन जो सभी भारतीयों को एक विशिष्ट स्वास्थ्य आईडी प्रदान करेगा और सेकंडों में अनुमोदित चिकित्सकों को उनका चिकित्सा इतिहास उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार में, भारत की स्वास्थ्य सेवा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन देखा जा रहा है, जिसे उनके मित्र देश अपना सकते है।”

उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय दवा कंपनियां इन सभी देशों के लिए सुरक्षित सस्ती प्रभावकारी दवाओं का उत्पादन करती हैं और उनका ध्यान भारत के जन औषधि केंद्रों पर हैं, वे भारत में संभावित लाभार्थियों को सबसे सस्ती जेनेरिक दवाएं बेचते हैं। समान सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों वाले इन देशों में गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए इस पहल को अपनाने की संभावना पर चर्चा की गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित हुए देशों से स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक विनिमय कार्यक्रम की संभावना का अध्ययन करने का भी आह्वान किया। इससे भारतीयों के लिए अमेरिकी महाद्वीप में कौशल उन्नयन और स्वास्थ्य की विशेषज्ञता हासिल करने का मौका मिलेगा, जबकि इन देशों के छात्र कार्डियोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, ऑप्थल्मोलॉजी के क्षेत्र में भारत की उच्च गुणवत्ता वाली विश्व स्तरीय चिकित्सा पद्धतियों की जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने चिकित्सा पर्यटन में सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला।

चिकित्सा पर्यटन के संबंध में केंद्रीय सचिव (स्वास्थ्य), राजेश भूषण ने कहा कि नैक बोर्ड भारत में अस्पतालों का प्रत्यायन करता है और इन देशों के अन्य प्रत्यायन निकायों के साथ सहयोग से सामान्य मानक स्थापित होंगे और इस उभरते क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय सचिव (फार्मा), एस. अपर्णा ने राजदूतों का ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाया कि 700 से अधिक उत्पादन केंद्रों के साथ भारत केवल अमेरिका के बाद फार्मास्युटिकल फॉर्मूलेशन का सबसे बड़ा उत्पादक है। निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में हालांकि मुख्य रूप से तैयार उत्पाद शामिल हैं, इसमें मध्यवर्ती उत्पाद हैं जो निरंतर आपूर्ति श्रृंखला का संकेत देते हैं और इस प्रकार इन देशों के साथ अधिक जुड़ाव की संभावना होती है। उन्होंने ग्रीनफील्ड फार्मा पहल के लिए भारत के प्रोत्साहन और इस क्षेत्र में निवेश की संभावना पर भी बात की।

इस कार्यक्रम में शामिल हुए पराग्वे के राजदूत एच.ई. फ्लेमिंग दुआर्ते, चिली के राजदूत, एच.ई. जुआन अंगुलो, मेक्सिको के राजदूत, एच.ई. फेडेरिको सालास, कोलंबिया के राजदूत, एच.ई. मारियाना पाचेको ने इस समूह की ओर से अपने विचार रखे और भारत को कोविड-19 महामारी से निपटने में उसके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

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